September 12, 2016

तेरे खयालों में हम-गीत गाया पत्थरों ने १९६४

किसी कलाकृति में प्राण फूंकना हर कलाकार के बस में नहीं होता.
प्रतिभा के साथ एकाग्रता, दृढ़ता और दैवीय प्रेरणा होना बहुत ज़रूरी
है. ये सब कैसे और कहाँ से आता है इसका अनुमान लगाना कठिन
है. कला के प्रति भावों को तराशा जा सकता है, इन्हें नए सिरे से
पैदा करना एक दुष्कर कार्य है.

कहते हैं पत्थरों में भी जान होती है. शिल्प कला के कुछ नमूने तो
बोलते से प्रतीत होते हैं, यही है एक कलाकार की कल्पनाशीलता की
चरम अवस्था. प्राचीन इमारतों और मंदिरों में कई ऐसे शिल्प मौजूद
हैं जिन्हें देख के हम लोग आश्चर्य करते हैं.

गीत गाया पत्थरों ने फिल्म का कथानक एक कलाकार के ऊपर ही
केंद्रित है.




गीत के बोल:

तेरे खयालों में हम तेरी ही बाहों में हम
तेरे खयालों में हम तेरी ही बाहों में हम
अपने हैं दोनो जहाँ ओ जान-ए-बेखुदी यहाँ
तेरे खयालों में हम
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

यूँ रोशनी भोर की पलकों में तेरे छुपी
जब आँख खोलेगा तू पुतली में होंगे हमीं
हम हैं कला की जगह आँखों में तेरे रवां
तेरे खयालों में हम
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

मदभर चंचल ये शाम देती है तुझको पयाम
पत्थर से कर शायरी तुझको हमारा सलाम
तू है जहाँ हम वहाँ झूमे ज़मीन आस्मां

तेरे खयालों में हम
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Tere khayalon mein ham-Geet gaaya pattharon ne 1964

Artists: Rajshri, Jeetendra

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