September 11, 2016

नीले गगन के तले-हमराज़ १९६७

गूँज वाले गीत कभी कभी सुनने में अच्छे लगते हैं. गूँज ये
इको इफेक्ट वाले गीतों में अतिरिक्त डायमेंशन का प्रभाव पैदा
हो जाता है.

प्रस्तुत गीत अपने ज़माने का लोकप्रिय गीत है. ये ऐसा गीत
है जिसकी अन-ओफिशियल पैरोडियाँ भी बनी और स्कूल कोलेजों
में लोकप्रिय रहीं. अब ऐसे चीज़ें समय का हिस्सा बन के रह
गयी हैं.

साहिर लुधियानवी के लिखे इस गीत की तर्ज़ बनाई है रवि ने.
महेंद्र कपूर ने इस गीत को गाया है राज कुमार के लिए.




गीत के बोल:

हे  नीले गगन के तले
धरती का प्यार पले
हे  नीले गगन के तले
धरती का प्यार पले
ऐसे ही जग में आती हैं सुबहें
ऐसे ही शाम ढले

शबनम के मोती फूलों पे बिखरे
दोनों की आस फले

हे  नीले गगन के तले
धरती का प्यार पले

नदिया का पानी दरिया से मिल के
सागर की ओर चले

हे  नीले गगन के तले
धरती का प्यार पले
ऐसे ही जग में आती हैं सुबहें
ऐसे ही शाम ढले
हे  नीले गगन के तले
धरती का प्यार पले
..........................................................................
He neelgagan ke tale-Hamraaz 1967

Artits: Rajkumar, Vimmi

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