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Jul 15, 2020

बेदर्द ज़माने क्या तेरी-लाहौर १९४९

विंटेज युग की तरफ एक बार चलते हैं और एक गाना सुनते
हैं फिल्म लाहौर से. राजेंद्र कृष्ण की रचना है और इस गीत
की धुन श्याम सुन्दर ने तैयार की. आज के हिसाब से लगाएं
तो इस फिल्म को रिलीज़ हुए ७१ साल बीत गए.

करण दीवान, नर्गिस और कुलदीप कौर अभिनीत इस फिल्म
का निर्देशन एम एल आनंद ने किया था और निर्माण अभिनेता
करण दीवान के भाई ने किया. एम् एल आनंद ने सन १९५२
की फिल्म बेवफा का निर्देशन भी किया था. इसमें भी अभिनेत्री
नर्गिस मौजूद हैं.

कल हमने गानों के मीटर पर बात की थी. प्रस्तुत गाने का
मीटर भी कभी एमीटर तो कभी वोल्टमीटर हो जाता है. बाकी
समय ये फ्रीक्वेंसी मीटर की तरह चलता रहता है.

संगीतकार श्याम सुन्दर इसी दिन एक फिल्म के गीत की
रिकॉर्डिंग करते करते स्टूडियो में चल बसे थे. बॉलीवुड की कई
प्रतिभाओं को सुरा-प्रेम ने छीन लिया. संगीतकार श्याम सुन्दर
भी उन्हीं में से एक थे





गीत के बोल:

उस दिल की क़िस्मत क्या कहिये
उस दिल की क़िस्मत क्या कहिये
जिस दिल का सहारा कोई नहीं

बेदर्द ज़माने क्या तेरी
बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने

इस ग़म की रात के आँचल में वैसे तो हज़ारों तारे हैं
वैसे तो हज़ारों तारे हैं
वैसे तो हज़ारों तारे हैं
बन जाये जो आस मुसाफ़िर की
बन जाये जो आस मुसाफ़िर की ऐसा ही सितारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने

उल्फ़त के चमन में ए नादां
उल्फ़त के चमन में ए नादां क्यूँ ढूँढ रहा है कलियों को
यहाँ ग़म के काँटे चुभते हैं
यहाँ ग़म के काँटे चुभते हैं फूलों का नज़ारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने
…………………………………………
Bedard zamane kya teri-Lahore 1949

Artist:

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Jul 18, 2019

हम अपने दिल का फ़साना-एक्ट्रेस १९४८

सिलसिला कैसे शुरू होता है, एक गीत सुनो इसके बाद कड़ियाँ
दालें, सब्जियां अपने आप जुड़ती चली जाती हैं. एक गाना सुनो
उसमें से दूसरे गाने का भूत निकल आता है.

बहाना कभी गीतकार का होता है तो कभी संगीतकार का. किसी
गीत के भाव से लिंक मिल जाती है तो कभी किसी शब्द विशेष
से. अब देखिये हमने एक गीत सुना फिल्म शहनाई का जो रेहाना
पर फिल्माया गया था. रेहाना से फिल्म एक्ट्रेस याद आई और
याद आ गया रफ़ी का गाया क्लासिक दर्द भरा गीत.

लगे हाथ सुन भी लेते हैं इसे. नक्शब के बोल हैं और इसकी
धुन तैयार की है श्याम सुन्दर ने. फिल्म के हीरो हैं प्रेम अदीब.




गीत के बोल:

हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके
लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके

तेरी तलाश में दर-दर की
ठोकरें खाईं
तेरी तलाश में दर-दर की
ठोकरें खाईं
मेरी वफ़ा के क़दम फिर भी
डगमगा न सके

लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके

ज़रा तो सोच के उस दिल का
हाल क्या होगा
हाल क्या होगा
ज़रा तो सोच के उस दिल का
हाल क्या होगा
हाल क्या होगा
जो दूर रह न सके
तेरे पास आ न सके

लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके

हम उनको याद न करते
पर इसको( दिल) क्या कीजे
हम उनको याद न करते
पर इसको( दिल) क्या कीजे
हज़ार भूलना चाहा
मगर भुला न सके

लगी है आग जो
लगी है आग जो दिल में
उसे बुझा ना सके
हम अपने दिल का फ़साना
उन्हें सुना ना सके
...........................................................................
Ham apne dil ka fasana-Actress 1948

Artist: Prem Adeeb, Rehana

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Apr 6, 2018

आ जा बिछड़े हुए साजन-नई कहानी १९४३

आपको १९४३ की फिल्म नई कहानी से एक गाना सुनवाया था
कुछ साल पहले. अब दूसरा सुनते हैं. इतने गीत हैं और इतनी
फ़िल्में कि याद रख पाना मुश्किल होता है कौन सा गीत पोस्ट
हुआ और कौनसा रह गया. वो तो आज संगीतकार श्याम सुन्दर
वाले गीतों की लिस्ट देखी तो मालूम हुआ कि ये बचा हुआ है.

वली साहब के बोल हैं और इसे जी एम दुर्रानी ने गाया है. रफ़ी
के फिल्म संगीत क्षेत्र में पदार्पण के पूर्व जी एम दुर्रानी काफी
लोकप्रिय हुआ करते थे. रफ़ी और लता के संगीत क्षेत्र में आने
के बाद फिल्म संगीत के सारे समीकरण ही बदल गए.




