October 30, 2016

एक तेरा सहारा-शमा १९४६

विंटेज युग से एक गीत सुनते हैं. ये है सन १९४६ की फिल्म
शाम से शमशाद बेगम का गाया हुआ. एहसान रिज़वी का लिखा
हुआ गीत है जिसकी तर्ज़ गुलाम हैदर ने बनाई है.

फिल्म शमा के सुरैया के गाये गीत ज्यादा प्रसिद्ध हैं मगर फिल्म
रिलीज़ के आसपास शमशाद के गीत भी जनता खूब सुना करती
थी. उपलब्धता के लिहाज़ से ये गीत दुर्लभ की श्रेणी में आता है.

गीत फिल्म में दो भाग में उपलब्ध है. वीडियो में केवल भाग १
मौजूद है.




गीत के बोल:

इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा
दिल तोड़ के दुनिया ने किया हमसे किनारा
इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा

शिक़वा है किसी का न शिकायत है किसी से
शिक़वा है किसी का न शिकायत है किसी से
फ़रियाद है इक टूटे हुए दिल की तुझी से
फ़रियाद है इक टूटे हुए दिल की तुझी से
होता नहीं बरबाद कोई अपनी खुशी से
बिगड़ी हुई तक़दीर पे क्या ज़ोर हमारा
इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा

दुनिया
दुनिया में नहीं कोई जिसे हाल सुनायें
दुनिया में नहीं कोई जिसे हाल सुनायें
आँसू किसे हम रोते हुए दिल के दिखायें
आँसू किसे हम रोते हुए दिल के दिखायें
बरबाद हैं बेक़स हैं बता अब कहाँ जायें
बेदर्द ज़माने में नहीं कोई हमारा
इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा

क्यों ख़ून गरीबों का बहाती है ख़ुदाई
क्यों ख़ून गरीबों का बहाती है ख़ुदाई
अल्लाह दुहाई है दुहाई है दुहाई
अल्लाह दुहाई है दुहाई है दुहाई
कब तक ये सितम और ये दर दर की गधाई
मिलता नहीं दो दिन के लिये भी तो सहरा

इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा


किस्मत ही अब तो हाय हमारी बिगड़ गई
किस्मत ही अब तो हाय हमारी बिगड़ गई
दिल की बसी बसाई ये दुनिया उजड़ गई
दिल की बसी बसाई ये दुनिया उजड़ गई
दौलत जो थी हमारी वो हम से बिछड़ गई
काली घटा में छुप गया तक़दीर का तारा
इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा


है तेरे सिवा कौन जो इस दिल को मनाये
है तेरे सिवा कौन जो इस दिल को मनाये
जो दाग़ जिगर के हैं उन्हें फूल बनाये
जो दाग़ जिगर के हैं उन्हें फूल बनाये
है कौन कि कांटों से जो दामन को छुड़ाये
उलझा है तेरे होते हुए जो आज दुबारा

इक तेरे सहारा इक तेर सहारा
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Ek tera sahara-Shama 1946

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