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Aug 15, 2020

वतन की राह में-शहीद १९४८

आज स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर सुनते हैं आजादी
के एक साल बाद रिलीज़ हुई फिल्म शहीद से एक गीत.

राजा मेहँदी अली खान की रचना है और गुलाम हैदर का
संगीत. इसे रफ़ी और खान मस्ताना और साथियों ने गाया
है.




गीत के बोल:

वतन की राह में वतन के नौजवान शहीद हो
.
.
.......................................................................
Watan ki raah mein watan ke-Shaheed 1948

Artist: Dilip Kumar

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Mar 1, 2020

दिल को तुम्हारी याद ने-मेरी कहानी १९४८

जोर का झटका धीरे से लगा गाने को सुन कर दिमाग
में कई विचार आने लगते हैं गीतों के बोलों को ले कर.
क्या इस बोल पर गीत बना है, फलाना शब्द कौन से
गीत में आया है?

हिलाना शब्द का ज्यादा प्रयोग गीतों में नहीं हुआ है.
इस शब्द को मुखड़े में इस्तेमाल किया गया है १९४८
की फिल्म मेरी कहानी के गीत में जिसे सुरेन्द्र ने
गाया है. अंजुम पीलीभीती से इसे लिखा है और धुन
तैयार की है के दत्ता उर्फ दत्ता कोरगांवकर ने.




गीत के बोल:

दिल को तुम्हारी याद ने आ कर हिला दिया
आ कर हिला दिया
अरमाँ जो सो चुके थे उन्हें फिर जगा दिया
अरमाँ जो सो चुके थे उन्हें फिर जगा दिया
उन्हें फिर जगा दिया
दिल को तुम्हारी याद ने आ कर हिला दिया
आ कर हिला दिया

हमदर्द जब बने थे तुम्हीं दिल के दर्द के
बेदर्द बन के क्यूँ मेरे दिल को दुखा दिया
दिल को दुखा दिया

दिल को तुम्हारी याद ने आ कर हिला दिया
आ कर हिला दिया

मेरी ज़रा सी भूल की इतनी बड़ी सज़ा
आँसू बना के दिल को नज़र से गिरा दिया
नज़र से गिरा दिया

आँखों से दूर हो के भी रहते हो दिल के पास
रहते हो दिल के पास
तुमने तो ज़िंदगी को तमाशा बना दिया
तमाशा बना दिया

दिल को तुम्हारी याद ने आ कर हिला दिया
.....................................................
Dil ko tumhari yaad ne-Meri kahani 1948

Artist:

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Oct 27, 2019

आई आई सावन रुत आई-मेला १९४८

सावन रुत आने वाला एक श्वेत श्याम युग का गीत
सुनते हैं फिल्म मेला से जिसमें नायिका के साथ
सहायक कलाकारों का मेला लगा हुआ है. गीत के
शुरू में उनसे डर के बकरियां इधर उधर भाग रही हैं.

गीत लिखा है शकील बदायूनीं ने और इसकी धुन
तैयार की है नौशाद ने. शमशाद बेगम और मुकेश
ने इसे गाया है. नायक इस गीत में थोडा देर में
प्रकट होता है.

हिंदी फिल्मों के गीतों में कसी किसी गीत में बोल
इतने होते हैं जैसे फिल्म की नायिका बिकिनी पहने
हो तो किसी किसी गीत में लिरिक्स इतनी ज्यादा
होती है जैसे सफर के लिए सूटकेस तैयार किया
गया हो और उसमें मम्मी, पापा, चुन्नू, मुन्नू, गप्पू
और पप्पू सभी के कपडे ठूंस दिए गए हों.
   



गीत के बोल:

आई सावन रुत आई, सजन मोरा डोले है मन
लागी तेरी लगन घर आ जा
हो घर आ जा मोहन घर आ जा
आई सावन रुत आई, सजन मोरा डोले है मन
लागी तेरी लगन घर आ जा
हो घर आ जा मोहन घर आ जा

खेतों-खेतों डग-मग डोले हरियाली मतवारी
हो हरियाली मतवारी
खेतों-खेतों डग-मग डोले हरियाली मतवारी
हो हरियाली मतवारी
ऐसे में ओ प्रीतम प्यार आये याद तिहारी
हो आये याद तिहारी
ऐसे में ओ प्रीतम प्यार आये याद तिहारी
हो आये याद तिहारी
घर आ जा सजन घर आ जा
हो घर आ जा मोहन घर आ जा

आई सावन रुत आई, सजन मोरा डोले है मन
लागी तेरी लगन घर आजा

तोरे बिना मोहे कल नाही आये
कल नाही आये
तोरे बिना मोहे कल नाही आये
कल नाही आये
दिल की लगी तड़पाये हो ओ
दिल की लगी तड़पाये
मस्त पवन चले, मन लहराये
मस्त पवन चले, मन लहराये
आई मिलन रुत हाय
आई मिलन रुत हाय
घर आ जा सजन घर आजा
हो घर आ जा मोहन घर आजा

