जाने कैसा है मेरा दीवाना-आंसू बन गए फूल १९६९
एक मधुर गीत हमने आपको पहले सुनवाया(कॉपी पेस्ट के लिए
उपलब्ध करवाया) था.
प्रस्तुत गीत अलका और देब मुखर्जी पर फिल्माया गया है. इसे
लिखा है गोविन्द मुनीस ने और इसकी तर्ज़ लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल
ने बनाई है. ये है हरियाली और खुशहाली हिट, इसमें इतनी ग्रीनरी
जो है.
कई ब्लॉग पर पोस्ट इसी बात से भरी रहती है कि ब्लॉगर ने कितना
छींका, कितनी वायु निकाली, कितना ऊंघा और कितनी जम्हाई ली. ऐसे
आंकड़ों के लिए हमारे पास तो समय बिलकुल नहीं है और ना ही ये
सब हमारी प्राथमिकता में है. वैसे ज़माना इन्हीं सब बातों का आता जा
रहा है.
गीत के बोल:
जाने कैसा है मेरा दीवाना
कभी अपना सा लगे कभी बेगाना
जाने कैसा है मेरा दीवाना
कभी अपना सा लगे कभी बेगाना
बड़ी भोली हो ये भी न जाना
कभी अपनों को नहीं कहते बेगाना
यूँ भी जीता था मगर कोई अरमान न थे
यूँ भी जीता था मगर कोई अरमान न थे
जब तलक आप मेरे दिल के मेहमान न थे
दिल के मेहमान न थे
तुमसे महका है मेरा वीराना
कभी अपनों को नहीं कहते बैंगाणा
जाने कैसा है मेरा दीवाना
कभी अपना सा लगे कभी बेगाना
जाने कैसा है
मैं वो आज़ाद घटा तुमने जिसे बाँध लिया
मैं वो आज़ाद घटा तुमने जिसे बाँध लिया
अपनी आँखों में मुझे नया आकाश दिया
नया आकाश दिया
यही छोटा सा मेरा अफ़साना
कभी अपना सा लगे कभी बेगाना
बड़ी भोली हो ये भी न जाना
कभी अपनों को नहीं कहते बेगाना
बड़ी भोली हो
कभी छेड़े है पवन कभी छेड़े हैं पिया
कभी छेड़े है पवन कभी छेड़े हैं पिया
यही तो होगा सनम तुमने जब प्यार किया
तुमने जब प्यार किया
मेरे पास आओ छोड़ो शरमाना
कभी अपनों को नहीं कहते बेगाना
जाने कैसा है मेरा दीवाना
कभी अपना सा लगे कभी बेगाना
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Jaane kaisa hai mera deewana-Ansso ban gaye phool 1969
Artists: Deb Mukherji, Alka

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