September 22, 2016

बड़ा बेदर्द जहाँ है-चिराग कहाँ रौशनी कहाँ १९५९

बड़ी अजीब मुश्किल होती है जब टोर्च कहीं सेल कहीं हो. या
फिर दिल कहीं होश कहीं हो. ऐसी पेचीदगियां जीवन में कई
प्रकार की आती हैं, जैसे-भूख कहीं रोटी कहीं.

आइये सुनें फिल्म चिराग कहाँ रौशनी कहाँ से एक और गीत.
ये भी लाता मंगेशकर का गाया हुआ है. इसे प्रेम धवन ने लिखा
है. संगीतकार हैं रविशंकर शर्मा उर्फ रवि.

लता मंगेशकर ने यह गीत गाया है और मीना कुमारी पर इसे
फिल्माया गया है जिन्होंने इस गीत में अपने संजीदा अभिनय
से जान फूँक दी है.



गीत के बोल:

बड़ा बेदर्द जहाँ है यहाँ इन्साफ़ कहाँ है
मुझे ओ दुनिया वाले वापस बुला ले
बड़ा बेदर्द जहाँ है यहाँ इन्साफ़ कहाँ है
मुझे ओ दुनिया वाले वापस बुला ले
बड़ा बेदर्द जहाँ है यहाँ इन्साफ़ कहाँ है

आग लगे संसार को अन्धा जिसका न्याय
आग लगे संसार को अन्धा जिसका न्याय
यहाँ तो माँ की मामता धन से तौली जाय
धन से तौली जाय
ये कैसा जग है विधाता प्यार माँ का ठुकराता
मुझे ओ दुनिया वाले वापस बुला ले
बड़ा बेदर्द जहाँ है यहाँ इन्साफ़ कहाँ है

माँ हो कर मैं माँ नहीं फूट गए मेरे भाग
माँ हो कर मैं माँ नहीं फूट गए मेरे भाग
ले गए ज़ालिम छीन के घर का मेरे चिराग़
घर का मेरे चिराग़
गया मेरे नैन का तारा किया मेरा घर अंधियारा
मुझे ओ दुनिया वाले वापस बुला ले
बड़ा बेदर्द जहाँ है यहाँ इन्साफ़ कहाँ है

तुम बिन मेरे लाडले सूना मेरा जहाँ
तुम बिन मेरे लाडले सूना मेरा जहाँ
किसे सुनाऊँ लोरियां कौन कहे मुझे मां
कौन कहे मुझे मां
कोई मेरा दर्द न जाने किसे जाऊँ समझाने
मुझे ओ दुनिया वाले वापस बुला ले
बड़ा बेदर्द जहाँ है यहाँ इन्साफ़ कहाँ है
....................................................................
Bada bedard jahan hai-Chirag kahan roshni kahan 1959

Artist: Meena Kumari

1 comments:

गूग्लाश,  September 24, 2016 at 8:07 PM  

बेचैन करने वाला गीत

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