September 13, 2016

सुलग उठी दिल की लगी-किनारे किनारे १९६३

फिल्म किनारे किनारे का निर्माण शुरू हुआ ५० के दशक
में और बनते बनते फिल्म सरक गयी ६० के दशक में
और अंततः रिलीज़ हुई १९६३ में. फिल्म के गीतों में जो
कोमलता है वो ५० के दशक वाली है.

जयदेव का संगीत वैसे भी कानों को गुदगुदाने वाला ही है.
अनावश्यक शोरगुल उनके संगीत में आपको बहुत कम
या नहीं के बराबर मिलेगा. हाँ, राग रागिनियों की बात
करें या शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त होने वाले वाद्य यंत्र तो
ये सब उनके संगीत में दिल खोल कर प्रयोग होता था.

प्रस्तुत गीत को कुछ ही खुशकिस्मतों ने फिल्म में देखा
होगा जिन्होंने इसे सिनेमा हॉल में देखा है या दूरदर्शन पर.
अब ये चक्रियों में देखने को उपलब्ध नहीं है. धन्य हो
सी डी और डी वी डी टेक्नोलोजी.


   

गीत के बोल:

सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने
सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने
रोती हैं तकदीरें हँसते हैं अफ़साने
सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने

इक आंधी ऐसी भी इस दिल पर छाई है
इक आंधी ऐसी भी इस दिल पर छाई है
अपनों का जिक्र ही क्या जरचे हैं बेगाने

सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने

शाम भी है ज़ज्बे भी दिल भी है मस्ती भी
शाम भी है ज़ज्बे भी दिल भी है मस्ती भी
आ भी जा तेरी राह तकते हैं वीराने

सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने
रोती हैं तकदीरें हँसते हैं अफ़साने
सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने
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Sulag uthi dil ki lagi-Kinare kinare 1963

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