साँसों की ज़रूरत है जैसे-आशिकी १९९०
होता है. जिंदगी की हर चीज़ क्रोनोलोजिकल तरीके से नहीं
समेटी या प्रस्तुत की जा सकती हैं.
आपको आशिकी २ के काफी गीत सुनवा दिए मगर १९९०
की आशिकी के गीत सुनवाना बाकी है. आज सुनते हैं फिल्म
का शीर्षक गीत जो कुमार सानू के अलावा अनुराधा पौडवाल
की आवाज़ में भी उपलब्ध है. हालांकि फिल्म में सानू वाला
वर्ज़न ही दिखाई देता है मगर फिल्म के संगीत संग्रह में
दोनों की आवाजों वाले संस्करण मौजूद हैं. गीत समीर का
है और संगीत नदीम श्रवण का.
गीत के बोल:
साँसों की ज़रूरत है जैसे
साँसों की ज़रूरत है जैसे ज़िंदगी के लिये
बस एक सनम चाहिये आशिक़ी के लिये
जाम की ज़रूरत है जैसे
जाम की ज़रूरत है जैसे बेखुदी के लिये
हाँ एक सनम चाहिये आशिक़ी के लिये
बस एक सनम चाहिये आशिक़ी के लिये
वक़्त के हाथों में सबकी तक़दीरें हैं
वक़्त के हाथों में सबकी तक़दीरें हैं
आईना झूठा है सच्ची तसवीरें हैं
जहाँ दर्द है वहीं गीत है
जहाँ प्यास है वहीं मीत है
कोई ना जाने मगर जीने की यही रीत है
साज़ की ज़रूरत है जैसे
साज़ की ज़रूरत है जैसे मौसिक़ी के लिये
बस एक सनम चाहिये आशिक़ी के लिये
हो हो हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो हो हो
मंज़िलें हासिल हैं फिर भी एक दूरी है
बिना हमराही के ज़िंदगी अधूरी है
मिलेगी कहीं कोई रहगुज़र
तन्हा कटेगा कैसे ये सफ़र
मेरे सपने हो जहाँ
ढून्ढूँ मैं ऐसी नज़र
चांद की ज़रूरत है जैसे
चांद की ज़रूरत है जैसे चांदनी के लिये
बस एक सनम चाहिये आशिक़ी के लिये
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Saanson ki zaroorat hai-Aashiqui 1990

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