आई सावन रुत आई सजन मोरा डोले है मन
लागी तेरी लगन घर आ जा

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
खेतों से परबत पर आ कर
खेतों से परबत पर आ कर
जीवन जोत जगा ले
जीवन जोत जगा ले
दुनिया है दो दिन का मेला
कुछ रो ले कुछ गा ले
दुनिया है दो दिन का मेला
कुछ रो ले कुछ गा ले

घर आ जा सजन घर आजा
ओ घर आ जा मोहन घर आ जा
आई सावन रुत आई सजन मोरा डोले है मन
लागी तेरी लगन घर आ जा
................................................................
Aayi sawan rut aayi-Mela 1948

Artists: Nargis, Dilip Kumar, Female extras, few goats

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आई दीवाली दीप जला जा-पगड़ी १९४८

इस ब्लॉग के सभी पाठकों  और शुभचिंतकों को दीपावली की
हार्दिक शुभकामनाएं.   

आज दीपावली के शुभ अवसर पर एक गीत सुनते हैं फिल्म
पगड़ी से. फिल्म का नाम अंग्रेजी में पुगरी पढ़ने में आता
है. फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं-अमर और कामिनी कौशल.

इस गीत के रचनाकार हैं शकील बदायूनीं और इस गीत का
संगीत तैयार किया है गुलाम मोहम्मद ने. शमशाद बेगम
संग इसे सितारा कानपुरी ने गाया है.





गीत के बोल:

आई दीवाली दीप जला जा
आई दीवाली दीप जला जा
ओ मतवाले साजना ओ मतवाले साजना

आई दीवाली दीप जला जा
आई दीवाली दीप जला जा
ओ मतवाले साजना ओ मतवाले साजना

घर घर दीपक ऐसे चमकें जैसे चाँद सितारे
घर घर दीपक ऐसे चमकें जैसे चाँद सितारे
आ जा आ जा कड़ी पुकारूँ मैं साजन के द्वारे
आ जा आ जा कड़ी पुकारूँ मैं साजन के द्वारे
ओ मेरे मन के रोग मिटा जा
ओ मेरे मन के रोग मिटा जा
ओ मतवाले साजना ओ मतवाले साजना

आई दीवाली दीप जला जा
आई दीवाली दीप जला जा
ओ मतवाले साजना ओ मतवाले साजना

आई खुशी की रात सुहानी फूल खिलेंगे दिल के
आई खुशी की रात सुहानी फूल खिलेंगे दिल के
इस नगरी में दो दिलवाले
इस नगरी में दो दिलवाले राज करेंगे मिल के
मैं तेरी रानी तू मेरा राजा
मैं तेरी रानी तू मेरा राजा
ओ मतवाले साजना ओ मतवाले साजना
…………………………………………….
Aayi diwali deep jala ja-Pugree 1948

Artists: Kamini Kaushal

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Oct 23, 2019

रात को जी हाय रात को-आग १९४८

आँख मारने का सिलसिला बहुत पुराना है हिंदी फिल्मों में.
युगल गीत में आँख मारने के ५-६ वाकये हैं फिल्मों में. एक
जीतू श्रीदेवी वाली फिल्म ८० के दशक की और अरशद वारसी
वाली ९० के दशक की फिल्म है.

सुब्ते हैं रोचक गीत मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ जिसे
मुकेश और शमशाद बेगम ने गाया है. संगीत है राम गांगुली
का.

रात को जो पहला तारा चमक रहा है गीत में वो लैम्प पोस्ट
है. एक हास्य गीत है ये जिसमें नायक नायिका निप्पल चूसने
वाले बच्चे दिखलाई दे रहे हैं. इसको कहते हैं क्रीयेटिविटी.





गीत के बोल:

रात को जी हाय रात को जी चमकें तारें
रात को जी चमकें तारे
देख बलम मोहे अँखियाँ मारे जी मैं मर गई रामा
रात को जी हाय रात को जी चमकें तारे
पहलू में दिल मेरा पाँव पसारे जी मैं का करूँ राम

रात को जी हाय रात को जी बोले पपीहरा
देख बलम मोरा डोले जियरा जी मैं मर गई रामा
रात को जी हाय रात को जी बोले पपीहरा
भेद खोले तेरा-मेरा मेरा-तेरा
हो भेद खोले तेरा-मेरा मेरा-तेरा जी मैं का करूँ राम

रात को जी हाय रात को जी चमके चंदा
जैसे बलम तेरे प्यार का फन्दा जी मैं मर गई रामा
रात को जी हाय रात को जी चमके चन्दा
तेरे बिन पाए नहीं चैन यह बन्दा जी मैं का करूँ रामा

