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Jul 18, 2019

हम अपने दिल का फ़साना-एक्ट्रेस १९४८

सिलसिला कैसे शुरू होता है, एक गीत सुनो इसके बाद कड़ियाँ
दालें, सब्जियां अपने आप जुड़ती चली जाती हैं. एक गाना सुनो
उसमें से दूसरे गाने का भूत निकल आता है.

बहाना कभी गीतकार का होता है तो कभी संगीतकार का. किसी
गीत के भाव से लिंक मिल जाती है तो कभी किसी शब्द विशेष
से. अब देखिये हमने एक गीत सुना फिल्म शहनाई का जो रेहाना
पर फिल्माया गया था. रेहाना से फिल्म एक्ट्रेस याद आई और
याद आ गया रफ़ी का गाया क्लासिक दर्द भरा गीत.

लगे हाथ सुन भी लेते हैं इसे. नक्शब के बोल हैं और इसकी
धुन तैयार की है श्याम सुन्दर ने. फिल्म के हीरो हैं प्रेम अदीब.




गीत के बोल:

हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके
लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके

तेरी तलाश में दर-दर की
ठोकरें खाईं
तेरी तलाश में दर-दर की
ठोकरें खाईं
मेरी वफ़ा के क़दम फिर भी
डगमगा न सके

लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके

ज़रा तो सोच के उस दिल का
हाल क्या होगा
हाल क्या होगा
ज़रा तो सोच के उस दिल का
हाल क्या होगा
हाल क्या होगा
जो दूर रह न सके
तेरे पास आ न सके

लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके

हम उनको याद न करते
पर इसको( दिल) क्या कीजे
हम उनको याद न करते
पर इसको( दिल) क्या कीजे
हज़ार भूलना चाहा
मगर भुला न सके

लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके
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Ham apne dil ka fasana-Actress 1948

Artist: Prem Adeeb, Rehana

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