November 18, 2018

धीरे धीरे चल चाँद गगन में-लव मैरिज १९५९

दृष्टिकोण दृष्टि से विशेष कोण पर देखने का नाम तो कतई नहीं
है मगर इसका अर्थ है कुछ कुछ वैसा ही. फिल्म गैम्बलर के
गीत पर चर्चा के समय हमने दृष्टिकोण पर थोड़ी टॉर्च घुमाई
थी. शब्द हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा हैं. अक्सर हम
बिना सोचे समझे और बिना अर्थ समझे उनका प्रयोग करते
रहते हैं. जैसे एक शब्द है पेटीकोट जिसमें ना तो पेटी है और
ना ही कोट. गुलाब जामुन में ना ही गुलाब है और ना ही जामुन.
वैसे एक बार हमें किसी बेवडे ज्ञानी ने बतलाया था कि इस
मिठाई का नाम देसी दारु के ठेके पर रखा गया था. वहाँ पर
गुलाबी और नारंगी जैसी कुछ चीज़ें मिला करती हैं.

फिल्मों से हमने एक शब्द सीखा है. हमने क्या बहुतों ने सीखा
है और प्रयोग भी किया है. फ़िल्मी हीरो ना होते तो हम बहुत
कुछ सीखने से वंचित रह जाते. ये शब्द है-लाईन मारना. जो
थोड़े सीधे किस्म के और लकीर पर फ़कीर की तरह चलने वाले
हुआ करते थे उनके दिमाग में ये ज़रूर ही कौंधता था-ये लाईन
किस चीज़ का नाम है. बिजली की तारों वाली लाइन या फिर
मट्टी के तेल को प्राप्त करने के लिए लगने वाली लंबी लाईन.
लाईन तो फिल्म के टिकट को प्राप्त करने के लिए भी लगती
थी किस ज़माने में जिसमें काफी धींगामुश्ती होती थी और जो
पहला शो पहली टिकट प्राप्त कर लेता था उसे लगता था मानो
उसने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर ली हो.


गीत सुनते हैं फिल्म लव मैरिज से देव आनंद और माला सिन्हा
पर फिल्माया गया जिसे रफ़ी और लता ने गाया है.




गीत के बोल:

धीरे धीरे चल चाँद गगन में
धीरे धीरे चल चाँद गगन में
धीरे धीरे चल चाँद गगन में
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में
कहीं ढल ना जाए रात टूट ना जाए सपने
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में
कहीं ढल ना जाए रात टूट ना जाए सपने
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में

तू झूम के चले तो दिल पे चले कटारी
हो है मीठी छुरी ये ज़ालिम नज़र तुम्हारी
तू झूम के चले तो दिल पे चले कटारी
हो है मीठी छुरी ये ज़ालिम नज़र तुम्हारी
गुनगुन गूंजे राग आज पवन में
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में
कहीं ढल ना जाए रात टूट ना जाए सपने
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में

वो क्या चीज़ थी मिला के नज़र पिला दी
हो हुआ वो असर के हमने नज़र झुका दी
वो क्या चीज़ थी मिला के नज़र पिला दी
हो हुआ वो असर के हमने नज़र झुका दी
अरे होंगी दो दो बात आज मिलन में
धीरे धीरे चल चाँद गगन में
कहीं ढल ना जाए रात टूट ना जाए सपने
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में

दो दिल मिल गए दिए जल गए हजारों
हो अजी तुम मिल गए तो गुल खिल गए हजारों
दो दिल मिल गए दिए जल गए हजारों
हो अजी तुम मिल गए तो गुल खिल गए हजारों
रिमझिम बरसे प्यार आज चमन में
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में
कहीं ढल ना जाए रात टूट ना जाए सपने
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में
धीरे धीरे चल
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Dheere dheere chal chand gagan mein-Love marriage 1959

Artists: Dev Anand, Mala Sinha

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October 6, 2018

तू सावन मैं प्यास पिया-परंपरा १९९३

पिछले पोस्ट में आपने एक अति गदगद सरीखी दिख रही एक
अभिनेत्री पर फिल्माया गया एक गीत सुना. ऐसी ग्लैड, ग्लैडर
और ग्लैडेस्ट अभिनेत्रियां हमने काफी देखी हैं हिंदी फिल्मों में.
हलकी सी मुस्कान, एक किलो मुस्कान और १०० किलो मुस्कान
सभी किस्में पाई जाती हैं फिल्मों में.