गीत के बोल:

आ जा आ जा आ जा
आ आ आ आ जा
आ जा आ जा आ जा
आ आ आ आ जा
बिछड़े हुए साजन
बिछड़े हुए साजन जिस देस गया है
जिस देस गया है
उस देस का रस्ता सपने में दिखा जा
आ जा आ जा आ जा
आ आ आ आ जा

बिरहा ने कलेजा यूँ कर दिया छलनी
बिरहा ने कलेजा यूँ कर दिया छलनी
जैसे कोई बन्सी
जैसे कोई बन्सी जंगल में पड़ी हो
आहों से भरी हो
होंठों से लगा के
होंठों से लगा के आहों में समा के
तू गीत बना जा
आ जा आ जा आ जा
आ आ आ आ जा

हो नैन में ऐसे
हो नैन में ऐसे ज्यूँ सीप में मोती
और प्राण में ऐसे ज्यूँ दीप में ज्योति
और प्राण में ऐसे ज्यूँ दीप में ज्योति
सोता हुआ दीपक पल भर को जगा जा
आ जा खा जा आ जा
आ आ आ आ जा
………………………………………………
Aa ja bichhde hue sathi-Nai Kahani 1943

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Jul 18, 2017

एक बेवफ़ा की याद ने-चार दिन १९४९

४० के दशक का एक गीत सुनते हैं. जब कभी हम आपको
३० या ४० साल के अंतराल वाले गीत एक के बाद एक सुनवाते
हैं तब दलेर मेहँदी का गाया वो गीत याद आ जाता है-जोर का
झटका हाय जोरों से लगा. किया क्या जाए म्मागर, जो सीक्वेंस
दिमाग में आती है उसी अनुसार आपको गाने सुनवा देते हैं.

ये है फिल्म चार दिन का गीत सुरैया का गाया हुआ. इस गीत
के बोल शकील बदायूनीं के हैं और संगीत श्याम सुन्दर का.





गीत के बोल:

एक बेवफ़ा की याद ने तड़पा के मार डाला
हाय तड़पा के मार डाला
एक बेवफ़ा की याद ने तड़पा के मार डाला
हाय तड़पा के मार डाला
एक बेवफ़ा की याद ने

पैमाना ज़िन्दगी का मेरी ग़म से भर दिया
पैमाना ज़िन्दगी का मेरी ग़म से भर दिया
ऐ दिल तेरा बुरा हो ये क्या तूने कर दिया
मुझको मेरे नसीब से टकरा के मार डाला
हाय तड़पा के मार डाला

एक बेवफ़ा की याद ने तड़पा के मार डाला
हाय तड़पा के मार डाला
एक बेवफ़ा की याद ने

बदनाम हाय मुफ़्त में किस्मत का नाम था
बदनाम हाय मुफ़्त में किस्मत का नाम था
जो कुछ किया है तुमने तुम्हारा ही काम था
पहले तो आये सामने फिर जा के मार डाला
हाय तड़पा के मार डाला

एक बेवफ़ा की याद ने तड़पा के मार डाला
हाय तड़पा के मार डाला
एक बेवफ़ा की याद ने

सोचा था घर बसायेंगे अपना ख़ुशी-ख़ुशी
सुख-चैन से बितायेंगे दो दिन की ज़िन्दगी
हमको इसी ख़याल ने बहका के मार डाला
हाय तड़पा के मार डाला

एक बेवफ़ा की याद ने तड़पा के मार डाला
हाय तड़पा के मार डाला
एक बेवफ़ा की याद ने
...............................................................
Ek bewafa ki yaad ne-Char din 1949

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May 14, 2017

ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना-बाजार १९४९

पुराने ज़माने से एक लता और रफ़ी का गाया युगल गीत सुनते
हैं. फिल्म बाजार के लिए इस गीत को लिखा कमर जलालाबादी
ने और धुन तैयार की श्याम सुन्दर ने.

श्याम सुन्दर के संगीत वाली ये एक लोकप्रिय फिल्म है जिसके
अधिकाँश गीत उस समय लोकप्रिय थे. 



गीत के बोल:

ऐ मुहब्बत उनसे मिलने
ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया
तुमने देखा  हमने देखा 
तुमने देखा  हमने देखा  इक फ़साना बन गया
ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया

आपकी मीठी नज़र के तीर कैसे तीर हैं
आपकी मीठी नज़र के तीर कैसे तीर हैं
तीर चलने भी न पाये 
तीर चलने भी न पाये  दिल निशाना बन गया
ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया

दिल ने पहली ही नज़र में कर लिया कुछ ऐतमाद
दिल ने पहली ही नज़र में कर लिया कुछ ऐतमाद
साज़ छेड़ा भी नहीं और
साज़ छेड़ा भी नहीं और एक तराना बन गया
ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया

नज़रें मिलने भी न पाईं  तुम नज़र में आ बसे
नज़रें मिलने भी न पाईं  तुम नज़र में आ बसे
तिनके ढूँढे भी नहीं और
तिनके ढूँढे भी नहीं और आशियाना बन गया
ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया
………………………………………………………………….
Ae mohabbat unse milne ka bahana-Bazaar  1949

Artists: Shyam, Nigar Sultana

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May 9, 2017

छल्ला दे जा निशानी-बाजार १९४९

फिल्म छल्ले कई प्रकार के होते हैं-एक तो जिसे रिंग कहते
हैं, धातु की बनी हुई, दूसरे बालों में बनने वाले छल्ले, सिगरेट
के धुंए से बनने वाले छल्ले और ऐसे कथानक जो दर्शकों के
दिमाग में छल्ले बना दें.

