November 20, 2016

नील गगन पर उड़ते बादल-खानदान १९६५

आप सन १९४२ और सन १९८१ के खानदानों से मिल ही चुके हैं
अब आपको मिलवाते हैं सन १९६५ के खानदान से.

सुनील दत्त और नूतन अभिनीत फिल्म खानदान के गीत लोकप्रिय
हुए थे. रफ़ी और आशा का गाया युगल गीत लिखा है राजेंद्र कृष्ण
ने और इसकी धुन बनाई है रवि ने.

कुछ श्रेणियाँ जो हमें सूझती हैं इस गीत के लिए वो इस प्रकार से
हैं- नीलगगन हिट्स, आ आ आ हिट्स, उड़ते बादल हिट्स. गीत के
मुखड़ों में आ आ आ का प्रयोग काफी कम हुआ है. हम पुराने गीतों
की ही बात कर रहेहैं. आज के गीतों में अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ
सभी का इस्तेमाल हो जाता है सिवायें अं अ: को छोड़ के.

भारत एक कृषि प्रधान देश है और ये गीत कृषि और खेती को समर्पित
है. कथानक का किसान एक अमीर किसान है और उसके पास घोडा
भी है. वो नायिका को घोड़े पर क्यूँ नहीं बिठा रहा है जानने के लिए
देखने फिल्म खानदान.



गीत के बोल:

नील गगन पर उड़ते बादल आ आ आ
धूप में जलता खेत हमारा कर दे तू छाया
छुपे हुए ओ चंचल पंछी जा जा जा
देख अभी है कच्चा दाना पक जाए तो खा
नील गगन पर उड़ते बादल आ आ आ
धूप में जलता खेत हमारा कर दे तू छाया
छुपे हुए ओ चंचल पंछी जा जा जा
देख अभी है कच्चा दाना पक जाए तो खा


बहता-बहता क्यारियों में ठंडा-ठंडा पानी
बहता-बहता क्यारियों में ठंडा-ठंडा पानी
चूम न ले कहीं पाँव तेरे ओ खेतों की रानी
चूम के मेरे पाँव मैले वो होगा मैला
मैं हूँ खेतों की दासी तू खेतों का राजा

नील गगन पर उड़ते बादल आ आ आ
धूप में जलता खेत हमारा कर दे तू छाया
छुपे हुए ओ चंचल पंछी जा जा जा
देख अभी है कच्चा दाना पक जाए तो खा

हरी-भरी इन खेतियों की राम करे रखवाली
हरी-भरी इन खेतियों की राम करे रखवाली
वो चाहे तो सौ-सौ दाने देगी एक-एक डाली
मेहनत-वालों की सुनता है वो ऊपर वाला
खोल के रखियो अपनी झोली भर देगा दाता

नील गगन पर उड़ते बादल आ आ आ
धूप में जलता खेत हमारा कर दे तू छाया
छुपे हुए ओ चंचल पंछी जा जा जा
देख अभी है कच्चा दाना पक जाए तो खा
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Neeelgagan pe udte badal-Khandan 1965

Artists: Sunil Dutt, Nutan

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