January 21, 2018

ऐतबार नहीं करना-क़यामत २००३

ये नहीं करना वो नहीं करना. गीतों में ऐसा भी कुछ होता
है. समीर के बोल और नदीम श्रवण का संगीत है. इसे कहीं
ना कहीं आपने एक बार अवश्य सुना होगा.

गीत अभिजीत और साधना सरगम ने गाया है. आपको ऐसा
भी लग सकता है मानो इसे अलका याग्निक गा रही हों.



गीत के बोल:

ऐतबार नहीं करना इन्तज़ार नहीं करना
ऐतबार नहीं करना इन्तज़ार नहीं करना
हद से भी ज़्यादा तुम किसी से प्यार नहीं करना
हद से भी ज़्यादा तुम किसी से प्यार नहीं करना

इकरार नहीं करना जाँ निसार नहीं करना
हद से भी ज़्यादा तुम किसी से प्यार नहीं करना
हद से भी ज़्यादा तुम किसी से प्यार नहीं करना

मंज़िलें बिछड़ गयीं रास्ते भी खो गये
आये फिर ना लौट के जो दीवाने हो गये
चाहतों की बेबसी दूरियों के ग़म मिले
बेक़रारियाँ मिलीं चैन यार कम मिले

बेक़रार नहीं करना इन्तज़ार नहीं करना
हद से भी ज़्यादा तुम किसी से प्यार नहीं करना
हद से भी ज़्यादा तुम किसी से प्यार नहीं करना

कोई तो वफ़ा करे कोई तो जफ़ा करे
किसको है पता यहाँ कौन क्या ख़ता करे
ऐसा ना हो इश्क़ में कोई दिल को तोड़ दे
बीच राह में सनम तेरा साथ छोड़ दे
इज़हार नहीं करना इन्तज़ार नहीं करना
हद से भी ज़्यादा तुम किसी से प्यार नहीं करना
हद से भी ज़्यादा तुम किसी से प्यार नहीं करना

ऐतबार नहीं करना इन्तज़ार नहीं करना
हद से भी ज़्यादा तुम किसी से प्यार नहीं करना
हद से भी ज़्यादा तुम किसी से प्यार नहीं करना
...........................................................................
Aitbaar nahin karma-Qayamat 2003

Artists: Sunil Shetty, Neha Dhupia

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अरे ना ना ना तौबा तौबा-मिस्टर एंड मिसेज १९५५

कहावतें जिंदगी का हिस्सा हैं. बातचीत में हम अक्सर
कहावतों का इस्तेमाल किया करते हैं. कुछ लोग तो
कहावतों का चलता फिरता कोष सरीखे मालूम पड़ते
हैं. कहावतों के अलावा किसी जगह विशेष की सामान्य
बोल चाल की भाषा के शब्दों के अनूठे प्रयोग भी हम
सुनते हैं. फिल्मों के माध्यम से ये ज्यादा सुनाई देते
हैं.

आज एक कहावत सुनी-झूठ बोलना पाप है नदी किनारे
सांप है. इसे कई बार सुन चुके हैं और ज़्यादातर ऐसे
लोगों के मुख से जो सच से ज्यादा झूठ से काम चलाया
करते हैं.

सुनते हैं एक गीत मिस्टर एंड मिसेज ५५ से जिसे गाया
है गीता दत्त और रफ़ी ने. जॉनी वॉकर और यास्मीन पर
इसे फिल्माया गया है. मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा गीत
है जिसकी तर्ज़ ओ पी नैयर ने बनाई है.