प्रस्तुत है सन १९४९ की फिल्म बाजार से छल्ला सोंग. इसे
कमर जलालाबादी ने लिखा है और शमशाद बेगम, रफ़ी और
सतीश बत्रा ने गाया है. श्याम सुन्दर का संगीत है. गीत में
श्याम, गोप और मंगला नाम के कलाकार दिखलाई देंगे. हैं
तो और भी मगर ना कैमरा उन्हें ढंग से दिखा रहा है और
ना ही हमें जानने में दिलचस्पी है कि बाकी के कौन कौन हैं.
गोप ने हारमोनियम पकड़ रखा है.



गीत के बोल:

छल्ला दे जा
ओय छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
छल्ला दे जा निशानी छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
छल्ला दे जा
ओय छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी

शमशाद:
ना माँगूँ टमटम बाबू ना माँगूँ मोटर कार
ना माँगूँ टमटम बाबू ना माँगूँ मोटर कार
एक निशानी प्यार की माँगूँ
एक निशानी प्यार की माँगूँ मिल जाए सरकार
मिल जाए सरकार
रुत मस्तानी मस्तानी ओ दिलबर जानी
छल्ला दे जा
ओय छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
छल्ला दे जा निशानी छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
छल्ला दे जा
ओय छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी

छल्ले की क्या बात है रानी माँगो दिल और जान
छल्ले की क्या बात है रानी माँगो दिल और जान
दिल और जान भी क्या है कर
दिल और जान भी क्या है कर दूँ कुल दुनिया क़ुर्बान
मेरी ले ले निशानी ओ दिलबर जानी

छल्ला दे जा
ओय छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
छल्ला दे जा निशानी छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
छल्ला दे जा
ओय छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी

ये सौदागर प्रेमनगर का हुस्न की तू सरकार
ये सौदागर प्रेमनगर का हुस्न की तू सरकार
तेरी एक नज़र की क़ीमत
तेरी एक नज़र की क़ीमत सौदागर का प्यार
सौदागर का प्यार
इसकी सुन ले कहानी

ओ दिलबर जानी
छल्ला दे जा
ओय छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
छल्ला दे जा निशानी छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
छल्ला दे जा
ओय छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी

आये आकर चले गए सब मजनूँ और फ़रहाद
आये आकर चले गए सब मजनूँ और फ़रहाद
वो सब थे शागिर्द हमारे
वो सब थे शागिर्द हमारे हम उनके उस्ताद
हम उनके उस्ताद
भूल न जाना हमको रानी ओ दिलबर जानी

छल्ला दे जा
ओय छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
छल्ला दे जा निशानी छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
छल्ला दे जा
ओय छल्ला दे जा निशानी तेरी मेहरबानी
.............................................................................
Chhalla de ja nishani-Bazaar 1949

Artists: Shyam, Gope, Mangla

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Dec 17, 2016

मिटा सके तो मिटा ले-कमल के फूल १९५०

आशावादी गीत आदमी का हौसला बनाये रखते हैं, इनकी क्या
अहमियत है जीवन में ये किसी निराशा के दौर से गुज़रे व्यक्रि
से पूछिए. ५० के दशक की शुरुआत से एक गीत सुनते हैं. फिल्म
का नाम है लोटस फ्लोवर्स अर्थात कमल के फूल. गीत लिखा है
हरफनमौला गीतकार राजेंद्र कृष्ण ने और संगीत तैयार किया है
प्रतिभाशाली संगीतकार श्याम सुन्दर ने.

फेमस पिक्चर्स के लिए फिल्म का निर्देशन डी डी कश्यप ने किया
था. इसके प्रमुख कलाकार हैं बद्री प्रसाद, सुरैया, जीवन, लीला मिश्रा,
राज मेंहरा, निरंजन शर्मा, शकुंतला और अमरनाथ.

सुरैया अपने ज़माने की सबसे ज्यादा पसदं की जाने वाली अभिनेत्रियों
में से एक हैं. गायक सुपरस्टार शायद सहगल के बाद वे ही कहलाती
हैं. प्रस्तुत गीत उन्हीं का गाया हुआ है.

बहुत दिनों बाद सूची पर नज़र डाली तो पाया हमने केवल नीलकमल
को शामिल किया है अभी तक ब्लॉग पर. दूसरा किसी भी तरह का
कोई कमल मौजूद नहीं है. ३-४ तरह के कमल मौजूद हैं हिंदी फिल्म
जगत में. आपको धीरे धीरे सबसे मिलवाते हैं.



गीत के बोल:

इधर ग़रीब का दिल है उधर ज़माना है
ये देखना है के किसने किसे मिटाना है

मिटा सके तो मिटा ले दुनिया
मिटा सके तो मिटा ले दुनिया बनाने वाला बना ही देगा
रुला सके तो रुला दे दुनिया हँसाने वाला हंसा ही देगा

मिटा सके तो मिटा ले दुनिया बनाने वाला बना ही देगा

बड़ी ख़ुशी से क़दम-क़दम पर बिछा ले काँटे अरे ज़माने
बड़ी ख़ुशी से क़दम-क़दम पर बिछा ले काँटे अरे ज़माने
गिरा सके तो गिरा ले हमको उठाने वाला उठा ही देगा
गिरा सके तो गिरा ले हमको उठाने वाला उठा ही देगा

मिटा सके तो मिटा ले दुनिया बनाने वाला बना ही देगा

उधर ज़माने की तेज़ आँधी इधर मेरी ज़िंदगी का दीपक
उधर ज़माने की तेज़ आँधी इधर मेरी ज़िंदगी का दीपक
बुझा सके तो बुझा ले दुनिया जलाने वाला जला ही देगा
बुझा सके तो बुझा ले दुनिया जलाने वाला जला ही देगा

मिटा सके तो मिटा ले दुनिया बनाने वाला बना ही देगा
रुला सके तो रुला दे दुनिया हँसाने वाला हंसा ही देगा
……………………………………………………………..
Idhar gareeb ka dil hai-Kamal ke phool 1950

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Sep 19, 2016

मौसम आया है रंगीन-ढोलक १९५१

मौसम और सुहाने मौसम पर गीत सुने काफी दिन हो गए हैं हमें.
आज सुनते हैं सन १९५१ की फिल्म ढोलक से एक गीत जिसे गाया
है सुलोचना कदम और सतीश बत्रा ने. अज़ीज़ कश्मीरी के लिखे बोल
हैं और श्याम सुन्दर का संगीत.

