November 26, 2016

ये तो ज़िन्दगी है-कैद १९७५

किशोर कुमार के आवाज़ युवा पीढ़ी को क्यूँ पसंद आती है उसका
जवाब आपको इस गीत में भी मिल सकता है. काफी उर्जा वाला ये
गीत है फिल्म क़ैद में. फिल्म के गीत अपने ज़माने में काफी ज्यादा
बजा करते थे और उस समय की युवा पीढ़ी को खूब भाते थे.

नायक नायिका एक ट्रक पर सवार हैं जिसका पीछा एक मुशटंडा सा
खलनायक कर रहा है अपनी गाडी से. थोड़ी देर में ट्रक चालक उसको
चकमा देने में कामयाब हो जाता है और नायक नायिका के साथ जो
जनता ट्रक में सवार है वो उतर कर गीत गाने का कार्यक्रम करती
है. नायिका का नाम प्रीत है और गीत में उसका नाम लिया जा रहा
है. गीत का दूसरा अन्तरा सन्देश देता है उसे ध्यान से सुनें.

गीत माया गोविन्द का है और संगीत नितिन मंगेश का. गीत में जो
अतिरिक्त आवाजें कोरस के अलावा निकली गई हैं वो स्वयं संगीतकार
की हैं.




गीत के बोल:

ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म
ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म
मेरी जाँ रोना नहीं दामन भिगोना नहीं
ज़ू ज़ू
होगी सहर
ज़ू ज़ू ज़ू ओ मेरे सनम
ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म हे
ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म

बिछुआ बिछुआ बिछुआ
बिछुआ बिछुआ बिछुआ

आँखों में जो आँसू भरे हैं
होंठों से अपने मैं इन्हें छीन लूँगा
राहों में जो काँटे बिछे हैं
पलकों से अपनी मैं इन्हें बीन लूँगा
मेरी प्रीत ये जान ले इतना सच मान ले
ज़ू ज़ू
हारेंगे ग़म
ज़ू ज़ू ज़ू जीतेंगे हम

ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म हे
ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म

मोती अभी लुटाए हैं तुमने
ज़रा मुस्कुरा के कलियाँ लुटा दो
जिसको कभी ग़म ना मिला हो
उस आदमी का तुम पता तो बता दो
मेरे यार कुछ तो कहो
ज़ालिम अब तो हँसो
ज़ू ज़ू
मर जाऊँगा
ज़ू ज़ू ज़ू तुम्हारी क़सम

ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म हे
ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म
मेरी जाँ रोना नहीं दामन भिगोना नहीं
ज़ू ज़ू
होगी सहर
ज़ू ज़ू ज़ू ओ मेरे सनम
......................................................................
Ye to zindagi hai-Qaid 1975

Artists: Vinod Khanna, Leena Chandavarkar

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