कभी कभी किसी दृश्य के मूड और कलाकार के भावों में काफी
अंतर होता है. कुशल निर्देशक ये सब भली भाँति जानता है कि
किस कलाकार से कैसे काम लेना है. ये एक प्रणय गीत है और
कई दर्शकों का मानना है ये एक क्लासिक गीत है, अतः हम भी
मान लेते हैं.

गीत लिखा है आनंद बक्षी ने जिसे लता मंगेशकर ने गाया है
शिव हरि की धुन पर.



गीत के बोल:

तू सावन
हो तू सावन मैं प्यास पिया
प्यास बुझा दे आ पास पिया
हो तू सावन मैं प्यास पिया
प्यास बुझा दे आ पास पिया
हो तू सावन

तेरे बिन मैं आधी अधूरी
छू के मुझे तू कर दे पूरी
तेरे बिन मैं आधी अधूरी
छू के मुझे तू कर दे पूरी
मन में मिलन की आस पिया
तू सावन मैं प्यास पिया
प्यास बुझा दे आ पास पिया
तू सावन

रह ना जाए कागज कोरा
ये जोबन एक पवन झकोरा
रह ना जाए कागज कोरा
ये जोबन एक पवन झकोरा
इसका क्या विश्वास पिया
तू सावन मैं प्यास पिया
प्यास बुझा दे आ पास पिया
तू सावन मैं प्यास पिया
प्यास बुझा दे आ पास पिया
………………………………………………………….
Too sawan main pyaas piya-Parampara 1993

Artists: Vinod Khanna, Ramya

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October 5, 2018

हम बंजारे दिल नहीं लेते-परंपरा १९९३

दक्षिण भारत में निर्मित बाहुबली फिल्म ने काफी लोकप्रियता अर्जित
की. अधिकाँश राज्यों में जहाँ अलग अलग भाषा बोली जाती है यह
फिल्म सफल रही. उत्तम कोटि के स्पेशल इफेक्ट्स फिल्म की सबसे
बड़ी विशेषता है.

फिल्म चर्चित हुई तो इसके किरदार और कलाकार भी चर्चित हुए. इस
फिल्म से रम्या को जितनी प्रसिद्धि मिली है उतनी शायद उनकी पूर्व
में बनी सारी हिंदी फिल्मों से भी नहीं प्राप्त हुई होगी.

सुनते हैं एक गीत फिल्म परम्परा से जिसमें आपको विनोद खन्ना और
अनुपम खेर भी दिखलाई देंगे.



गीत के बोल:

हम बंजारे दिल नहीं लेते दिल नहीं देते
जान लेते हैं अजी जान देते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं

हम बंजारे दिल नहीं लेते दिल नहीं देते
जान लेते हैं अजी जान देते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं

हम फूल हैं हम पत्थर नहीं हैं
आशिक हैं हम सौदागर नहीं हैं
हम फूल हैं हम पत्थर नहीं हैं
आशिक हैं हम सौदागर नहीं हैं
ओ तेरे दिलबर नहीं हैं
हमसे कोई झूठ ना बोले
झूठ को हम सच मान लेते हैं
सच मान लेते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं

हमसे ना खेलो आँख मिचौली
हम जानते हैं आँखों की बोली
हमसे ना खेलो आँख मिचौली
हम जानते हैं आँखों की बोली
गोरी साजन की हो ली
अंदर क्या है बाहर क्या है
सूरत से पहचान लेते हैं
पहचान लेते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं

जब हम किसी से करते हैं वादा
वादे की कीमत जान से ज्यादा
जब हम किसी से करते हैं वादा
वादे की कीमत जान से ज्यादा
तेरा क्या है इरादा
मर जाते हैं मिट जाते हैं
जब भी हम जुबान देते हैं
जुबान देते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं

हम बंजारे दिल नहीं लेते दिल नहीं देते
जान लेते हैं अजी जान देते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं
दोस्तों का इम्तिहान लेते हैं
दोस्ती का इम्तिहान देते हैं
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Ham banjare dil nahin dte-Parampara 1993

Artists: Ramya, Vinod Khanna, Anupam Kher

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October 2, 2018

कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया-जिंदगी एक जुआ १९९१

बहुत दिनों के बाद एक बार फिर से सभी पाठकों का स्वागत है.
आशा है पिछले पोस्ट पढ़ कर आप सभी ने आनंद उठाया होगा.