ढोलक फिल्म के इस गीत में ढोलक का सुन्दर प्रयोग है. विलायती
और पंजाबी दोनों प्रभावों के संगम वाला ये गीत अनूठा है और इसे
बार बार सुनने को मन करता है.





गीत के बोल:

मौसम आया है रंगीन
बजी है कहीं सुरीली बीन
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ
मौसम आया है रंगीन
बजी है कहीं सुरीली बीन
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ
मौसम आया है रंगीन
बजी है कहीं सुरीली बीन
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ

फूल खिले कलियाँ शरमाईं
रुत मस्ती की आ गई
रुत आ गई
रुत आ गई
नीले-नीले अम्बर पर
बिन पूछे बदली छा गई
हो छा गई
हो छा गई
खिला है ख़ुशियों का बाज़ार
करेंगे नैनों का व्योपार
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ

मौसम आया है रंगीन
बजी है कहीं सुरीली बीन
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ

झूम रही है डाली-डाली
झूम रहा मन मेरा रे
मन मेरा रे
मन मेरा रे
दो नैननों से ओझल
उस का नैनों बीच बसेरा रे
बसेरा रे
बसेरा रे

करेंगे चाहत का इकरार
किसी की जीत किसी की हार
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ
मौसम आया है रंगीन
बजी है कहीं सुरीली बीन
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ
.........................................................................
Mausam aaya hai rangeen-Dholak 1951

Artists:Meena Shorey, Ajit

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Aug 10, 2016

बसा लो अपनी निगाहों में– बाज़ार १९४९

संगीतकार बहुत से हुए हैं फिल्म संगीत जगत में मगर नैसर्गिक
प्रतिभा वाले या यूँ कहें विशिष्ट स्थान रखने वाले गिनती के हैं.
श्याम सुन्दर एक बेहद प्रतिभाशाली संगीतकार थे. उनकी धुनों
में आपको कुछ अलग सा महसूस होगा. हिंदी गीत हों या पंजाबी
उन्होंने अपनी धाक जमाई.

आज आपको श्याम सुन्दर के संगीत से सजा लता मंगेशकर का
गाया एक लोकप्रिय गीत सुनवाते हैं. इस गीत को परदे पर निगार
सुल्ताना पर फिल्माया गया है. कमर जलालाबादी ने इसे लिखा
है और ये उनके लिखे और सर्वाधिक लोकप्रिय हुए गीतों में से
एक है.गीत में आपको दर्शक दीर्घ में श्याम और गोप बैठे दिखाई
देंगे.




गीत के बोल:

बसा लो अपनी निगाहों में प्यार थोडा सा
दिखा दो जलवा हमें एक बार
हमें एक बार थोडा सा
बसा लो अपनी निगाहों में प्यार थोडा सा

कहा जो मैंने के हमसे
मिलेंगे कब सरकार
कहा जो मैंने के हमसे
मिलेंगे कब सरकार
तो हंस के बोले
तो हंस के बोले अभी इंतज़ार
अभी इंतज़ार थोडा सा
दिखा दो जलवा हमें एक बार
हमें एक बार थोडा सा

खुशी से भर दिया
दामन रकीब का तुमने
खुशी से भर दिया
दामन रकीब का तुमने
हुजूर मेरे लिए
हुजूर मेरे लिए
हुजूर मेरे लिए  भी करार थोडा सा
दिखा दो जलवा हमें एक बार
हमें एक बार थोडा सा
दिखा दो जलवा हमें एक बार

मरीज-ए-इश्क हमें तो बना दिया तुमने
मरीज-ए-इश्क हमें तो बना दिया तुमने
चढ़े तुझे भी
चढ़े तुझे भी किसी दिन बुखार
किसी दिन बुखार थोडा सा
दिखा दो जलवा हमें एक बार
हमें एक बार थोडा सा
बसा लो अपनी निगाहों में प्यार थोडा सा
……………………………………………………………
Basa lo apni nigahon mein-Bazar 1949

Artist: Nigar Sultana, Shyam, Gope

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Jul 18, 2016

बहारें फिर भी आएँगी-लाहौर १९४९

सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया हुआ फिल्म लाहौर का
सबसे लोकप्रिय गीत. आपको बीच बीच में हम लोकप्रिय
गीत भी सुनवाते रहते हैं. केवल लोकप्रिय गीत ही सुनवा
दें तो कई छुपे रत्न, नायाब मोती और अचार, जैम वगैरह
अनसुने रह जाते हैं.

प्रस्तुत गीत भी पिछले गीत की तरह राजेंद्र कृष्ण ने लिखा
है और संगीतकार भी वही हैं-श्याम सुन्दर. अभिनेत्री नर्गिस
पर फिल्माए गए लता के गीत कुछ विशेष हैं. लगभग सारे
संगीत निर्देशकों ने ऐसे कोम्बिनेशन वाले गीत बेहतर बनाये.

प्रस्तुत गीत में एक अन्तरा दो बार गाया जा रहा है इसकी
वजह आपको मालूम हो तो बतलायें.