रात को जी हाय रात को जी उड़ते बादल
देख बलम मोरा छोड़ दे आँचल जी मैं मर गई रामा
रात को जी हाय रात को जी उड़ते बादल
साथ हमारे गोरी दूर चल्यो जी मैं का करूँ रामा
……………………………………………………..
Raat ko ji haay-Aag 1948

Artists: Vishwa Mehra, Mohana Cabral

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Oct 10, 2019

धरती को आकाश पुकारे ३-मेला १९४८

रोमांटिक ट्रेजेडी फिल्म मेला जो सन १९४८ की फिल्म है
इसके गीत काफी लोकप्रिय रहे थे अपने समय में और
आज भी कुछ गीत हमें सुनाई दे जाते हैं. इस फिल्म के
प्रमुख कलाकार हैं-दिलीप कुमार और नर्गिस. दिलीप कुमार
और नर्गिस ने कुछ ही फिल्मों में साथ काम किया है. एक
और फिल्म है अंदाज़ जिसमें राज कपूर भी साथ हैं.

प्रस्तुत गीत एकल वर्ज़न है जिसे शमशाद बेगम ने गाया
है. शकील बदायूनीं का लिखा गीत हैं और धुन नौशाद की.
ये फिल्म के अंत में प्रकट होता है.




गीत के बोल:

धरती को आकाश पुकारे
आ जा आ जा प्रेम द्वारे आना ही होगा
इस दुनिया को छोड़ के प्यारे
झूठे बंधन तोड़ के सारे जाना ही होगा

…………………………………………………….
Dharti ko aakash pukare 2-Mela 1948

Artists: Dilip Kumar, Nargis

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Sep 24, 2019

मेरा दिल तोड़ने वाले-मेला १९४८

फिल्म संगीत में कई तरह के ड्वेट गीत उपलब्ध हैं-सुखद
दुखद और हास्य रस वाले. कुछ एक प्रेरणादायी युगल गीत
भी हैं. भजन और कव्वालियां भी हैं जिनमें महिला और पुरुष
स्वर साथ साथ होते हैं..

सुनते हैं फिल्म मेला से धीमी गति वाला एक युगल गीत
शमशाद बेगम और मुकेश की आवाजों में. शकील बदायूनीं की
रचना है और नौशाद का संगीत.



गीत के बोल:

मेरा दिल तोड़ने वाले मेरे दिल की दुआ लेना
मिटा कर मेरी दुनिया को नयी दुनिया बसा लेना

मोहब्बत की कसम तुमको लगी दिल की बुझा लेना
हमारी याद जब आये तो दो आंसू बहा लेना

नहीं आता वफाओं से हमें दामन बचा लेना
नहीं आता वफाओं से हमें दामन बचा लेना
हमें दामन बचा लेना
तुम्हीं पर जान दे देंगे किसी दिन आजमा लेना
मेरा दिल तोड़ने वाले मेरे दिल की दुआ लेना

मोहब्बत नाम है गम का खुशी से गम उठा लेना
मोहब्बत नाम है गम का खुशी से गम उठा लेना
खुशी से गम उठा लेना
अगर दिल को ना चैन आये तो कुछ रो रो के गा लेना
मिटा कर मेरी दुनिया को नयी दुनिया बसा लेना
हमारी याद जब आये तो दो आंसू बहा लेना
……………………………………………………
Mera dil todne wale-Mela 1948

Artists: Dilip Kumar, Nargis

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Sep 22, 2019

धरती को आकाश पुकारे १-मेला १९४८

सन १९४८ की रोमांटिक ट्रेजेडी फिल्म मेला से एक गीत
सुनते हैं जो फिल्म में कई बार गूंजा है. इसके भाव दुःख
वाले हैं. फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं-दिलीप कुमार और
नर्गिस.

प्रस्तुत गीत युगल वर्ज़न है जिसे मुकेश और शमशाद बेगम
ने गाया है. शकील बदायूनीं के बोल हैं और नौशाद ने इसकी
धुन तैयार की है.




गीत के बोल:

धरती को आकाश पुकारे
आ जा आ जा प्रेम द्वारे आना ही होगा
इस दुनिया को छोड़ के प्यारे
झूठे बंधन तोड़ के सारे जाना ही होगा

धरती को आकाश पुकारे
आ जा आ जा प्रेम द्वारे आना ही होगा
इस दुनिया को छोड़ के प्यारे
झूठे बंधन तोड़ के सारे जाना ही होगा
…………………………………………………….
Dharti ko aakash pukare-Mela 1948

Artists: Dilip Kumar, Nargis

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Jul 18, 2019

हम अपने दिल का फ़साना-एक्ट्रेस १९४८

सिलसिला कैसे शुरू होता है, एक गीत सुनो इसके बाद कड़ियाँ
दालें, सब्जियां अपने आप जुड़ती चली जाती हैं. एक गाना सुनो
उसमें से दूसरे गाने का भूत निकल आता है.

