September 30, 2016

खुशी दिल की बरबादियाँ साथ-शिकवा १९५०

हार्ड टास्क मास्टर सज्जाद हुसैन को परफेक्शन चाहिए होता
था अपने गीतों में. अनिल बिश्वास जैसे वरिष्ठ और हरफनमौला
संगीतकार ने सज्जाद की तारीफ की थी और उन्हें ओरिजनल
संगीतकार बतलाया था. ये आकलन अपने आप में बहुत बड़ी
बात है. सज्जाद की धुनों में कसावट मिलेगी आपको जो किसी
भी गायक के लिए गाने में चैलेन्ज वाली बात होती रही होगी.

आज सुनते हैं एक अधूरी फिल्म शिकवा से तलत महमूद का
गाया गीत.



गीत के बोल:

खुशी दिल की बरबादियाँ साथ लाई
खुशी दिल की बरबादियाँ साथ लाई
मुहब्बत की दुनिया बसा कर मिटाई
मुहब्बत की दुनिया बसा कर मिटाई

खुशी दिल की बरबादियाँ साथ लाई

कहाँ से कहाँ आ गए चलते चलते
कहाँ से कहाँ आ गए चलते चलते
मगर इस मुहब्बत की मंज़िल न आई
मुहब्बत की दुनिया बसा कर मिटाई

खुशी दिल की बरबादियाँ साथ लाई

अभी मुस्कुराने न पाए थे हम तुम
अभी मुस्कुराने न पाए थे हम तुम
न पाए थे हम तुम
मुक़द्दर ने एक और ठोकर लगाई
मुहब्बत की दुनिया बसा कर मिटाई

खुशी दिल की बरबादियाँ साथ लाई
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Khushi dil ki barbadiyan saath-Shikwa 1950

Artists: Dilip Kumar, Nutan

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