September 2, 2016

दूर न जा मुझसे-सपने १९९७

कुछ गीत कॉम्प्लेक्स इमोशंस वाले होते हैं तो कुछ का संगीत
कोम्प्लेक्स किस्म का होता है. इस गीत में नायक कुछ ख्यालों
में खो जाता है और अजीबो-गिरामा जैसा एक रोमांटिक गीत
उभर के सामने आता है. आधुनिक कविता की तरह ये एक
आधुनिक गीत है. झरने वाले जंगल में इसे फिल्माया गया है.

गीत में इतना जोश है कि नायक ‘मास्क ऑफ जोरो’ फिल्म के
कथानक में घुस के सफलतापूर्वक बाहर निकल आता है.

ये थॉट जो है वो मूलतः तीन किस्म का होता है-सॉफ्ट, न्यूट्रल
और वाइल्ड. गीत में या फिल्म में इनमें से कब कौन सा मुखर
हो जाता है मालूम नहीं पड़ता.

गीत लिखा है जावेद अख्तर ने और संगीत है ए आर रहमान का.
इसे गाया है एस पी बालसुब्रमण्यम ने.



गीत के बोल:

दूर न जा मुझसे पास आ
कहता हूँ तुझसे पास आ
मेरा तन प्यासा मन प्यासा
नहीं मुझको चैन ज़रा सा
मेरे अंग अंग में अंगारे
दूर न जा मुझसे पास आ
कहता हूँ तुझसे पास आ
मेरा तन प्यासा मन प्यासा
नहीं मुझको चैन ज़रा सा
मेरे अंग अंग में अंगारे
दूर न जा मुझसे मुझसे पास आ

सुलगती साँसें तरसती बाहें हैं मेरी
जहाँ भी तू है वहीं निगाहें हैं मेरी
है चाँद जैसा ये चेहरा तेरा
बदन तेरा सूरज तो फिर ये क्यों है
कि यूँ अन्धेरी सारी राहें हैं मेरी
तेरे ये उजाले मैं बाहों में भर लूँ
तुझे छू के ख़ुद को अमर आज कर लूँ
मचल रहा है दिल मेरा

दूर न जा मुझसे पास आ
कहता हूँ तुझसे पास आ

कभी तो होगा ये हाथ मेरे हाथों में
कभी तो छलकेगा प्यार तेरी बातों में
कभी तो पिघलेंगे तेरे तन मन
मेरे क़रीब आ के
कभी तो टूटेंगे सारे बन्धन
महकी महकी रातों में
तेरी आरज़ू मे जो करता हूँ जानम
न जीता हूँ जानम न मरता हूँ जानम
तड़प रहा है दिल मेरा

दूर न जा मुझसे पास आ
कहता हूँ तुझसे पास आ
मेरा तन प्यासा मन प्यासा
नहीं मुझको चैन ज़रा सा
मेरे अंग अंग में अंगारे
दूर न जा मुझसे
कहता हूँ तुझसे
दूर न जा मुझसे
कहता हूँ तुझसे
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Door na ja-Sapnay 1997

Artists: Arvind Sawamy, Kajol

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