बहाना कभी गीतकार का होता है तो कभी संगीतकार का. किसी
गीत के भाव से लिंक मिल जाती है तो कभी किसी शब्द विशेष
से. अब देखिये हमने एक गीत सुना फिल्म शहनाई का जो रेहाना
पर फिल्माया गया था. रेहाना से फिल्म एक्ट्रेस याद आई और
याद आ गया रफ़ी का गाया क्लासिक दर्द भरा गीत.

लगे हाथ सुन भी लेते हैं इसे. नक्शब के बोल हैं और इसकी
धुन तैयार की है श्याम सुन्दर ने. फिल्म के हीरो हैं प्रेम अदीब.




गीत के बोल:

हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके
लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके

तेरी तलाश में दर-दर की
ठोकरें खाईं
तेरी तलाश में दर-दर की
ठोकरें खाईं
मेरी वफ़ा के क़दम फिर भी
डगमगा न सके

लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके

ज़रा तो सोच के उस दिल का
हाल क्या होगा
हाल क्या होगा
ज़रा तो सोच के उस दिल का
हाल क्या होगा
हाल क्या होगा
जो दूर रह न सके
तेरे पास आ न सके

लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके

हम उनको याद न करते
पर इसको( दिल) क्या कीजे
हम उनको याद न करते
पर इसको( दिल) क्या कीजे
हज़ार भूलना चाहा
मगर भुला न सके

लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके
...........................................................................
Ham apne dil ka fasana-Actress 1948

Artist: Prem Adeeb, Rehana

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Jul 13, 2019

ऐ दिल उड़ा के ले चल-सेहरा १९४८

एक फिल्म है सन १९६३ की सेहरा जिसमें रामलाल का संगीत
है और इससे पहले भी इस नाम से एक फिल्म बनी थी. १९४८
में बनी थी जिसमें एस मोहिंदर का संगीत है. इसमें अरुण कुमार
और निर्मला देवी की प्रमुख भूमिकाएं हैं.

बरसों संगीत सुनने के बाद मैंने ऐसा महसूस किया कि जो गीत
संगीतकार अपने गाने के लिए चुनता है वो ९५ प्रतिशत मामलों
में उस फिल्म के साउँडट्रेक की सबसे बेहतर धुन होती है. बहुत
से संगीतकारों ने गाने गाये हैं मगर कुछ ऐसे भी हैं जिनकी
आवाजें सुनने का सौभाग्य हमें प्राप्त नहीं हुआ. ३० और ४० के
दशक में काफी सारे संगीतकारों ने गाने गाये हैं. ये ट्रेंड फिर से
बढ़ा है २००० के बाद.

प्रस्तुत गीत सुरजीत सेठी ने लिखा है जिन्होंने एस मोहिंदर के
लिए काफ़ी गीत लिखे हैं. मख्मूर का अर्थ है-मदमस्त और
परवाज़ का अर्थ है-उड़ान.



गीत के बोल:

ऐ दिल उड़ा के ले चल मख्मूर फिजाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में
ऐ दिल उड़ा के ले चल मख्मूर फिजाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में

हे ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
छाया है किस तरह दुनिया पे आकाश से आ पूछें
आकाश से आ पूछें
आ सो के देखें पल भर तारों की छाँव में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में

ऐ दिल उड़ा के ले चल मख्मूर फिजाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में

बदली में छिपे चाँद के मुखड़े को चूम लें
बदली में छिपे चाँद के मुखड़े को चूम लें
मुखड़े को चूम लें
आ देखें अब वो तैरते पंछी हवाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में

ऐ दिल उड़ा के ले चल मख्मूर फिजाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में

हे ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
बादल का शोर लो सुनो ऐसे है आ रहा
बादल का शोर लो सुनो ऐसे है आ रहा
जैसे पाजेब दुल्हन की छनके है पांव में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में

ऐ दिल उड़ा के ले चल मख्मूर फिजाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में
इन काली घटाओं में
इन काली घटाओं में
..................................................................
Ae dil udaa ke le chal-Sehra 1948

Artist:

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Jan 6, 2019

फिर आह दिल से निकली-मेला १९४८

मेला फिल्म से एक लोकप्रिय गीत सुनते हैं जिसे
ज़ोहराबाई अम्बालेवाली ने गाया है.

जिगर से लहू टपकना काफी सीवियर कंडीशन होती है.
उसे प्रतीकात्मक रूप से गीत में उपयोग करने का अर्थ
है कि तकलीफ़ बेइंतिहा है.

