November 11, 2016

ए फँसा-बॉबी १९७३

फिल्म बॉबी का प्रस्तुत गीत आनंद बक्षी की कविता सरीखा है
जो शायद उन्होंने प्रेम करने वालों की व्यथा पर लिखी हो. इस
गीत की पंक्तियाँ किसी आधुनिक कविता की तरह हैं. सुनने में
धुन थोड़ी अटपटी सी लगती है मगर अपने अनोखेपन की वजह
से ही ये गीत लोकप्रिय हुआ.

‘ऐ फंसा’ जैसे शब्दों से शुरू होने वाला कोई गीत जनता ने इसके
पहले तक नहीं सुना था. नायक को टीज़ किया जा रहा है इस गीत
के जरिये और आगाह किया जा रहा है उसके क्रियाकलापों के
अंजाम के लिए. 




गीत के बोल:

ए फंसा
अरे अरे अरे
उसका छूटा घर-बार संसार
जो कर के प्यार यार
किसी के दिल में बसा  बसा  बसा
ए फंसा
उसका छूटा घर-बार संसार
जो कर के प्यार यार
किसी के दिल में बसा  बसा  बसा
ए ए ए ए ए फंसा

ला ला ला ला ला ला
ला रा ला रा ला रा ला रा
ये एक साल
बचपन और जवानी के बीच का बड़ा बुरा होता है
ये एक साल
नौजवानों का  नादानों का  दीवानों का
ये एक साल
बचपन और जवानी के बीच का बड़ा बुरा होता है
आशिक़ का हो गया नाम बदनाम
हुआ अंजाम सुबह-ओ-शाम
ज़माना हँसा  हँसा  हँसा
ए फंसा

उसका छूटा घर-बार संसार
जो कर के प्यार यार
किसी के दिल में बसा  बसा  बसा
ए ए ए ए ए फंसा

बचा के आँख
पंछी पिंजरा ले के उड़ जाए तो शायद जान बच जाए
बचा के आँख
किसी झरोखे से  किसी मौके से  कभी धोखे से
बचा के आँख
पंछी पिंजरा ले के उड़ जाए तो शायद जान बच जाए
जीना हुआ दुश्वार दिलदार के लगा आर पार
तीर किसी ने कसा  कसा  कसा
ए ए ए ए ए फंसा

उसका छूटा घर-बार संसार
जो कर के प्यार यार
किसी के दिल में बसा  बसा  बसा
ए फंसा
...............................................................
Ae phansa-Bobby 1973

Artists: Rishi Kapoor, Aruna Irnai, Farida Jalal

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