कई दिन से मुझे-अंखियों के झरोखों से १९७८
ये सरलता और सहजता अब देखने को नहीं मिलती
फिल्मों में.
सादगी में जो आनंद है वो किसी रंग बिरंगी और
तड़क भड़क वाली चीज़ में नहीं मिलती. चमक दमक
कुछ देर आँखें चौंधियाने के बाद समाप्त हो जाती है
दीवाली के अनार चकरी की तरह.
सादी और सिंपल चीज़ों की आदत डाल लें जीवन में
तो आवश्यकताएं सीमित हो जाएँगी और संतोष भी
होगा.
गीत के बोल:
कई दिन से मुझे कोई सपनो में
आवाज़ देता था हर पल बुलाता था
अच्छा तो वो तुम हो तुम हो तुम हो
अक्सर मेरा मन कहता था
छुप कर कोई आता है हलचल मचाता है
अच्छा तो वो तुम हो तुम हो तुम हो
आती जाती लहरों की तरह
साहिल पे आ के लौट मत जाना
तुम भी कभी गैरों की तरह
जी देखो देखो ऑंखें ना चुराना
इस पल से आखरी पल तक
संग संग अब रहना है
कई दिन से मुझे कोई सपनो में
आवाज़ देता था हर पल बुलाता था
अच्छा तो वो तुम हो तुम हो तुम हो
धीरे धीरे बहती ये हवा
गाती है उन्हीं दिलों के तराने
एक दूसरे में खो के जो रहे दुनिया से अनजाने
मेरी तुम्हारी चाहत तो ऐसे ही ये दोहरायेगी
अक्सर मेरा हो ओ ओ ओ
दिल कहता था हो ओ ओ ओ
छुप कर कोई आता है हलचल मचाता है
अच्छा तो वो तुम हो तुम हो तुम हो
कई दिन से मुझे हो ओ
कोई सपनो में हो ओ
आवाज़ देता था हा हा
हर पल बुलाता था
अच्छा तो वो तुम हो तुम हो तुम हो
तुम हो तुम हो तुम हो
तुम हो तुम हो तुम हो
तुम हो तुम हो तुम हो
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Kai din se mujhe-Ankhiyon ke jharokhon se 1978
Artists: Sachin, Ranjeeta

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