गीत के बोल:

नज़र से दूर जानेवाले दिल से दूर न करना
मेरी आँखों को रोने पर कहीं मजबूर न करना

बहारें फिर भी आयेंगी मगर हम तुम जुदा होंगे
घटाएं फिर भी चायेंगी मगर हम तुम जुदा होंगे
बहारें

जहाँ छुप छुप के हम मिलते
जहाँ छुप छुप के हम मिलते थे साजन
वो गली हमको इशारों से बुलायेगी
मगर हम तुम जुदा होंगे
बहारें फिर भी आयेंगी मगर हम तुम जुदा होंगे
बहारें

सन्देसा प्यार का लायेंगी सावन की जवाँ रातें
पवन झूमेगी गायेगी मगर हम तुम जुदा होंगे
बहारें फिर भी आयेंगी मगर हम तुम जुदा होंगे
बहारें

जहाँ छुप छुप के हम मिलते थे साजन
वो गली हमको इशारों से बुलायेगी
मगर हम तुम जुदा होंगे

बहारें फिर भी आयेंगी मगर हम तुम जुदा होंगे
बहारें
................................................................................
Baharen phir bhi aayengi-Lahore 1949

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Jul 17, 2016

बेदर्द ज़माने क्या तेरी-लाहौर १९४९

आज एक गीत सुनते हैं श्याम सुन्दर के संगीत निर्देशन में
बना हुआ. गीत है फिल्म लाहौर से जिसे राजेंद्र कृष्ण ने लिखा
और परदे पर नर्गिस पर फिल्माया गया.

फिल्म लाहौर के दो गीत बेहद प्रसिद्ध हैं-बहारें फिर भी आएँगी
और दुनिया हमारे प्यार की. फिल्म लाहौर का निर्देशन किया
था एम् एल आनंद ने

१९४७ का विभाजन और उसके बाद की त्रासदियों पर आधारित है
फिल्म का कथानक. विभाजन पर बनी पहले पहल फिल्मों में से
शायद ये एक है. फिल्म में करण दीवान, नर्गिस. ओमप्रकाश,
बालकराम, राम अवतार और प्रतिमा देवी प्रमुख कलाकार हैं.



गीत के बोल:

उस दिल की क़िस्मत क्या कहिये
उस दिल की क़िस्मत क्या कहिये
जिस दिल का सहारा कोई नहीं

बेदर्द ज़माने क्या तेरी
बेदर्द ज़माने क्या तेरी
महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने क्या तेरी
महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने

इस ग़म की रात के आँचल में
वैसे तो हज़ारों तारे हैं
वैसे तो हज़ारों तारे हैं
वैसे तो हज़ारों तारे हैं
बन जाये जो आस मुसाफ़िर की
बन जाये जो आस मुसाफ़िर की
ऐसा ही सितारा कोई नहीं

बेदर्द ज़माने क्या तेरी
महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने

उल्फ़त के चमन में ए नादां
उल्फ़त के चमन में ए नादां
क्यूँ ढूँढ रहा है कलियों को
यहाँ ग़म के काँटे चुभते हैं
यहाँ ग़म के काँटे उठते हैं
फूलों का नज़ारा कोई नहीं

बेदर्द ज़माने क्या तेरी
महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने
....................................................................................
Bedard zamane kya teri-Lahore 1949

Artist: Nargis

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Jul 24, 2011

बैठी हूँ तेरी याद का ले कर के सहारा-विलेज गर्ल १९४५

आपको फिल्म विलेज गर्ल के दो गीत सुनवाए थे पहले, आशा है
पसंद आये होंगे. अब सुनते हैं तीसरा गीत. ये भी नूरजहाँ की मधुर
और बुलंद आवाज़ में है. नायिका इतनी बेचैन है कि सीढ़ी चढ कर
घास फूस के बने मचान के ऊपर बैठ गयी है और गा रही है-बैठी हूँ
तेरी याद का लेकर सहारा.



गीत के बोल:


बैठी हूँ तेरी याद का ले कर के सहारा
आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा

दिन रात जला करती हूँ फ़ुरकत में तुम्हारी
हर साँस धुआँ बनके निकलता है हमारा

आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा

चुप चाप सहे जाती हूँ मैं दर्द की चोटें
ले ले के जिये जाती हूँ मैं नाम तुम्हारा

आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा

अक्सर मेरी आँखों ने तुझे नींद में ढूँडा
उठ उठ के तुझे दिल ने कई बार पुकारा

आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा
........................................
Baithi hoon teri yaad ka-Village girl 1945

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Jul 19, 2011

ये कौन हँसा किसने सितारों को-विलेज गर्ल १९४५

मैडम नूरजहाँ (जी हैं जैसे कि नूरजहाँ की आवाज़ के दीवाने उनको
पुकारते हैं), की आवाज़ में अगला गीत सुनिए फिल्म विलेज गर्ल से.
बोल एक बार फीस वाली साहब के हैं और संगीत श्याम सुन्दर का.

मैडम का संबोधन आपने और किसी गायिका के लिए नहीं सुना होगा.
कितनी मैडमें आयीं और गयीं मगर हिंदी उर्दू सिनेमा संगीत के इतिहास
में केवल एक ही मैडम हैं-वो हैं नूरजहाँ.

ये फिल्म अविभाजित भारत के फिल्म जगत बम्बई में बनायीं गयी थी.
विभाजन के बाद कई फ़िल्मी हस्तियाँ दूसरे देश में चली गयीं उनमें एक
नूरजहाँ भी हैं.





