August 29, 2016

हीरों से मोती से-आगे की सोच १९८७

दादा कोंडके समय से आगे की सोच वाले फिल्मकार थे.
उन्होंने काफी क्लासिक फिल्मों बनायीं. सामाजिक और
दूसरी व्यवस्थाओं पर उनकी फिल्मों में कटाक्ष है कुछ
अलग तरह से. उनकी फिल्मों के संवाद द्विअर्थी ज्यादा
होते थे, हालांकि ये सब सीमा के भीतर होता था.

आज के समय के हिसाब से उनकी फ़िल्में सोबर लगती
हैं. उन्होंने अपनी बात कहने के लिए दुसरे निर्देशकों की
तरह मुखौटा नहीं लगाया.  सीधे सीधे बेबाक बात कह
दी फिल्मों में. व्यावसायिक दृष्टि से सोचें तो उनकी गिनती
सफल फिल्मकारों में होती थी.

आइये फिल्म आगे की सोच से तीसरा गीत सुनें जिसे
गाया है किशोर कुमार संग उषा मंगेशकर ने और जिसका
संगीत तैयार किया है राम लक्ष्मण ने. गीत लिखा है
बालकिशन पुरी ने. बॉलीवुड क्लासिक्स ने इसे यू-ट्यूब
पर अपलोड किया है.




गीत के बोल:

हीरों से मोती से फूलों से गहनों से तुझको सजा देता
हीरों से मोती से फूलों से गहनों से तुझको सजा देता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता
गांवों में शहरों में दिल्ली में गली में हंगामा हो जाता
क्या बात है
गांवों में शहरों में दिल्ली में गली में हंगामा हो जाता
अरे मैं होती रानी जो राजा तू होता
हाय मैं होती रानी जो राजा तू होता

तुझे काजल बना लेती ओए अंखियों में बसा लेती
ला ला ला ला ला ला ला
तुझे काजल बना लेती ओए ओए ओए अंखियों में बसा लेती
अपने होंठों की लाली से तुझे तिलक लगा देती
अपने होंठों की लाली से तुझे तिलक लगा देती
तेरी अदा पे मैं दौलत तो क्या जान कुर्बान कर देता
अरे तेरी अदा पे मैं दौलत तो क्या जान कुर्बान कर देता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता

तुझे दुनिया घुमा देता सारी रौनक दिखा देता
ला ला ला हो ला ला ला
तुझे दुनिया घुमा देता सारी रौनक दिखा देता
तुझे देवी बना लेता हो दिल के मंदिर में रख लेता
तुझे देवी बना लेता हो दिल के मंदिर में रख लेता
हो मैं तेरी देवी तू मेरा पुजारी ज़माना नहीं मानता
हो मैं तेरी देवी तू मेरा पुजारी ज़माना नहीं मानता
अरे मैं होती रानी जो राजा तू होता
मैं होती रानी जो राजा तू होता

किसी और की बाहों में तेरी बाहें अगर होतीं
कभी ना ना ना कभी ना ना ना
किसी और की बाहों में तेरी बाहें अगर होतीं
हाय रूठ के सैयां मैं मायके चली जाती
हाय रूठ के सैयां मैं मायके चली जाती
तू रूठ जाती तो तुझको मनाने को घंटा बजा देता
तू रूठ जाती तो तुझको मनाने को घंटा बजा देता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता हाँ

गांवों में शहरों में दिल्ली में गली में हंगामा हो जाता
अरे रे रे रे रे
गांवों में शहरों में दिल्ली में गली में हंगामा हो जाता
अरे मैं होती रानी
अरे अरे अरे अरे मैं होता राजा
मैं होती रानी
तो राजा मैं होता
तो राजा मैं होता
तो राजा मैं होता
तो राजा मैं होता ता ता ता
................................................................
Heeron se moti se-Aage ki soch 1987


Artists: Dada Kondke, Swapna

1 comments:

Mayank,  September 3, 2016 at 12:26 PM  

I like dis song

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