गीत के बोल सरल हैं इसलिए असर भी ज्यादा करते
हैं.




गीत के बोल:

फिर आह दिल से निकली टपका लहू जिगर से
शायद वो जा रहे हैं छुप कर मेरी नज़र से
…………………………………………………….
Phir aah dil se nikli-Mela 1948

Artist: Nargis, Dilip Kumar

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Aug 29, 2018

सपेरा बीन बजायो रे-पद्मिनी १९४८

सपेरा और बीन इत्यादि को सही पहचान दिलाई फिल्म
नागिन ने. उसके पहले तक के गीत बजे ज़रूर मगर
रेकोर्ड तोड़, छत फाड लेवल तक नहीं.

सुनते हैं सन १९४८ की पद्मिनी फिल्म से अशोक कुमार
और गीता दत्त का गाया मधुर युगल गीत.

वली साहब रचनाकार हैं और गुलाम हैदर संगीतकार.

बेहतर सुनाई देने वाला सपेरा गीत है. अगर आप बेसुरे
गानों से परेशान हो जाते हों तो इसे सुन लिया करें एक
बार टॉनिक का काम करेगा.




सपेरा बीन बजायो रे तू तो म्हारे गली में आयो रे
मैं तो चलूँगी थारे साथ
तीर तोरे नैनों का हुआ कलेजवा के पार
तीर तोरे नैनों का
लागा रे तीर तोर नैनों का
लगा मन में तीर तोरे नैनों का

ओ ओ गोरी रे गोरी रे मोरे बाँध दे हाथ दोऊ राखे से
मोरी काट दे नार गँडासे से
मैं तो छुप जाऊँ थारे साँचे से
मैं तो छुप जाऊँ थारे साँचे से
मेरा जीना है दुश्वार
तीर तोरे नैनों का हुआ कलेजवा के पार

लागा रे तीर तोर नैनों का
लगा मन में तीर तोरे नैनों का


ओ ओ ओ तन का बाजे बाँसुरी रे
मोरे मन का बाजे साज़
साज़ मोरे मन का बाजे साज़
तार न तोड़ ये तार के रे तेरी
भगवन राखे लाज
आज मोहे दीपक राग सुनायो रे
तू तो म्हारो गली में आयो रे
मैं तो चलूँगी थारे साथ
तीर तोरे नैनों का हुआ कलेजवा के पार
तीर तोरे नैनों का
लागा रे तीर तोर नैनों का
लगा मन में तीर तोरे नैनों का
…………………………………………
Sapera been bajayo-Padmini 1948

Artists:

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Aug 27, 2018

बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के-पद्मिनी १९४८

सुनते हैं फिल्म पद्मिनी से लता मंगेशकर का गया हुआ
बेहतरीन गीत जिसे वली साहब ने लिखा है.

इसकी धुन तैयार की है गुलाम हैदर ने. गुलाम हैदर के
गानों में लता का उच्चारण साफ़ मिलता है. गाना समय
के हिसाब से अलग तरीके से गाया गया है. इसमें हर
अंतरे के बाद मुखडा पूरा रिपीट होता है. आधी पंक्ति,
आधा मुखडा जैसी इसमें कोई चीज़ सैंडविच नहीं है.

गीतों की उपयुक्त श्रेणी क्या हुई-बेदर्द हिट्स ऑफ कोर्स.



गीत के बोल:

बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के
रो लेंगे तसव्वुर में तुझे पास बिठा के
बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के
रो लेंगे तसव्वुर में तुझे पास बिठा के

जब दूर थी उनसे मैं बहुत पास थी उनके
क्यूँ दूर किया था यूँ मुझे पास बुला के

बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के
रो लेंगे तसव्वुर में तुझे पास बिठा के

बरबाद भी हो के न करेंगे तेरा शिकवा
बरबाद भी हो के न करेंगे तेरा शिकवा
हँस लेंगे गये वक़्त को हम सामने ला के

बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के
रो लेंगे तसव्वुर में तुझे पास बिठा के

ठण्डक उन्हें मिलती है अगर मेरी जलन से
ठण्डक उन्हें मिलती है अगर मेरी जलन से
देखूँगी तमाशा मैं भरे घर को जला के

बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के
रो लेंगे तसव्वुर में तुझे पास बिठा के
........................................................
Bedard tere dard ko-Padmini 1948

Artist:

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Jun 16, 2018

कोई दिन ज़िन्दगी के-गुंजन १९४८

सन १९४८ में कई उल्लखनीय फ़िल्में आयीं और कई
फ़िल्में ऐसी हैं जिनका संगीत खूब लोकप्रिय हुआ और
बजा. ये भी एक ऐसा वर्ष रहा जिसमें पुरानी और नयी
पीढ़ी के संगीतकारों की बराबर सी मौजूदगी रही..

