September 1, 2016

आया न हमको प्यार जताना-पहचान १९७०

दशक की समाप्ति होती है तब वर्ष के अंत में शून्य आ जाता है.
६० के दशक की समाप्ति का वर्ष है सन ७० और ७० के दशक
का आगाज़. दशक के अंत तक कई चीज़ें शून्य में समा चुकी
होती है तो दशक की शुरुआत में कई बातें शून्य से प्रकट होना
शुरू हो जाती हैं. इन बातों में उलट पुलट भी हो जाती है.

आइये सुनें पहचान फिल्म से एक गीत जिसे जनता अच्छे से
पहचानती है. गीत मुकेश का गाया हुआ है और साथ में उनके
सुमन कल्याणपुर की आवाज़ है. इन्दीवर ने गीत लिखा है और
ये शंकर जयकिशन के लिए उनके चुनिन्दा गीतों में एक है.



गीत के बोल:

आया न हमको प्यार जताना
प्यार कभी से तुझे करते हैं
आया न हमको प्यार जताना
प्यार कभी से तुझे करते हैं
भोलापन तेरा भा गया हमको
सादगी पर तेरी मरते हैं

आया न हमको प्यार जताना
प्यार कभी से तुझे करते हैं
भोलापन तेरा भा गया हमको
सादगी पर तेरी मरते हैं

जिसने हमारे दिल को समझा
वो एक तेरा ही दिल है
जिसने हमारे दिल को समझा
वो एक तेरा ही दिल है
तेरा आँचल तेरी बाहें
अपनी यही तो मंज़िल है
अपनी यही तो मंज़िल है
हम तो तेरे हो ही चुके हैं
अपना कहते डरते हैं
भोलापन तेरा भा गया हमको
सादगी पर तेरी मरते हैं

सूरत अच्छी सीरत अच्छी
तू तो एक है लाखों में
हो ओ ओ सूरत अच्छी सीरत अच्छी
तू तो एक है लाखों में
दिल करता है दिल को लगा लूं
रख लूं छुपा कर आँखों में
ख़ुद पे भरोसा बढ़ जाता है
जब तेरे साथ गुज़रते हैं
भोलापन तेरा भा गया हमको
सादगी पर तेरी मरते हैं

एक ही जीवन में तो दिल की
प्यास बुझा नहीं पायेंगे
एक ही जीवन में तो दिल की
प्यास बुझा नहीं पायेंगे
तुझको फिर पाने के लिये हम
फिर दुनिया में आयेंगे
प्यार अमर है अमर ही रहेगा
मरने को इनसान मरते हैं
भोलापन तेरा भा गया हमको
सादगी पर तेरी मरते हैं

आया न हमको प्यार जताना
प्यार कभी से तुझे करते हैं
पोलापन तेरा भा गया हमको
सादगी पर तेरी मरते हैं
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Aaya na hamko pyar jatana-Pehchan 1970

Artists: Manoj Kumar, Babita

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