गीत के बोल:

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया
ये कौन

रहता है मेरी आँखों में आशाओं का मेला
रहता है मेरी आँखों में आशाओं का मेला
सपनों में हुआ करता है बालम से झमेला, होय
सपनों में हुआ करता है बालम से झमेला
नैनों की मधुर बीना पे
नैनों की मधुर बीना पे क्या राग सुनाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया
ये कौन

भाती नहीं है अब मुझे सावन की जवानी
भाती नहीं है अब मुझे सावन की जवानी
होंठों पे सदा रहती है साजन की कहानी, होय
होंठों पे सदा रहती है साजन की कहानी
इस प्रेम मिलन ने
इस प्रेम मिलन ने मुझे दीवाना बनाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया
ये कौन
........................................
Ye kaun hansa-Village Girl 1945

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Jul 11, 2011

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे-नई कहानी १९४३

गायक - जी एम् दुर्रानी
गीतकार-वली साहब
संगीतकार -श्याम सुन्दर
फिल्म -नई कहानी
वर्ष-१९४३




गीत के बोल:

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे
नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे
लहरों की
लहरों की गोदी में जैसे
आँख मिचौली खेले तारे
आँख मिचौली खेले तारे

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे

मन दोनों के खिल जाने दो
इक दूजे से मिल जाने दो
मन दोनों के खिल जाने दो
इक दूजे से मिल जाने दो
देखते हैं बेचैन बेचारे
नैन तुम्हारे नीर हमारे

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे

नर्गिस को शरमाते हैं वो
जल में आग लगाते हैं ये
नर्गिस को शरमाते हैं वो
जल में आग लगाते हैं ये
दोनों हैं बदनाम बेचारे
ज़ख़्म हमारे तीर तुम्हारे

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे
.................................
Neend hamari khwab tumhare-Nai Kahani 1943

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Jun 2, 2011

किस तरह भूलेगा दिल-विलेज गर्ल १९४५

आपको फिल्म विलेज गर्ल का एक गीत सुनवाया था ४-५ दिन पहले।
अब दूसरा गीत सुनिए जो खासा लोकप्रिय हुआ। नूरजहाँ की दिलकश
आवाज़ और मोहक अदाओं भरा ये गीत सदा जवान गीतों की श्रेणी
में आता है। प्यार समर्पण और इबादत का दूसरा नाम है, गीत की
अंतिम पंक्तियाँ इसी बात को समर्थन देती प्रतीत होती हैं। दिल तोड़ने
वाले के लिए दुआएं निकल रही हैं।





गीत के बोल:

किस तरह भूलेगा दिल
उनका ख़याल आया हुआ
जा नहीं सकता अभी
शीशे में बाल आया हुआ

ओ घटा काली घटा, अब के बरस तू ना बरस
ओ घटा काली घटा, अब के बरस तू ना बरस
मेरे प्रीतम को अभी परदेस है भाया हुआ

किस तरह भूलेगा दिल उनका ख़याल आया हुआ

आ चमन से, हे ऐ ऐ ऐ
आ चमन से दूर बुलबुल
जाके रोयें, रोयें साथ साथ
तेरा दिल भी चोट है मेरी तरह खाया हुआ
तेरा दिल भी चोट है मेरी तरह खाया हुआ

किस तरह भूलेगा दिल उनका ख़याल आया हुआ

ख़ुश रहे दुनिया में वो जिसने है तोड़ा दिल मेरा
दे रहा है ये दुआ आँखों में अश्क आया हुआ

किस तरह भूलेगा दिल उनका ख़याल आया हुआ
..................................
Kis tarah bhoolega dil-Village girl 1945

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May 22, 2011

सैयां सलोने से नैन मिला के-विलेज गर्ल १९४५

जोर का झटका धीरे से। आपको सन १९५० के भी पीछे लिए
चलते हैं। आज आपको विलेज गर्ल अर्थात 'गाँव की गोरी' फिल्म
का गीत सुनवाते हैं। वली साहब के गीत की धुन तैयार की
है संगीतकार श्याम सुन्दर ने। गाने और वाद्य संयोजन में
पंजाबियत बरकरार है। श्याम सुन्दर पंजाबी मूल के संगीतकार
थे। शेम सुन्दर ने कम फिल्मों में संगीत दिया मगर वे अपनी
अलग छाप छोड़ गये फिल्म जगत पर। गाना मेहँदी और लीपापोती
की रस्म के बाद गियर बदलता है और एक मस्त गीत सुनाई देने
लगता है। जिस कलाकार को मेहँदी लगायी जा रही है उसका नाम
है नूरजहाँ जिनके कई गीत आपने सुने होंगे। नजीर नाम के शख्स
दूल्हा बने हैं और घोड़ी के आगे नाचने वाली कलाकार का नाम है
गीता निजामी। गीत गाया है अमीर बाई कर्नाटकी ने। इस ब्लॉग पर
श्याम सुन्दर का ये गीत सुनिए आपको उनके संगीत को पहचानने
में मदद मिलेगी-ऐसे रसिया का-ढोलक

नूरजहाँ के हाव भाव देख कर ऐसा लग रहा है की उनको मेहँदी लगवाने
में आनंद आ रहा है। उल्लेखनीय है कि ये फिल्म नूरजहाँ की शुरुआती
कुछ फिल्मों में से एक है।



गीत के बोल:

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई

सैयां सलोने से नैन
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई

सैयां सलोने से नैन

हो, रावी किनारे
रावी किनारे मोरा छोटा सा गाँव
रावी किनारे मोरा छोटा सा गाँव
पतझड़ की धूप छांव
तारों की छांव
पतझड़ की धूप छाँव
तारों की छांव
सूनी नगरिया बसो मोरे राजा हो
मोरे सैयां हो
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई
सैयां सलोने से नैन