सुनते हैं एक कम जाने पहचाने संगीतकार की बढ़िया
धुन मुकेश की आवाज़ में.

गीत सरस्वती कुमार दीपक रचित है.




गीत के बोल:

कोई दिन ज़िन्दगी के गुनगुना कर ही बिताता है
कोई दिन ज़िन्दगी के गुनगुना कर ही बिताता है
कोई पा कर के खोता है कोई खो कर के पाता है

हमारी ज़िन्दगी भी क्या कभी हँसना कभी रोना
हमारी ज़िन्दगी भी क्या कभी हँसना कभी रोना
जिसे हम अपना कहते हैं वो हमसे दूर जाता है

उम्मीदें लुट गईं जिसकी तसव्वुर छिन गया जिसका
उम्मीदें लुट गईं जिसकी तसव्वुर छिन गया जिसका
वो कश्ती आप ही गहरे समन्दर में डुबाता है

अगर दिल हो गया वीरां करूँगा मौत से उल्फ़त
अगर दिल हो गया वीरां करूँगा मौत से उल्फ़त
किसी बदहाल पर अब कौन दो आँसू बहाता है

किसी के चैन से आराम से क्या वास्ता अपना
किसी के चैन से आराम से क्या वास्ता अपना
न कोई साथ देता है न कोई पास आता है

कोई दिन ज़िन्दगी के गुनगुना कर ही बिताता है
…………………………………………..
Koi din zindagi ke-Gunjan 1948

Artist: Aap dhoondho

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Jun 15, 2018

दिल आने के ढंग निराले हैं-मेरी कहानी १९४८

दिल ना हुआ कंजकटिवाईटिस हो गया जब चाहे आ
गया. गीत हास्य पुट वाला है और इसमें एक बात
का सन्देश भी है-कभी कभी पीछा छोड़ने से भी काम
बन जाता है. जिस चीज़ के पीछे ज्यादा भागो, वो
उतना ही ज्यादा भगाती है.

नक्शब के बोल, दत्ता कोरगांवकर का संगीत है और
सुरेन्द्र की आवाज़. कैची और तेज धुन है गीत की.





गीत के बोल:

दिल आने के
ओ दिल आने के ढंग निराले हैं
दिल आने के ढंग निराले हैं
दिल से मजबूर सब दिलवाले हैं
आ आ आ आ आ
दिल से मजबूर सब दिलवाले हैं
दिल आने के
ओ दिल आने के ढंग निराले हैं

कभी अँखियाँ मिलाने से आता है दिल
कभी अँखियाँ बचाने से आता है दिल
वो ही अँखियाँ जिन्हें हमसे मतलब नहीं
वो ही अँखियाँ जिन्हें हमसे मतलब नहीं
उन्हीं अँखियों के हम मतवाले हैं
हां हाँ हाँ हाँ हाँ
उन्हीं अँखियों के हम मतवाले हैं
दिल आने के
हो दिल आने के ढंग निराले हैं

प्यारी सूरत का गर सामना हो गया
हम पे लाखों अदाओं ने हमला किया
बड़ी हिम्मत से क़ाबू में रखा है दिल
बड़ी हिम्मत से क़ाबू में रखा है दिल
बड़ी मुश्क़िल से होश सम्भाले हैं
आ आ आ
बड़ी मुश्क़िल से होश सम्भाले हैं
हा आ आ आ आ
दिल आने के
हो दिल आने के ढंग निराले हैं
………………………………………..
Dil aane ked hang nirale hain-Meri kahani 1948

Artist: Surendra

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Jun 4, 2018

दिल टूट गया जी छूट गया-आग १९४८

फिल्म संगीत क्षेत्र में शुरू से ही बंगाली कलाकारों का
बोलबाला रहा और कई संगीतकार बंगाली मूल के हैं
जिन्होंने हिंदी फिल्मों में संगीत दिया. इनमें से एक
हैं राम गांगुली.

फिल्म आग से एक गीत सुनते हैं बहज़ाद लखनवी का
लिखा हुआ. इसे शमशाद बेगम ने गाया है.