अंतरात्मा मनुष्य की सबसे बड़ी पथप्रदर्शक है. जब तक मनुष्य
इस बात को समझ पाता है उम्र ढल जाती है. हम उन सयानों की
बात नहीं कर रहे जो पैदाइशी सर्व-ज्ञानी होते हैं. ये तो बात है एक
आम मनुष्य की.

अंतरात्मा शब्द का किसी ज़माने में हमें अर्थ पता नहीं होता था.
जिन जिन शब्दों में शुरू में अंतर लगा होता उनसे हम अनुमान
लगाया करते कि इसका अर्थ क्या होगा. अंतर्राज्यीय, अंतर्राष्ट्रीय
जैसे शब्द समाचारों और अख़बारों में खूब सुनाई और दिखलाई देते
थे. फिर एक दिन हमने संधि विच्छेद करके समझने की कोशिश
की- अंतर+आत्मा. इससे कुछ कुछ समझ आया कि ये विशेष किस्म
की आत्मा है. उस समय तक कोई बाबाजी, ज्ञानीजी से हमारा
संपर्क नहीं हुआ था और ज्ञान की स्रोत सीमित थे और बाबागिरी
की इंडस्ट्री भी उतना फली फूली नहीं थी.

समय बड़ा बलवान है और ये धीमे धीमे सब उजागर करता चलता
है चाहे वो शब्द का अर्थ हो या किसी का चरित्र.

सुनते हैं एक जीवन दर्शन वाला गीत. गीत ९० के दशक की फिल्म
जिंदगी एक जुआ से है जिसमें नायक अपनी कहानी गीत के ज़रिये
कह रहा है.




गीत के बोल:

आज हमने सबक वो पढ़ डाला
जिसको दुनिया किताब कहती है
और एक ऐसा काम कर डाला
जिसको दुनिया हिसाब कहती है

कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
जब पा लिए खुश हो गए
जब खो दिया दिल रो दिया
इसी खोने पाने का नाम जिंदगी है
बिना खोये पाए नाकाम जिंदगी है
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Kabhi kuchh khoya-Zindagi ek jua 1991

Artists: Anil Kapoor, Shakti Kapoor, Madhuri Dixit

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July 22, 2018

गया अँधेरा हुआ उजारा-सुबह का तारा १९५४

आज एक प्रेरणादायी गीत सुनते हैं श्वेत श्याम युग से.
ये अपने ज़माने का बेहद लोकप्रिय गीत हैं.

फिल्म के शीर्षक कैसे और क्यूँ रखे जाते हैं ये अब
तक मुझे पूरी तरह से समझ नहीं आया. उपन्यास
के शीर्षक तो काफी हद तक समझ आ जाते हैं
लेकिन कुछ फिल्मों में शीर्षक और कथानक के बीच
सम्बन्ध ढूंढते ढूंढते फिल्म समाप्त हो जाती है और
सिनेमा घर की बत्तियाँ जल जाती हैं.

सुनते हैं सन १९५४ की फिल्म सुबह का तारा से
शीर्षक गीत जिसे तलत महमूद संग लता मंगेशकर
ने गाया है. नूर लखनवी की रचना है जिसका संगीत
सी रामचंद्र ने तैयार किया है.

भारतीय रेल के जनरल कम्पार्टमेंट में जब आप फँस
जाएँ और सारी सवारियां जबरन आँख मिचमिचाती हुई
सोती मिले और बैठने की जगह ना मिले तो आप ऐसे
गीत गा कर मन बहला सकते हैं. रात का सफर होगा
तो बैठे बैठे गुनगुनाते हुए सुबह हो ही जायेगी.



गीत के बोल:

गया अँधेरा हुआ उजारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
टूटे दिल का बँधा सहारा चमका चमका सुबह का तारा

साँस खुशी की तन में आई अरमानों ने ली अंगड़ाई
जाग उठीं उम्मीदें सारी जाग उठी तक़दीर हमारी
हमें किसी ने दूर पुकारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा

मुरझाई कली क्या फिर से खिलेगी
मुरझाई कली क्या फिर से खिलेगी खोई हुई क्या राहत मिलेगी
खोई हुई क्या राहत मिलेगी
कहीं ये तारा टूट न जाये सुबह का साथी छूट न जाये
आँखों में रह जाये नज़ारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा

गई उदासी रौनक छाई रोशनी अब जीवन में आई
हँसी खुशी का छेड़ो तराना नाच उठे मन झूमे ज़माना
समा सुहाना प्यारा प्यारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
………………………………………….
Gaya andhera hua ujala-Subah ka tara 1954

Artists: Pradeep Kumar, Jayshri

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