September 12, 2016

सुरमई शाम इस तरह आये-लेकिन १९९१

फिल्म लेकिन से एक गीत सुनते हैं सुरेश वाडकर का गया हुआ.
सुरेश वाडकर ने काफी सारे फ़िल्मी गीत गाये हैं मगर समय के
साथ उनके गीत कहीं खो से गए प्रतीत होते हैं. गायन की सभी
बारीकियों में दक्ष सुरेश वाडकर का काफी सम्मान है गायकों के
बीच. जिन गायकों का बेस शास्त्रीय संगीत होता है उनको गाने
गाने में बेहद आसानी होती है.

लता मंगेशकर के स्वयं के शब्दों में हृदयनाथ समय से आगे के
संगीतकार हैं. हृदयनाथ ने भी काफी मात्रा में मधुर संगीत रचा है.
फिल्मों और गैर फ़िल्मी गीतों के क्षेत्र में वे सामान रूप से सक्रिय
रहे और आज उनकी बदौलत हमें कई नायब रत्न उपलब्ध है
संगीत का आनंद उठाने के लिए.

प्रस्तुत गीत गुलज़ार रचित है जिन्होंने पहले सदमा के लिए गीत
लिखा था-सुरमई अंखियों में. सुरेश वाडकर के सबसे मधुर गीतों
में से एक है फिल्म लेकिन का यह गीत.



गीत के बोल:

सुरमई शाम इस तरह आये
सुरमई शाम इस तरह आये
साँस लेते हैं जिस तरह साये
सुरमई शाम इस तरह आये
साँस लेते हैं जिस तरह साये
सुरमाई शाम

कोई आहट नहीं बदन की कहीं
फिर भी लगता हैं तू यहीं है कहीं
कोई आहट नहीं बदन की कहीं
फिर भी लगता हैं तू यहीं है कहीं
वक़्त जाता सुनाई देता है
तेरा साया दिखाई देता है
जैसे खुशबू नज़र से छू जाये
जैसे खुशबू नज़र से छू जाये
साँस लेते हैं जिस तरह साये
सुरमाई शाम

दिन का जो भी पहर गुज़रता है
कोई अहसान सा उतरता है
दिन का जो भी पहर गुज़रता है
कोई अहसान सा उतरता है
वक़्त के पाँव देखता हूँ मैं
रोज़ ये छाँव देखता हूँ मैं
आये जैसे कोई खयाल आये
आये जैसे कोई खयाल आये
साँस लेते हैं जिस तरह साये

सुरमई शाम इस तरह आये
साँस लेते हैं जिस तरह साये
सुरमाई शाम
………………………………………………………………….
Surmayi shaam-Lekin 1991

Artist: Vinod Khanna, Dimple Kapadiya

0 comments:

© Geetsangeet 2009-2016. Powered by Blogger

Back to TOP