हो नैनों के गाँव
नैनों के गाँव में आजा रे बालम
नैनों के गाँव में आजा रे बालम
सपनों की दुनिया बसा जा रे बालम
सपनों की दुनिया बसा जा रे बालम
फिर मुझको गरवा लगा मोरे राजा हो
मोरे सैयां हो
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
....................................
Saiyan salone se nain-Village girl 1945

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Dec 1, 2010

एक पल रुक जाना-ढोलक १९५१

आइये एक नटखट गीत सुना जाए जो सन ५१ की फिल्म ढोलक
से है। अजीत और मीना शोरे परदे पर नोकझोंक करते दिखाई दे
रहे हैं। अभिनेता अजीत ने अपना फ़िल्मी सफ़र बतौर नायक
शुरू किया था लेकिन उनको प्रसिद्धि खलनायकी से ज्यादा प्राप्त
हुई। नायक वाला उनका दौर श्वेत श्याम फिल्मों में ही ख़त्म हो
गया था। ५७ की फिल्म नया दौर में आपने उन्हें सहायक
अभिनेता के रूप में देखा। इस गीत की एक पंक्ति आपको
फिल्म नया दौर के एक गीत की याद अवश्य दिलाएगी। वो
गीत है रफ़ी और आशा का गाया युगल गीत।




गीत के बोल:

एक पल रुक जाना सरकार
ना मारो दो नैनों की मार
के एक पल रुक जाना

एक पल हट जाना सरकार
झूठे तुम हो तुम्हारा प्यार
के एक पल हट जाना

कित चले हमें तड़पा के
एक रंग नया दिखला के
कित चले हमें तड़पा के
एक रंग नया दिखला के

के एक पल रुक जाना सरकार
ना मारो दो नैनों की मार
के एक पल रुक जाना

एक पल हट जाना सरकार
झूठे तुम हो तुम्हारा प्यार
के एक पल हट जाना

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ, ओ ओ ओ
अब और सहारा ढूँढें
चल कर नया दियारा ढूँढें
अब और सहारा ढूँढें
चल कर नया दियारा ढूँढें
के अब तो हो गए हैं बेकार
मांगें चल के कहीं उधार
के एक पल हट जाना

के एक पल रुक जाना सरकार
ना मारो दो नैनों की मार
के एक पल रुक जाना

ये दिल फटने की बाते
हम से दूर हटने की बातें
ये दिल फटने की बाते
हम से दूर हटने की बातें

के इक पल रुक जाना सरकार
न मारो दो नैनों की मार
के इक पल रुक जाना

इक पल हट जाना सरकार
झूठे तुम हो तुम्हारा प्यार
कि इक पल हट जाना

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ, ओ ओ ओ
दिल फट गया है तो सी लो
चाहे मर जाओ या जी लो
दिल फट गया है तो सी लो
चाहे मर जाओ या जी लो
के इक पल हट जाना सरकार
झूठे तुम हो तुम्हारा प्यार
के इक पल हट जाना

के इक पल रुक जाना सरकार
झूठे तुम हो तुम्हारा प्यार
के इक पल रुक जाना

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Dec 2, 2009

चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर -ढोलक १९५१

ढोलक फ़िल्म का ये गीत पुराने संगीत प्रेमियों की जुबां
पे चढ़ा हुआ है। सुलोचना कदम नाम की गायिका का गाया
ये गीत अपने ज़माने का हिट गीत था। आज भी इस गीत के
चाहने वाले इसको सुनकर झूम उठते हैं। अभिनेत्री मीना शोरी
पर फिल्माया गया ये गीत आज भी वैसा ही जवान सुनाई देता
है जैसा सन ५० के दशक में सुनाई देता था। अज़ीज़ कश्मीरी
ने इस गीत के बोल लिखे हैं जिनका नाम तक नहीं लेता कोई
इस गीत को इतनी प्रसिद्धि मिलने के बावजूद। इस गीत की धुन
सुनकर सयाने संगीत प्रेमी ये अंदाज़ा लगाने में समर्थ होंगे कि
श्याम सुंदर पंजाबी मूल के संगीतकार थे।



गीत के बोल:

चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी
चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी

दिल की हसरत आंसुओं में
दिल की हसरत आंसुओं में
टुकड़े होकर बह गई
टुकड़े होकर बह गई

मेरी उम्मीदों पर बिजली जब गिरा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी
चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी

आंसुओं ने दास्ताँ-ऐ-गम सुनानी थी अभी
आंसुओं ने दास्ताँ-ऐ-गम सुनानी थी अभी
दास्ताँ-ऐ-गम सुनानी, हाँ सुनानी थी अभी
दिल की दिल में ही रही, अरमान मिटा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी
चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी

क्या अनोखी चोट दी है
क्या अनोखी चोट दी है
बेवफा बेदर्द ने
बेवफा बेदर्द ने
दिल में रह कर देखिये वो दिल चुरा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी
चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी

