January 30, 2011

सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी १९४८

आज महात्मा गाँधी कि पुण्यतिथि है। आइये उनको याद करते
हुए एक गीत सुनते हैं। सन १९४८ में एक गीत उनकी याद में रचा
गया था जिसे रफ़ी ने गाया है। काफी बड़ा गीत है ये। इसका एक
भाग आपको सुनवा रहे हैं।

आम आदमी और महात्मा में क्या फर्क है-गांधीजी के उदाहरण
से ही समझ लीजिये। जब कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं
होता तभी व्यक्ति महात्मा का दर्ज़ा प्राप्त करता है और इसके लिए
बड़े बड़े त्याग करना पढ़ते हैं, तपस्या करना पढ़ती है। तपस्या
कंदराओं और वन में भटकना या डेरा ज़माना मात्र ही नहीं है,
संसार में रह कर भी तपस्या की जा सकती है।




गीत के बोल:

सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
वो बापू जो पूज्य हैं इतना जितना गंगा माँ का पानी

सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी

पोरबंदर गुजरात देश में एक ऋषि ने जन्म लिया
माता पिता ने मोहनदास करमचंद गाँधी नाम दिया
बचपन खेल कूद में गुज़रा लन्दन जा कर विद्या पायी
बैरिस्टर बन अफ्रीका में जा कर अपनी धाक जमाई
लेकिन जो फानी दुनिया में अमर कहाने आते हैं
वो कब माया मोह में फँस कर अपना समय गंवाते हैं

सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी

अफ्रीका में हिंदी जन की बड़ी दुर्दशा पायी
गोरे राज़ से टक्कर लेकर सत्य की ज्योत जलाई
फिर भारत की सेवा करने अपने देश में आया

साबरमती में सत्याग्रह का आश्रम आन बनाया
और खिलाफत कन्फ्रांस में सभापति का दर्ज़ा पाया
इस्लामी अधिकार कि रक्षा में भी हाथ बताया
हिन्दू मुस्लिम दोनों उसकी आँखों के तारे थे
दुनिया के सारे ही मज़हब बापू को प्यारे थे

सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी

भारत कौमी कांग्रेस की ऐसी धूम मचाई
कौमी झंडे के नीचे फिर जनता दौड़ी आई
खादी का परचार किया फिर घर घर खादी आई
और बिदेशी माल की होली गाँधी ने जलवाई
चरखे की आवाज़ जो गूंजी हुईं मशीनें ठंडी
और शान से लहराई भारत की तिरंगी झंडी

सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
वो बापू जो पूज्य हैं इतना जितना गंगा माँ का पानी

सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी

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