September 10, 2016

खुदा हमको ऐसी खुदाई-चित्रा सिंह गज़ल

थोडा फ्लेवर बदला जाए और एक गज़ल सुनी जाए. इस
बार आपको सुनवा रहे हैं चित्रा सिंह की गयी एक गज़ल.
बशीर बद्र का कलाम है और संगीत जगजीत सिंह का.

खुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई ना दे

ईश्वर को महसूस ही किया जा सकता है जहाँ तक आम
मनुष्य का सवाल है, इस बात को पुख्ता करती ये गज़ल
और भी कई मसलों को छुपाये हुए है.

सबले अपने अपने यूनीक एक्सपीरियंस होते हैं ईश्वर वाले
विषय में अर्थात हर व्यक्ति का अनुभव दूसरे से जुदा होता
है. ईश्वर कहाँ किस रूप में किस विचार में मिल जाएँ ये
कहना कठिन है.



गज़ल के बोल:

खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
के अपने सिवा कुछ दिखाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे

खतावार समझेगी दुनिया तुझे
खतावार समझेगी दुनिया तुझे
अब इतनी ज्यादा सफाई न दे

खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे

हँसो आज इतना कि इस शोर में
हँसो आज इतना कि इस शोर में
सदा सिसिकियों की सुनाई न दे

खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे

अभी तो बदन में लहू है बहुत
अभी तो बदन में लहू है बहुत
कलम छीन ले रोशनाई ना दे

खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे

खुदा ऐसे एहसास का नाम है
खुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई ना दे

खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
के अपने सिवा कुछ दिखाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
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Khuda hamko aisi khudai na de-Chitra Singh Ghazal

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