September 7, 2016

तुम्हें बांधने के लिये-रत्नाघर १९५५

पंडित नरेन्द्र शर्मा ने कई नायाब गीत लिखे हैं और उनमें से
अधिकाँश लता मंगेशकर के गाये हुए हैं. नरेन्द्र शर्मा और उनके
परिवार से लता का अटूट रिश्ता रहा है. शर्मा का परिवार भी
लता को परिवार का ही एक हिसा मानता है. ये रिश्ता आज भी
कायम है.

सुधीर फडके मराठी चित्रपट जगत के ख्यात संगीतकार हैं. उन्होंने
कुछ हिंदी फिल्मों में भी संगीत दिया है. परंपरागत शैली में सुधीर
ने मधुर संगीत दिया है. उनके संगीत को अनावश्यक शोरगुल की
जरूरत नहीं पड़ी.

फिल्म का नाम है रत्नाघर जो सन १९५५ की फिल्म है. निर्देशक
हैं यशवंत पेठाकर. राजा परांजपे, शकुंतला और ललिता पवार इस
फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं.

  



गीत के बोल:

तुम्हें बांधने के लिये मेरे पास और क्या है
मेरा प्रेम है
मेरा प्रेम है रे
मेरा प्रेम है
मेरा प्रेम है रे
मेरा प्रेम है

गाँठ  कली की खुल खुल जाती
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
गाँठ  कली की खुल खुल जाती
खुशबू उड़ उड़ जाती
कुम्हलाती फूलों की माला
मन को बांध न पाती
कुम्हलाती फूलों की माला
मन को बांध न पाती
बुलबुल बन के भेद बताती
क्या क्या
तुम्हें बांधने के लिये मेरे पास और क्या है
मेरा प्रेम है
मेरा प्रेम है रे
मेरा प्रेम है
मेरा प्रेम है रे
मेरा प्रेम है

ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ हो
गीत के राजा मेरी प्रीत के राजा
गीत के राजा मेरी प्रीत के राजा
कैसे मैं तुमको रिझाऊँगी
काली काली पुतली है नीलम के झूले सी
नैनों में तुमको झुलाऊंगी
काली काली पुतली है नीलम के झूले सी
नैनों में तुमको झुलाऊंगी
कोयल बन के गीत सुनाऊँगी
क्या क्या
तुम्हें बांधने के लिये मेरे पास और क्या है
मेरा प्रेम है
मेरा प्रेम है रे
मेरा प्रेम है
मेरा प्रेम है रे
मेरा प्रेम है

तुम्हें बांधने के लिये मेरे पास और क्या है
मेरा प्रेम है
मेरा प्रेम है रे
मेरा प्रेम है
मेरा प्रेम है रे
मेरा प्रेम है
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Tumhen baandhne ke liye-Ratnaghar 1955

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