September 26, 2016

खबर किसी को नहीं वो-बेक़सूर १९५०

तीन गायकों वाले गीत हमने कम सुने हैं अभी तक. वैसे इस प्रकार
के गीत बहुत हैं फिल्म संगीत के खजाने में जिनमें तीन गायक या
गायिकाओं ने या उनके कोम्बीनेशन ने गाया है.

आज सुनते हैं अनिल बिश्वास के संगीत निर्देशन में बना फिल्म बेक़सूर
का एक गीत. एहसान रिज़वी ने इसे लिखा है और जी एम् दुर्रानी, मुकेश
और रफ़ी ने इसे गाया है.

फिल्म बेक़सूर में प्रमुख कलाकार हैं अजीत और मधुबाला. यह गीत एक
कव्वाली है जिसमें अजीत के लिए पार्श्व गायन मुकेश ने किया है.





गीत के बोल:


खबर किसी को नहीं वो किधर को देखते हैं
ये कौन जाने कि दिल या जिगर को देखते हैं
नज़र बचा के हम उनकी नज़र को देखते हैं
नज़र बचा के हम उनकी नज़र को देखते हैं
जो बेखबर है उसी बेखबर को देखते हैं
दुआएं माँग रहे हैं हाय असर को देखते हैं
दुआएं माँग रहे हैं असर को देखते हैं
दुआएं माँग रहे हैं असर को देखते हैं
दुआएं माँग रहे हैं
दुआएं माँग रहे हैं असर को देखते हैं
दुआएं माँग रहे हैं
दुआएं माँग रहे हैं असर को देखते हैं

कोई बताओ के कैसी हमारी किस्मत है
धड़क रहा है दिल अपनी अजीब हालत है
वो आयें घर में हमारे खुदा की कुदरत है
कभी हम उनको वो ओ ओ ओ ओ ओ
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते हैं
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते हैं
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते हैं
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते हैं
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते हैं
कभी हम उनको कभी हे
कभी हम उनको कभी हे अपने घर को देखते हैं

अजी ये इश्क़ देखिये क्या दिन दिखाने वाला है
ज़रूर कोई नया गुल खिलाने वाल है
चमन से और कहीं ले के जाने वाला है
चमन से और कहीं हाय ले के जाने वाला है
चमन से और कहीं ले के जाने वाला है
जवाब खत का मेरे आज आने वाला है
अरे भाई ज़रूर आयेगा
कभी घड़ी को
कभी घड़ी को कभी नामबर को देखते हैं
कभी घड़ी को कभी नामबर को देखते हैं
कभी घड़ी को कभी नामबर को देखते हैं
हाँ कभी घड़ी को कभी नामबर को देखते हैं
कभी घड़ी को कभी नामबर को देखते हैं
हाय कभी घड़ी को कभी नामबर को देखते हैं
कभी घड़ी को कभी हे
कभी घड़ी को कभी नामबर को देखते हैं
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Khabar kisko nahin-Beqasoor 1950

Artists: Ajit, unknown  faces

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