गीत के बोल:

दिल टूट गया जी छूट गया
क़िस्मत ने मिटा कर छोड़ दिया
दिल टूट गया जी छूट गया
क़िस्मत ने मिटा कर छोड़ दिया
आँखों में भी तो आँसू न रहे
मजबूर बना कर छोड़ दिया
आँखों में भी तो आँसू न रहे
मजबूर बना कर छोड़ दिया
दिल टूट गया जी छूट गया

ऐ मेरी उम्मीदों की दुनिया
बदनाम मोहब्बत होती है
ऐ मेरी उम्मीदों की दुनिया
बदनाम मोहब्बत होती है
बदनाम मोहब्बत होती है
क्यों मुझको बनाया था अपना
क्यों अपना बना कर छोड़ दिया
क्यों मुझको बनाया था अपना
क्यों अपना बना कर छोड़ दिया

अरमान तडपते हैं दिल में
दिल है के सुलगता रहता है
अरमान तडपते हैं दिल में
दिल है के सुलगता रहता है
जलने के लिए दुनिया में मुझे
क्यूँ आग लगा कर छोड़ दिया
जलने के लिए दुनिया में मुझे
क्यूँ आग लगा कर छोड़ दिया

तुम फूलो फलो आबाद रहो
आबाद रहो दिलशाद रहो
तुम फूलो फलो आबाद रहो
आबाद रहो दिलशाद रहो
तुमने तो मुझे दुनिया के लिए
अफसाना बना कर छोड़ दिया
तुमने तो मुझे दुनिया के लिए
अफसाना बना कर छोड़ दिया

दिल टूट गया जी छूट गया
क़िस्मत ने मिटा कर छोड़ दिया
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Dil toot gaya ji-Aag 1948

Artist: Nargis, Raj Kapoor

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Apr 7, 2018

इक दिल का लगाना बाक़ी(लता)-अनोखा प्यार १९४८

सन १९४८ की फिल्म अनोखा प्यार से एक उम्दा गीत और
सुनते हैं. गायिका लता मंगेशकर की आवाज़ वाले इस गीत
का मीना कपूर वाला तर्जुमा आप पहले सुन चुके हैं.

जिया सरहदी ने गीत लिखा है और अनिल बिश्वास का संगीत
है. ये एल पी वर्ज़न है जिसे यू ट्यूब पर कद्रदान द्वारा अपलोड
किया गया है.

जैसा कि आप जानते हैं फिल्म अनोखा प्यार दिलीप कुमार,
नलिनी जयवंत और नर्गिस अभिनीत एक फिल्म है जिसका 
निर्देशन एम् आई धरमसे ने किया. फिल्म की कहानी एक
प्रेम त्रिकोण पर आधारित है.




गीत के बोल:

इक दिल का लगाना बाक़ी था
सो दिल भी लगा के देख लिया
तक़दीर का रोना कम न हुआ
आँसू भी बहा के देख लिया
इक दिल का लगाना

इक बार भुलाना चाहा था
सौ बार वो हमको याद आया
इक बार भुलाना चाहा था
सौ बार वो हमको याद आया
इक भूलने वाले को हमने
सौ बार भुला के देख लिया
इक भूलने वाले को हमने
सौ बार भुला के देख लिया

इक दिल का लगाना

अब तक तो समझ में आ न सका
इस दिल की तमन्नाएं क्या हैं
अब तक तो समझ में आ न सका
इस दिल की तमन्नाएं क्या हैं
सौ बार
सौ बार हँसा के देख लिया
सौ बार रुला के देख लिया
सौ बार हँसा के देख लिया
सौ बार रुला के देख लिया

इक दिल का लगाना बाक़ी था
सो दिल भी लगा के देख लिया
इक दिल का लगाना
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Ek dil ka lagana(Lata)-Anokha Pyar 1948

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Feb 18, 2018

इक दिल के टुकड़े हज़ार हुए-प्यार की जीत १९४८

फिल्म प्यार की जीत से रफ़ी का दर्द भरा गीत सुनते हैं. जिसके
पास दिल हो वही बतला सकता है दिल के टुकड़े सौ हुए या हज़ार.
ये तो कविता शेर शायरी वाली बात हो गई. असल में तो बिना दिल
के मतलब बॉडी के पम्पिंग स्टेशन के बिना जीवन की कल्पना ही
नहीं की जा सकती. 

कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा पञ्च लाइन है गीत की. यह गीत
लिखा है कमर जलालाबादी ने और इसकी धुन हुस्नलाल भगतराम
ने बनाई है.




गीत के बोल:

इक दिल के टुकड़े हज़ार हुए
इक दिल के टुकड़े हज़ार हुए
कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा
कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा
बहते हुए आँसू रुक न सके
बहते हुए आँसू रुक न सके
कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा

जीवन के सफ़र में हम जिनको
समझे थे हमारे साथी हैं
जीवन के सफ़र में हम जिनको
समझे थे हमारे साथी हैं
दो क़दम चले फिर बिछड़ गए
दो क़दम चले फिर बिछड़ गए
कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा

आशाओं के तिनके चुन-चुन कर
सपनों का महल बनाया था
आशाओं के तिनके चुन-चुन कर
सपनों का महल बनाया था
तूफ़ान से तिनके बिखर गए
तूफ़ान से तिनके बिखर गए
कोई यहाँ गिरा …
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Ik dil ke tukde hazaar hue-Pyar ki jeet 1948

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Jan 19, 2018

ओ दूर जाने वाले-प्यार की जीत १९४८

फिल्म संगीत का गोल्डन पीरियड भी क्या पीरियड था. एक
से बढ़ कर एक लिखने वाले और एक से बढ़ कर एक धुनें
बनाने वाले. इस युग के गीत सुनने वाले भी गोल्डन किस्म
के हैं, ऐसा मैंने कुछ  लोगों को कहते सुना. इसी बात पर
आपको एक गाना सुनवा देते हैं.

