Thursday, July 2, 2009

हिन्दी फिल्मों में बरसात वाले गाने २ नमक हलाल १९८२

भारतीय फ़िल्म इतिहास के सबसे प्रतिभाशाली सितारों में से दो सितारे हैं
इस गाने में। १९८३ में एक फ़िल्म आई थी 'नमक हलाल' इस फ़िल्म में
अमिताभ ने बढ़िया हास्य अभिनय किया है। ये गाना बढ़िया बरसाती गीतों
में से एक माना जाता है। हाथ ठेले को जो ग्रेस प्रदान किया गया है इस
गाने में, उससे ठेला चलने वाले भाई जरूर खुश हुए होंगे। उनमे से कुछ ने
अपनी अपनी माशूकाओं को या बीवियों को उसमे बिठा के ऐसा ही कुछ
कारनामा करने की कोशिश जरूर की होगी।

अमिताभ का नृत्य देख कर हमेशा पुराने ज़माने के कलाकार 'भगवान' की
याद आ जाती है। ये गाना मानो ट्रीब्युट जैसा है भगवन दादा को। स्मिता
और अमिताभ दोनों ने एक ही प्रकार का नृत्य किया है।

फिल्मों में से हास्य कलाकार की जरूरत ख़तम करने का श्रेय अमिताभ को भी
थोड़ा सा जाता है। उन्होंने खुद हास्य करना शुरू कर दिया या उनसे ऐसा करने
को कहाँ गया निर्देशकों द्वाराशायद हिरोइन की जरूरत के साथ वो छेड़ छाड़
नहीं कर पाए क्यूंकि हिन्दी फ़िल्म की परिभाषा बदलना पड़ जाती ।

गायक: किशोर कुमार, आशा भोसले
संगीतकार: बप्पी लहरी



गीत के बोल:

अरे अरे अरे ना, ना, ना,ना

आज रपट जाएँ तो हमें ना उठइयो
आज फिसल जाएँ तो हमें ना उठइयो
हमें जो उठइयो तो
हमें जो उठइयो तो, खुद भी रपट जइयो
हाँ खुद भी फिसल जइयो
आज रपट ,आ हा,
आज रपट जइयो तो हमें ना उठइयो

बरसात में थी कहा बात ऐसी
पहली बार बरसी बरसात ऐसी
बरसात में थी कहा बात ऐसी
पहली बार बरसी बरसात ऐसी
कैसी ये हवा चली, हा
पानी में आग लगी, हा
जाने क्या प्यास जगी रे
भीगा ये तेरा बदन, हा
जगाये मीठी चुभन, हा
नशे में झूमे ये मान रे,

कहा हूँ मैं मुझे भी ये होश नहीं, आ
आ हा ओ हो, आ हा ओ हो,
आज बहक जाएँ तो होश ना दिलइयो
आज बहक जाएँ तो होश ना दिलइयो
होश जो दिलइयो तो
होश जो दिलइयो तो, खुद भी बहक जइयो
आज रपट आ हा
आज रपट जाएँ तो हमें ना उठइयो

बादल में बिजली बार बार चमके
दिल में मेरे आज पहली बार चमके
बादल में बिजली बार बार चमके
दिल में मेरे आज पहली बार चमके

हसीना डरी डरी, हा
बाहों में सिमट गयी, हा
सीने से लिपट गयी रे
तुझे तो आया मज़ा, हा
तुझे तो सूझी हंसी, हा
मेरी तो जान फंसी रे

जाने जिगर किधर चली नज़र चुराके
आ हा ओ हो, आ हा ओ हो,
बात उलझ जाए तो आज ना सुलझइयो
बात उलझ जाए तो आज ना सुलझइयो
बात जो सुलझइयो तो
बात जो सुलझइयो तो, खुद भी उलझ जइयो
आज रपट, आ हा
आज रपट जाएँ तो हमें ना उठइयो

बादल से छम छम शराब बरसे
सांवरी घटा से शबाब बरसे
बादल से छम छम शराब बरसे
हो ,सांवरी घटा से शबाब बरसे

बूंदों की बजी पायल, हा
घटा ने छेड़ी ग़ज़ल, हा
ये रात गयी मचल रे

दिलों के राज़ खुले, हा
फिजा में रंग घुले, हा
जवां दिल खुलके मिले रे
होना था जो हुआ वही अब डरना क्या
आ हा ओ हो , आ हा ओ हो
आज डूब जाएँ तो हमें ना बचइयो
आज डूब जाएँ तो हमें ना बचइयो
हमें जो बचइयो तो
हमें जो बचइयो तो, खुद भी डूब जइयो
आज रपट, आ हा
आज रपट जाएँ तो हमें ना उठइयो
आज फिसल जाएँ तो हमें ना उठइयो,

आ हा ओ हो, आ हा ओ हो
..................................
Aaj rapat jayen to-Namak halal 1982

2 comments:

सतीश घारपुरे,  June 29, 2011 at 3:11 PM  

धन्यवाद् गीत के बोलों के लिए

Anonymous,  December 12, 2014 at 1:34 AM  

"फिल्मों में से हास्य कलाकार की जरूरत ख़तम करने का श्रेय अमिताभ को भी थोड़ा सा जाता है"
__hilarious

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