November 10, 2016

करवटें बदलते रहे-आप की कसम १९७४

करवटें बदलने की कई वजहें होती हैं. नींद नहीं आने पर
ऐसा ज्यादा होता है. नींद नहीं आने की भी कई वजहें हैं.
मच्छर काट रहे हैं, खटमल काट रहे हैं, गर्मी लग रही है
या सर्दी लग रही है. हो सकता है छत से पानी टपक रहा
हो बरसात में.

फ़िल्मी वजहों में एक मुख्य है-किसी की याद आना. घूम
फिर के कहीं न कहीं से कहानी प्यार मोहब्बत पर ही आ
पहुँचती है. अब याद आने पर, नीं नहीं आने पर सुहानी
चांदनी भी बैरन निगोडी लगने लगे तो मामला गंभीर
समझो. ये युगल गाना है फिल्म आप की कसम फिल्म से
बक्षी साहब ने लिखा है और बर्मन साहब ने कम्पोज किया
है.

एक लोकप्रिय गीत है अपने ज़माने का और आज के चैनल
भी अभी तक मेहरबान हैं जो सुनवाते जा रहे हैं इसे. अनूठा
गीत है ये और इसमें मुखडा केवल शुरू में ही गाया जा रहा
है. फिल्म का शीर्षक गीत है जिसमें फ़िल्म का नाम कई
बार दोहराया गया है. 




गीत के बोल:

करवटें बदलते रहे सारी रात हम
करवटें बदलते रहे सारी रात हम
आप की क़सम आप की क़सम
करवटें बदलते रहे सारी रात हम
आप की क़सम आप की क़सम
ग़म न करो दिन जुदाई के बहुत हैं कम
आप की क़सम आप की क़सम

याद तुम आते रहे इक हूक़ सी उठती रही
नींद मुझसे नींद से मैं भागती छुपती रही
रात भर बैरन निगोड़ी चाँदनी चुभती रही
आग सी जलती रही गिरती रही शबनम
आप की क़सम आप की क़सम

झील सी आँखों में आशिक़ डूब के खो जायेगा
ज़ुल्फ़ के साये में दिल अरमां भरा सो जायेगा
तुम चले जाओ नहीं तो कुछ न कुछ हो जायेगा
डगमगा जायेंगे ऐसे हाल में क़दम
आप की क़सम आप की क़सम

रूठ जायें हम तो तुम हमको मना लेना सनम
दूर हों तो पास हमको तुम बुला लेना सनम
कुछ गिला हो तो गले हमको लगा लेना सनम
टूट न जाये कभी ये प्यार की क़सम
आप की क़सम आप की क़सम
आप की क़सम आप की क़सम
……………………………………………………….
Karwaten badalte rahe-Aap ki kasam 1974

Artists: Rajesh Khanna, Mumtaz

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