फिल्म प्यार की जीत के लिए कमर जलालाबादी के लिखे गीत
को गाया है सुरैया ने हुस्नलाल भगतराम की धुन पर.



गीत के बोल:

ओ दूर जाने वाले
ओ दूर जाने वाले
वादा न भूल जाना
वादा न भूल जाना
रातें हुई अँधेरी
रातें हुई अँधेरी
तुम चाँद बन के आना
तुम चाँद बन के आना

ओ दूर जाने वाले

अपने हुए पराये
अपने हुए पराये
दुश्मन हुआ ज़माना
अपने हुए पराये
दुश्मन हुआ ज़माना
तुम भी अगर न आए
तुम भी अगर न आए
मेरा कहाँ ठिकाना

ओ दूर जाने वाले
ओ दूर जाने वाले
वादा न भूल जाना
वादा न भूल जाना
ओ दूर जाने वाले

आ जा किसी की आँखें
आ जा किसी की आँखें
रो रो के कह रही हैं
आ जा किसी की आँखें
रो रो के कह रही हैं
ऐसा न हो के हमको
ऐसा न हो के हमको
कर दे जुदा ज़माना

ओ दूर जाने वाले
ओ दूर जाने वाले
वादा न भूल जाना
वादा न भूल जाना
ओ दूर जाने वाले
............................................................................
O door jaane wale-Pyar ki jeet 1948

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Dec 8, 2017

ये ज़िंदगी के मेले-मेला १९४८

सन १९४८ की चर्चित फिल्म मेला से एक माइलस्टोन सोंग सुनते
हैं आज. ये रफ़ी के कैरियर के शुरुआत सालों का एक बड़ा हिट
गीत है.

दिलीप कुमार और नर्गिस अभिनीत मेला का निर्देशन एस यू सनी
ने किया था. उनके निर्देशन वाली ये दूसरी फिल्म थी. इसके पहले
उन्होंने सन १९४७ की फिल्म शांति का निर्देशन किया था. सनी के
निर्देशन वाली बाबुल भी चर्चित फिल्म है जो १९५० में आई थी. 




गीत के बोल:

ये ज़िंदगी के मेले
ये ज़िंदगी के मेले दुनिया में कम न होंगे
अफ़सोस हम न होंगे
ये ज़िंदगी के मेले ये ज़िंदगी के मेले

दुनिया है मौज-ए-दरिया  क़तरे की ज़िंदगी क्या
दुनिया है मौज-ए-दरिया  क़तरे की ज़िंदगी क्या
पानी में मिल के पानी  अंजाम ये के पानी
पानी में मिल के पानी  अंजाम ये के पानी
दम भर को सांस ले ले 
दम भर को सांस ले ले
ये ज़िंदगी के मेले दुनिया में कम न होंगे
अफ़सोस हम न होंगे
ये ज़िंदगी के मेले ये ज़िंदगी के मेले
ये ज़िंदगी के मेले ये ज़िंदगी के मेले

होंगी यही बहारें  उल्फ़त की यादगारें
होंगी यही बहारें  उल्फ़त की यादगारें
बिगड़ेगी और बनेगी दुनिया यही रहेगी
बिगड़ेगी और बनेगी दुनिया यही रहेगी
होंगे यही झमेले 
होंगे यही झमेले
ये ज़िंदगी के मेले दुनिया में कम न होंगे
अफ़सोस हम न होंगे
ये ज़िंदगी के मेले ये ज़िंदगी के मेले
ये ज़िंदगी के मेले ये ज़िंदगी के मेले

इक दिन पड़ेगा जाना  क्या वक़्त  क्या ज़माना
इक दिन पड़ेगा जाना  क्या वक़्त  क्या ज़माना
कोई न साथ देगा  सब कुछ यहीं रहेगा
कोई न साथ देगा  सब कुछ यहीं रहेगा
जायेंगे हम अकेले
जायेंगे हम अकेले
ये ज़िंदगी के मेले दुनिया में कम न होंगे
अफ़सोस हम न होंगे
ये ज़िंदगी के मेले ये ज़िंदगी के मेले
ये ज़िंदगी के मेले ये ज़िंदगी के मेले
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Ye zindagi ke mele-Mela 1948

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