November 3, 2016

जालिम ज़ुल्म न कर-बम्बई की बिल्ली १९६०

हिंदी फिल्मों में पशु प्रधान फ़िल्में भी बनी हैं जिनमें पशुओं
ने भी अभिनय किया है. दक्षिण के निर्माता चिनप्पा देवर
पशुओं पर बनी फिल्मों के लिए विख्यात हैं. श्वेत श्याम के
युग में एक फिल्म बनी “बिल्ली” नाम से. उसके बाद आई
“बम्बई की बिल्ली”. बिल्लियाँ बाकी के बड़े शहरों में भी पाई
जाती हैं और पायी जाती रहेंगी-जैसे दिल्ली, बैंगलोर, मद्रास
और कलकत्ता. इन शहरों के नाम अब बदल चुके है सिवाए
दिल्ली को छोड़ के. दिल्ली दिलवालों की मानी जाती है शायद
इसलिए इसका नाम नहीं बदला.

चार टांग वाली बिल्ली काफी फुर्तीला किस्म का जीव होता
है अपने दो टांगों वाले संस्करण की तुलना में. बिल्लियों पे
ज्यादा चर्चा फिर कभी. हमें अपने ब्लॉग को डिस्कवरी चैनल
नहीं बनाना है.

आज आपको फिल्म बम्बई की बिल्ली से एक गीत सुनवाते
हैं.




गीत के बोल:

जालिम जालिम जालिम
जालिम ज़ुल्म ना कर
अभी संभल जा  नेकी में ढल जा
जिंदगी है कम
जालिम ज़ुल्म ना कर
अभी संभल जा नेकी में ढल जा
जिंदगी है कम

प्यार की शमा जरा दिल में जला ले
आयेगा जीने का मजा
प्यार की शमा जरा दिल में जला ले
आयेगा जीने का मजा
गैरों को भी तू अपना बना ले
पायेगा जीने का मजा
जालिम ज़ुल्म ना कर
अभी संभल जा नेकी में ढल जा
जिंदगी है कम

आज तेरा है कल मेरा ज़माना
धूप छांव यहाँ
आज तेरा है कल मेरा ज़माना
धूप छांव यहाँ
कौन रहा है सदा कौन रहेगा
ये तो समझ नादान
जालिम ज़ुल्म ना कर
अभी संभल जा नेकी में ढल जा
जिंदगी है कम

ये जहां एक झूमता गुलशन
फूल खिला ले चाहे तू
ये जहां एक झूमता गुलशन
फूल खिला ले चाहे तू
अच्छा बुरा सब हाथ है तेरे
खून बहा ले चाहे तू
जालिम ज़ुल्म ना कर
अभी संभल जा नेकी में ढल जा
जिंदगी है कम
जालिम
…………………………………………………………
Jalim zulm na kar-Bambai ki billi 1960

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