चल चमेली बाग में-ख़ामोशी १९४१
चल चमेली बाग में मेवा खिलाऊंगा. चमेली बाग में
काफी पहले सन १९४१ में भी जा चुकी है. गई या नहीं
मालूम नहीं मगर गीत में निवेदन ज़रूर किया जा रहा
है. ८० के दशक का नायक रईस है और गीत की पहली
ही पंक्ति में मेवा खिलने लगा है मगर श्वेत श्याम युग
का नायक स्टेप बाय स्टेप चलता है और झूला झुलाने
के बाद मेवे खिलवा रहा है.
गीत अपने ज़माने के मशहूर हास्य और चरित्र अभिनेता
सुन्दर ने गाया है. रेयर ट्रीट है ये गीत. गीत का संगीत
तैयार किया है जी ए चिश्ती ने.
गीत के बोल:
हे झूला डाले डाल पर
तोड़ें जा कर आम
चलो चमेली बाग में
कहे दयालु राम
कहे दयालु राम
चल चल चल चल
चल चल चमेली बाग में
झूला झुलायेंगे
चल चल चमेली बाग में
झूला झुलायेंगे
झूले की रस्सी टूट गयी
फिर मेवा खिलाएंगे
मेवे की डाली टूट गयी
माझी बुलाएँगे
मेवे की डाली टूट गयी
माझी बुलाएँगे
माझी बेचारा ना मिल तो
घोडा दौड़ाएंगे
घोड़े को जोर जोर से
चाबुक लगाएंगे
घोड़े को जोर जोर से
चाबुक लगाएंगे
चाबुक की छड़ी टूट गयी
बन्दर नचाएंगे
चाबुक की छड़ी टूट गयी
बन्दर नचाएंगे
धुर्र धुर्र तप तप तप तप तप
धुर्र धुर्र तप तप तप तप तप
बन्दर को लेकर बाग में
रिक्शा चलाएंगे
बन्दर को लेकर बाग में
रिक्शा चलाएंगे
कहे दयालु सुनो रे भैया
चलो हमारे संग
ओ भैया चलो हमारे संग
कहे दयालु सुनो रे भैया
चलो हमारे संग
रे भैया चलो हमारे संग
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Chal chameli bag mein-Khamoshi 1942
Artist: Sunder

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