November 7, 2016

हर घडी ढल रही-सारांश १९८४

अनुपम खेर की पदार्पण फिल्म है सारांश. पदार्पण फिल्म में
ही उन्होंने एक बूढ़े आदमी का किरदार निभाया जो साहस से
भरा प्रयास था. अनुपम खेर के फ़िल्मी दुनिया में आगमन का
जनता ने स्वागत किया और इससे आगे की कहानी हम सब
के सामने है. उन्होंने एक सफल अभिनय कैरियर व्यतीत किया
बॉलीवुड में.

महेश भट्ट निर्देशित इस फिल्म में स्टेज की ख्यात कलाकार
रोहिणी हटंगडी और अनुपम खेर प्रमुख भूमिकाओं में हैं.

आज सी फिल्म से एक गीत सुनते हैं वसंत देव का लिखा और
अजित वर्मन द्वारा संगीतबद्ध. अमित कुमार ने इस गीत को
गाया है. इस जोड़ी से पुराने समय की गीतकार-संगीतकार जोड़ी
भरत व्यास और एस एन त्रिपाठी याद आ जाते हैं. 




गीत के बोल:

हर घडी ढल रही शाम है जिंदगी
दर्द का दूसरा नाम है ज़िंदगी
हर घडी ढल रही शाम है जिंदगी
दर्द का दूसरा नाम है ज़िंदगी

आसमान है वही
और वही है ज़मीन
है मुकाम गैर का
गैर है या हमीं
अजनबी आँख सी आज है जिंदगी
दर्द का दूसरा नाम है ज़िंदगी

क्यूँ खडे राह में
राह भी सो गई
अपनी तो छांव भी
अपने से खो गई
भटके हुए पंछी की रात है ज़िंदगी
दर्द का दूसरा नाम है ज़िंदगी
.............................................................
Har ghadi dhal rahi-Saaransh 1984

Artists: Anupam Kher, Rohini Hattangadi

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