November 11, 2016

जश्‍न-ए-बहारा-जोधा अकबर २००८

सन २००८ की फिल्म जोधा-अकबर से एक गीत सुनते हैं
जिसे जावेद अली ने गाया है. जावेद अख्तर के लिखे बोल
हैं और रहमान का संगीत.

फिल्म २००८ की एक चर्चित फिल्म है. गीत के बीच में थोड़े 
संवाद भी हैं.





गीत के बोल:

कहने को जश्‍न-ए-बहारा है
इश्क ये देख के हैराँ है
कहने को जश्‍न-ए-बहारा है
इश्क ये देख के हैराँ है
फूल से खुशबू ख़फ़ा-खफा है गुलशन में
छुपा है कोई रंज फिज़ा की चिलमन में
सारे सहमे नज़ारे हैं
सोये-सोये वक्त के धारे हैं
और दिल में खोई-खोई सी बातें हैं

कैसे कहें क्या है सितम
सोचते हैं अब ये हम
कोई कैसे कहे वो हैं या नहीं हमारे
करते तो हैं साथ सफर
फासले हैं फिर भी मगर
जैसे मिलते नहीं किसी दरिया के दो किनारे
पास हैं फिर भी पास नहीं
हमको ये गम रास नहीं
शीशे की इक दीवार है जैसे दरमियाँ

हमने जो था नगमा सुना
दिल ने था उसको चुना
ये दास्तान हमें वक्त ने कैसी सुनाई
हम जो अगर हैं गमगीं
वो भी उधर खुश तो नहीं
मुलाकातों में है जैसे घुल सी गई तन्हाई
मिल के भी हम मिलते नहीं
खिल के भी गुल खिलते नहीं
आँखों में हैं बहारें दिल में खिज़ा
.....................................................................
Jashne-Bahara-Jodha Akbar 2008

Artists: Hritik Roshan, Aishwarya Rai

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