November 22, 2016

वो हम से चुप हैं-सरगम १९५०

वैसे तो गीत याद आने के बहुत से बहाने होते हैं जैसे शलजम शब्द
सुनते ही फिल्म सरगम याद आ जाती है मगर इस बार वजह कुछ
और है गीत याद आने की.

पिछला गीत जो आपने सुना फिल्म कल की आवाज़ से उसे सुन कर
फिल्म सरगम का एक युगल गीत याद आया,  पेश है. पी एल संतोषी
के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है सी रामचंद्र ने जिन्होंने इसे गाया भी
है लता मंगेशकर के साथ.

धुन एक ट्रेंक्वेलाइज़र का काम कर रही है, गीत गाने के बाद नायक
और नायिका दोनों सो जाते हैं.





गीत के बोल:

वो हम से चुप हैं  हम उनसे चुप हैं 
मनाने वाले  मना रहें हैं
वो हम से चुप हैं  हम उनसे चुप हैं
मनाने वाले  मना रहें हैं 

निगाहें उठ उठ के झुक रही हैं
निगाहें उठ उठ के झुक रही हैं
मज़े मुहब्बत के आ रहें हैं
वो हम से चुप हैं  हम उनसे चुप हैं 
मनाने वाले  मना रहें हैं

ये झूठी आहें  ये झूठे आँसू
ये झूठी आहें  ये झूठे आँसू
झलक रहें हैं  जो हर पलक में
बता रहें हैं
बता रहें हैं  के टूटे दिल दो
हज़ारों सदमे उठा रहें हैं
मज़े मुहब्बत के आ रहें हैं

वो हम से चुप हैं  हम उनसे चुप हैं 
मनाने वाले  मना रहें हैं

घड़ी में बिगड़े  घड़ी में झगड़े
घड़ी में बिगड़े  घड़ी में झगड़े
हैं बैठे फिर भी ऐसी अदा से 
ऐसी अदा से
दबा के अपने होंठों को दोनो 
हंसी को अपनी छिपा रहें  हैं
मज़े मुहब्बत के आ रहें हैं

वो हम से चुप हैं  हम उनसे चुप हैं 
मनाने वाले  मना रहें हैं
..........................................................................
Wo hamse chup hain-Sargam 1950

Artists: Raj Kapoor  Rehana

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