गीत के बोल:


अरे ना ना ना ना ना ना तौबा तौबा    
मैं न प्यार करूँगी    
मैं न प्यार करूँगी कभी किसी से
तौबा रे बलम तौबा तौबा

अरे वाह वाह वाह वाह ऐसा कइसा होगा
तौबा कायको करता                
तौबा कायको करता प्यार से डरता
ऐसा रे सनम कइसा होगा

दर्द-ए-जिगर से मैं वीक हूँ बहुत करो ऐसा ना जुलम
अरे हो जायेंगा फेल अभी हार्ट हमारा तेयरे सर की कसम
दर्द-ए-जिगर से मैं वीक हूँ बहुत करो ऐसा ना जुलम
अरे हो जायेंगा फेल अभी हार्ट हमारा तेयरे सर की कसम
छी छी छी छी छी छी करो ना ऐसी बात
देखो देखो देखो छोड़ो जी मेरा हाथ
छी छी छी छी छी छी करो ना ऐसी बात
देखो देखो देखो छोड़ो जी मेरा हाथ

अरे वाह वाह वाह वाह ऐसा कइसा होगा
तौबा कायको करता                
तौबा कायको करता प्यार से डरता
ऐसा रे सनम कइसा होगा

अरे ना ना ना ना ना ना तौबा तौबा    
मैं न प्यार करूँगी    
मैं न प्यार करूँगी कभी किसी से
तौबा रे बलम तौबा तौबा

तू जो कहे धरती में कुआँ खोद डालूँ दूँ ये दुनिया उजाड़
तू जो कहे चढ़ जाऊँ लम्बे-लम्बे पेड़ ऊँचे-ऊँचे ये पहाड़
तू जो कहे धरती में कुआँ खोद डालूँ दूँ ये दुनिया उजाड़
अरे तू जो कहे चढ़ जाऊँ लम्बे-लम्बे पेड़ ऊँचे-ऊँचे ये पहाड़

रीछ का तू अंकल बन्दर का तू बाप
ठोको नहीं बंडल रहो जी चुपचाप
मारा बाप
रीछ का तू अंकल बन्दर का तू बाप
ठोको नहीं बंडल रहो जी चुपचाप

अरे वाह वाह वाह वाह ऐसा कइसा होगा
तौबा कायको करता                
तौबा कायको करता प्यार से डरता
ऐसा रे सनम कइसा होगा

अरे ना ना ना ना ना ना तौबा तौबा    
मैं न प्यार करूँगी    
मैं न प्यार करूँगी कभी किसी से
तौबा रे बलम तौबा तौबा

सच कहो रात को अकेले में धड़कता तो होगा तेरा दिल
कहता तो होगा तेरा मन करूँ दो दो बतियाँ किसी से हिलमिल
सच कहो रात को अकेले में धड़कता तो होगा तेरा दिल
कहता तो होगा तेरा मन करूँ दो दो बतियाँ किसी से हिलमिल
हूँ मैं कोई रोगी अजब तेरी बात
सोती हूँ मज़े से मैं सारी सारी रात
एम के
हूँ मैं कोई रोगी अजब तेरी बात
सोती हूँ मज़े से मैं सारी सारी रात

अरे वाह वाह वाह वाह ऐसा कइसा होगा
तौबा कायको करता                
तौबा कायको करता प्यार से डरता
ऐसा रे सनम कइसा होगा

अरे ना ना ना ना ना ना तौबा तौबा    
मैं न प्यार करूँगी    
मैं न प्यार करूँगी कभी किसी से
तौबा रे बलम तौबा तौबा

अरे वाह वाह वाह वाह ऐसा कइसा होगा
अरे ना ना ना ना ना ना तौबा तौबा    
अरे वाह वाह वाह वाह
अरे ना ना ना ना ना ना
…………………………………………………..
Are na na na tauba tauba-Mr. & Mrs. 55

Artists: Johny Walker, Yasmin

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January 20, 2018

आज की रात आज की रात-कवि कालिदास १९५९

महाकवि कालिदास पर बने ऐतिहासिक कथाचित्र से एक
गीत सुनते हैं. इसे भारत व्यास ने लिखा है और इसका
संगीत तैयार किया है एस एन त्रिपाठी ने. इस जोड़ी ने
कई ऐतिहासिक व पौराणिक फिल्मों के लिए गीत बनाये.

गुणवत्ता की बात की जाए तो इनके बनाये अधिकांश गीत
दुसरे समकालीन गीतों से बेहतर हैं मगर प्रसिद्धि के
मामले में ये पीछे रह गए.

