November 5, 2016

जुल्फों को हटा ले चेहरे से-सावन की घटा १९६६

फिल्म सावन की घटा के इस गीत में गायन के जोड़-बाकी-
जमा-घटा सब मौजूद हैं. नैयर और रफ़ी के कोम्बिनेशन के
गीतों की प्रशंसा करते समय इन दोनों के भक्त रोमांटिक या
सोफ्ट किस्म के गीत चुनते हैं या तेज गति वाले वे गीत
जिनके बोल उन्हें थोड़े सोबर सुनाई देते हैं. प्रस्तुत गीत लिखा
है एस एच बिहारी ने.

आप वीडियो देखें या ना देखें इस गीत के प्रभाव में कोई फर्क
नहीं आता है. वैसे इसे बड़े परदे पर देखने का सौभाग्य अगर
आपको कभी मिला है तो आपको मालूम होगा इसे देखने एक
आनंददायी अनुभव है. इस गीत का फिल्मांकन बेहतर है और
गीत में जितना नायक प्रसन्न है उतनी ही नायिका खिन्न.
ये भाव गीत के अंत तक स्थायी जैसा है. दर्शक बेचारा यही
सोचता रह जाता है आखिर को नायिका इतने गुस्से में क्यों
है?

गीत के स्पेक्ट्रम हारमोनियम के बड़े स्केल को कवर करता
है. गायक की पूरी कसरत करा देता है ये गीत. क्या है फिर,
शर्मिंदा और ‘मुंह काला’ जैसे शब्दों की वजह से इसको आप
खुले आम नहीं सुन सकते. खुले आम बजता तो है ही ये.
उस समय के हिसाब से ये गीत थोडा बोल्ड हो सकता है
और बदलते समय की मांग जैसा है. ये बेहद लोकप्रिय गीत
है और इस तथ्य को आप नकार नहीं सकते.

एक अच्छे गीत के साथ एक अच्छी धुन भी है और इस धुन
में आपको नैयर के संगीत का निचोड़ मिल जायेगा. गीत के
अंत में एक बांसुरी के टुकड़े से इसका कोमल ‘द एंड’ किया
गया है जो एक कातिलाना अंदाज़ है नैयर का.  कुल मिला
कर इस गीत में तरह तरह के कंट्रास्ट हैं. और जो ‘होने दे’
गाया जाता है जोर और घुमाव दे कर उसे परफेक्ट गाने के
लिए आज तक सैकड़ों रफ़ी क्लोन तरस रहे हैं.



गीत के बोल:

जुल्फों को हटा ले चेहरे से
ओ ओ आ हा हा हा हा होने दे
जुल्फों को हटा ले चेहरे से
थोडा सा उजाला होने दे
सूरज को ज़रा शर्मिंदा कर
मुंह रात का काला होने दे
जुल्फों को हटा ले चेहरे से

हो जो मौसम को पता
ये तेरी ज़ुल्फ़ है क्या
चूम ले मांग तेरी
झुक के सावन की घटा
हो जो मौसम को पता
ये तेरी ज़ुल्फ़ है क्या
चूम ले मांग तेरी
झुक के सावन की घटा
ज़ुल्फ़ लहराए लहरा के बादल बने
जो भी देखे तुझे तेरा पागल बने
ऐसा भी नज़ारा होने दे

जुल्फों को हटा ले चेहरे से
थोडा सा उजाला होने दे
सूरज को ज़रा शर्मिंदा कर
मुंह रात का काला होने दे
जुल्फों को हटा ले चेहरे से

देख नाराज़ ना हो
मेरे मासूम सनम
मैं कोई गैर नहीं
तेरी आँखों की कसम
देख नाराज़ ना हो
मेरे मासूम सनम
मैं कोई गैर नहीं
तेरी आँखों की कसम
दे इज़ाज़त के तेरे कदम चूम लूं
साथ मैं भी तेरे दो घडी झूम लूं
हल्का सा इशारा होने दे

जुल्फों को हटा ले चेहरे से
थोडा सा उजाला होने दे
सूरज को ज़रा शर्मिंदा कर
मुंह रात का काला होने दे
हाय जुल्फों को हटा ले चेहरे से
.....................................................................................
Zulfon ko hata le chere se-Sawan ki ghata 1966

Artists: Sharmila Tagore, Manoj Kumar

1 comments:

तक धिन तक,  November 14, 2016 at 11:14 PM  

कमाल का गीत है

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