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ऐसे रसिया का -ढोलक १९५१

कुछ ऐसे गीत हैं जिनको न आकाशवाणी ने, न ही रेडियो सीलोन ने
बार बार बजाया लेकिन एक बार सुनके संगीत भक्त अपने ब्लॉग और
फोरम में दावे करते हैं की वे इसे पचासों बार सुन चुके हैं। संगीतकार
श्याम सुंदर एक गुणी संगीतकार थे जिनका जिक्र हम पहले एक पोस्ट
में कर चुके हैं। ये युगल गीत जो लता और रफ़ी का गाया हुआ है बहुत ही
दुर्लभ गीतों में से एक है. दुर्लभ की परिभाषा से अभी तक आप परिचित
हो ही गए होंगे। यहाँ इसका तात्पर्य एक अंग्रेज़ी शब्द-obscure से है ।
इमानदारी से मैं भी कहूँगा की यू ट्यूब पर इसको देखने के पहले मैंने इसे
केवल ४ बार सुना है। देखने को तो ये पहली बार ही मिला है जिस दयालु
आत्मा ने इसको यू ट्यूब पर चिपकाया है उसको धन्यवाद्। पढ़ते रहिये
होंगे पोस्ट में इस फ़िल्म के एक बहुत ही लोकप्रिय गीत की चर्चा होने
वाली है। नायक कलाकार हैं-अजीत जिनको आप पहचान ही गए होंगे।



गीत के बोल:

ऐसे रसिया का, ऐसे बलमा का
क्या ऐतबार, ऐतबार, झूठा प्यार
ऐसे रसिया का, ऐसे बलमा का
क्या ऐतबार, ऐतबार, झूठा प्यार

जा के मन में बसा गुइयाँ
सौतन का प्यार
जा के मन में बसा गुइयाँ
सौतन का प्यार
सौतन का प्यार

ऐसे रसिया का, ऐसे बलमा का
क्या ऐतबार, ऐतबार, झूठा प्यार

ऐसी गोरी का, ऐसी छोरी का
क्या ऐतबार, ऐतबार, कैसा प्यार

जाके मन में बसा रामा
गैरों का प्यार
जाके मन में बसा रामा
गैरों का प्यार
गैरों का प्यार

ऐसी गोरी का, ऐसी छोरी का
क्या ऐतबार, ऐतबार, कैसा प्यार

हमसे तो झूठी मोहब्बत जताए
गैरों से छिप छिप के नैना मिलाये
हमसे तो झूठी मोहब्बत जताए
गैरों से छिप छिप के नैना मिलाये

काहे रह रह के देता है ख्वाब
ऐतबार, झूठा प्यार

ऐसे रसिया का, ऐसे बलमा का
क्या ऐतबार, ऐतबार, झूठा प्यार

हमसे तो बोले तुम्हारी हूँ राजा
अजी, हमसे तो बोले तुम्हारी हूँ राजा
औरों से बोले निगाहों में आ जा
औरों से बोले निगाहों में आ जा

ऑंखें गैरों से करती है चार
ऐतबार, कैसा प्यार

ऐसी गोरी का, ऐसी छोरी का
क्या ऐतबार, ऐतबार, कैसा प्यार

जाओ जी झूठे बहने न मारो
जाओ जी झूठे बहने न मारो
नैनों के तिरछे निशाने न मारो
नैनों के तिरछे निशाने न मारो

जुल्मी छीलो न दिल का करार
ऐतबार, झूठा प्यार
जा के मन में बसा गुइयाँ
सौतन का प्यार
जाके मन में बसा रामा
गैरों का प्यार

सौतन का प्यार

ऐसे रसिया का
ऐसी गोरी का
ऐतबार, झूठा प्यार
ऐतबार, कैसा प्यार

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Nov 22, 2009

साजन की गलियां छोड़ चले -बाज़ार १९४९

आइये दस साल और पीछे चला जाए। पिछला गीत आपने सुना वो
१९५९ की एक फ़िल्म से था और लता मंगेशकर का गाया हुआ था।
ये गीत भी लता मंगेशकर का गाया हुआ है और सन १९४९ में आई फ़िल्म
बाज़ार से है। लता की युवा आवाज़ को सुनने का अपना अलग ही आनंद
है जिससे आज की पीढ़ी वंचित है ।

इसकी धुन उस समय के प्रतिभाशाली संगीतकार श्याम सुंदर
ने बनाई है। श्याम सुंदर के बनाये गीतों में शायद सर्वाधिक लोकप्रिय गीत
हम इसको कह सकते हैं। इस फ़िल्म में श्याम और निगार सुल्ताना की मुख्य
भूमिकाएं हैं। ये गीत निगार सुल्ताना पर फिल्माया गया है। इस गीत के बारे में
बहुत कम श्रोताओं को पता है कि ये गीत किसने लिखा है। कमर जलालाबादी
इसके रचयिता हैं और उनको वो प्रसिद्धि नहीं मिल पाई जिसके वो हक़दार थे।



गाने के बोल:

साजन की गलियां छोड़ चले
दिल रोया आंसू बह न सके

ये जीना भी कोई जीना है
हम उनको अपना कह न सके

साजन की गलियां.....

जब उनसे बिछ्ड़ कर आने लगे
जब उनसे बिछ्ड़ कर आने लगे
रुक रुक के चले, चल चल के रुके
लब काँपे, आँखें भर आयीं
कुछ कहना चाहा कह न सके

साजन की गलियाँ छोड़ चले
दिल रोया आंसू बह न सके
साजन की गलियाँ....

उनके लिए उनको छोड़ दिया
ख़ुद अपने दिल को तोड़ दिया
हम उनके दिल में रहते थे
उनके क़दमों में रह न सके

साजन की गलियाँ छोड़ चले
दिल रोया आंसू बह न सके
साजन की गलियाँ....

साजन हैं वहाँ और हम हैं यहाँ
ऐसे दिल को ले जाएँ कहाँ
जो पास भी उन के रह न सके
और दर्द-ऐ-जुदाई सह न सके

साजन की गलियाँ छोड़ चले
दिल रोया आंसू बह न सके
साजन की गलियाँ.....

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