प्रस्तुत गीत गाया है उषा मंगेशकर और सविता बैनर्जी ने.
कॉम्बिनेशन के लिहाज से ये एक रेयर गीत है क्यूंकि इन
दोनों की आवाजें दो ही गीतों में साथ में है. एक शायद
फिल्म काबुलीवाला का गीत है.

गीत अनूठा है और इसमें गति परिवर्तन भी है. ये करिश्मा
आर डी बर्मन और मदन मोहन के अलावा औरों ने भी किया
है.




गीत के बोल:

जिसे बनाया खेवनहारा
वही आज कर गया किनारा
अपना बना के आज किसी ने
लूट लिया रे भाग्य हमारा

आज की रात
आज की रात आज की रात
चाँदनी अंग में आग लगाये
चकोरी झर झर नीर बहाये
आज मेरा चन्दा नहीं है साथ
आज की रात
आज की रात आज की रात

आ आ हा हा हा
आ आ हा हा हा
आज की रात आज की रात
आज की रात आज की रात
मगन मन मन्द मन्द मुस्काये
चकोरी मन में खिल खिल जाये
आज मेरा चन्दा है मेरे साथ
आज की रात आज की रात
आज की रात आज की रात

आज की रात
आज की रात आज की रात

बसन्ती ऱुत नयनो में आज
के पावस बन के छाई है
निराली ये पूनम की रात
अमावस बन के आई है
किसे नैनन का नीर दिखाऊँ
किसे मैं मन की पीर बताऊँ
आज मेरा चन्दा नहीं है साथ
आज की रात
आज की रात आज की रात

आ आ हा हा हा
आ आ हा हा हा
आज की रात आज की रात
आज की रात आज की रात
आज क्यों बजते सनन न छुन
मेरे पाँव की ये पायल
नयन में कौन समाया रे
बिखरने लगा मेरा काजल
आज मैं गीत प्रीत के गाऊँ
कभी सदमाऊँ कभी मुसकाऊँ
आज मेरा चन्दा है मेरे साथ
आज की रात आज की रात
आज की रात आज की रात

आज की रात
आज की रात आज की रात
..........................................................
Aaj ki raat-Kavi Kalidas 1959

Artists: Nirupa Roy, Anita Guha

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आई हैं बहारें-राम और श्याम १९६७

एक लोकप्रिय गीत सुनते हैं फिल्म राम और श्याम से. ब्लॉग को
लोकप्रिय बनाये रखने के लिए लोकप्रिय गीत सुनवाना ज़रूरी होता
है. रेयर और ना के बराबर सुने हुए गीत केवल अंग्रेजी ब्लॉग पर
शोभा देते हैं. उन्हें सुनने वाले कम-भक्त यहाँ नहीं मंडराया करते.
गर हम भी अंग्रेजी में लिखा करते तो हडप्पा और मोहन-जोदडो
की खुदाई में निकले गीत भी आपको सुनवाते.

प्रस्तुत गीत को श्रेणी बनाने के शौक़ीन बर्डडे सोंग कहते हैं. हम
भी कह लेते हैं. इसे शकील बदायूनीं ने लिखा है और इसका संगीत
है नौशाद का. फिल्म के दूसरे गीतों की तुलना में ये उतना पोपुलर
नहीं है मगर इसे भी काफी सुना गया है. फिल्म का शीर्षक गीत
भी कह सकते हैं इसे.

