आई ज़ंजीर की झंकार-रज़िया सुल्तान १९८३
आवाजें नहीं सुनी मगर फिल्म रज़िया सुल्तान में दो ऐसे गीत
हैं जिन्हें खरखरी और भारी आवाज़ वाले कब्बन मिर्ज़ा ने गाया
है.
गौरतलब है इस फिल्म में धर्मेन्द्र का मेकअप भी भारी है. उन्हें
एक गुलाम की भूमिका दी गयी थी फिल्म में. गीत लिखा है
जां निसार अख्तर ने और इसकी धुन बनाई है खय्याम ने.
कब्बन मिर्ज़ा ने ६० के दशक में इक्का दुक्का गीत गाये थे
फिल्मों के लिए जो सुनना दुर्लभ अनुभव है. आकाशवाणी के
अनाउंसर रहे कब्बन मिर्ज़ा का योगदान संगीत के क्षेत्र में
ना के बराबर है. उन्हें रज़िया सुल्तान के गीतों से ही ज्यादा
प्रसिद्धि मिली.
गीत के बोल:
ख़ुदा ख़ैर करे
आई ज़ंजीर की झंकार ख़ुदा ख़ैर करे
दिल हुआ किसका ग़िरफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे
आई ज़ंजीर की झंकार
जाने ये कौन मेरी रूह को छूकर ग़ुज़रा
जाने ये कौन
जाने ये कौन मेरी रूह को छूकर ग़ुज़रा
एक क़यामत हुई बेदार
एक क़यामत हुई बेदार
ख़ुदा ख़ैर करे
लम्हा मेरी आँखों में खिंची जाती है
लम्हा मेरी आँखों में खिंची जाती है
एक चमकती हुई तलवार ख़ुदा ख़ैर करे
एक चमकती हुई तलवार
एक चमकती हुई तलवार
ख़ून दिल का न छलक जाए कहीं आँखों से
ख़ून दिल का न छलक जाए मेरी आँखों से
हो न जाए कहीं इज़हार
हो न जाए कहीं इज़हार
हो न जाए कहीं इज़हार ख़ुदा खैर करे
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Aayi zanjeer ki jhankar-Razia Sultan 1983
Artists: Hema Malini, Dharmendra