   


गीत के बोल:

आई हैं बहारें मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम
प्यार का ज़माना आया दूर हुए ग़म
राम की लीला रंग लाई
हा हा हा
श्याम ने बंसी बजाई
हा हा हा हा
आई हैं बहारें मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम
प्यार का ज़माना आया दूर हुए ग़म
राम की लीला रंग लाई
हा हा हा
श्याम ने बंसी बजाई
हा हा हा हा

चमका है इनसाफ़ का सूरज फैला है उजाला
उजाला चार बूंदों वाला
चमका है इन्साफ का सूरज फैला है उजाला
नई उमंगें संग लायेगा हर दिन आने वाला
आने वाला
नई उमंगें संग लायेगा हर दिन आने वाला
हो हो मुन्ना गीत सुनायेगा
टुन्ना ढोल बजायेगा
मुन्ना गीत सुनायेगा टुन्ना ढोल बजायेगा
संग संग मेरी छोटी मुन्नी नाचेगी छम धम

हो आई हैं बहारें मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम
प्यार का ज़माना आय दूर हुए ग़म
राम की लीला रंग लाई
हा हा हा
श्याम ने बंसी बजाई
हा हा हा हा

अब न होंगे मजबूरी के इस घर में अफ़साने
अब ना होंगे मजबूरी के इस घर में अफ़साने
प्यार के रंग में रंग जायेंगे सब अपने बेगाने
प्यार के रंग में रंग जायेंगे सब अपने बेगाने
हो हो हो हो सब के दिन फिर जायेंगे
मंज़िल अपनी पायेंगे
जीवन के तराने मिल के गायेंगे हरदम

हो आई हैं बहारें मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम
प्यार का ज़माना आय दूर हुए ग़म
राम की लीला रंग लाई
हा हा हा
श्याम ने बंसी बजाई
हा हा हा हा
अब ना कोई भूखा होगा
और ना कोई प्यासा
हो हो हो अब ना कोई भूखा होगा और ना कोई प्यासा
अब ना कोई नौकर होगा
और ना कोई आका
अब ना कोई नौकर होगा और ना कोई आका
हो ओ ओ अपने घर के राजा तुम
हा आ आ आ छेड़ो मन का बाजा तुम
आ जायेगी सुर में देखो जीवन की सरगम

हो आई हैं बहारें मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम
प्यार का ज़माना आय दूर हुए ग़म
राम की लीला रंग लाई
हा हा हा
श्याम ने बंसी बजाई
हा हा हा हा
…………………………………………………………
Aayi hai baharen-Ram aur Shyam 1967

Artists: Dilip Kumar, Kids

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January 19, 2018

आज मेरे नसीब ने-हलचल १९५१

विंटेज युग कुछ संगीत रसिकों की नज़र में ५० तक का
दौर है. कुछ के लिए कट-ऑफ १९४० है. सबके अपने
अपने पैरामीटर और किलोमीटर हैं.

सुनते हैं फिल्म हलचल से एक गीत लता मंगेशकर का
गाया हुआ. खुमार बाराबंकवी के बोल हैं जिसे संगीतकार
सज्जाद हुसैन ने सुरों में पिरोया है.



गीत के बोल:

आज मेरे नसीब ने मुझको रुला रुला दिया
आज मेरे नसीब ने मुझको रुला रुला दिया
बीते दिनों की याद ने फिर मेरा दिल दुखा दिया
आज मेरे नसीब ने मुझको रुला रुला दिया

लूट लिया मेरा करार फिर भी ऐ बेकरार ने
लूट लिया मेरा करार फिर भी ऐ बेकरार ने
दर्द ने मेरे चैन को ख़ाक़ में फिर मिला दिया
आज मेरे नसीब ने मुझको रुला रुला दिया

लाऊँ कहाँ से मैं वो दिल
लाऊँ कहाँ से मैं वो दिल तुमको जो प्यार कर सके
जिसमे बसे हुए थे वो मैंने वो दिल गँवा दिया
आज मेरे नसीब ने मुझको रुला रुला दिया

अश्क़ जो थे रुके रुके आज वो फिर बरस पड़े
अश्क़ जो थे रुके रुके आज वो फिर बरस पड़े
ऐ मेरी नामुरादियों तुमने मुझे मिटा दिया

आज मेरे नसीब ने मुझको रुला रुला दिया
बीते दिनों की याद ने फिर मेरा दिल दुखा दिया
आज मेरे नसीब ने मुझको रुला रुला दिया
............................................................
Aaj mere naseeb ne-Halchal 1951

Artist: Nargis

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