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Nov 1, 2016

चाँदनी रात में चाँद के सामने-गैर फ़िल्मी गीत १९८४

पंकज उधास का एक गैर फ़िल्मी गीत सुनते हैं आज. चाँद
और चांदनी थीम पर बने गीत ग़ज़लें लुभावने होते हैं और
इस थीम पर बने गीत ज़ल्दी लोकप्रिय भी होते हैं.

आज दूज है और दूज के चाँद के लिए कई कवियों और
शायरों ने हजारों कसीदे काढ़ रखे हैं. ये इतने हैं कि नए
कसीदों कि ज़रूरत महसूस नहीं होती.

शेवान बिजनौरी का लिखा ये गीत है जिसकी तर्ज़ पंकज ने
खुद बनाई है. ये उनके लोकप्रिय गीतों में से एक है और
अपने ज़माने में खूब बजा हुआ गीत.



गीत के बोल:

चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी छुप गई चाँद शरमा गया
चाँदनी छुप गई चाँद शरमा गया
आपका मुस्कराना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में

दिल की धडकन मेरी तेज होने लगी
रात आँखों में कांटे चुभोने लगी
दिल की धडकन मेरी तेज होने लगी
रात आँखों में कांटे चुभोने लगी
वस्ल की रात में बात ही बात में
वस्ल की रात में बात ही बात में
यूँ तेरा रूठ जाना गज़ब हो गया

चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में

झूम कर काली काली घटा जब उठी
रात अपनी तो करवट बदलते कटी
झूम कर काली काली घटा जब उठी
रात अपनी तो करवट बदलते कटी
कुछ तो मौसम ने बेचैन रक्खा हमें
कुछ तो मौसम ने बेचैन रक्खा हमें
कुछ तेरा याद आना गजब हो गया

चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में

अपने हिस्से में तूफ़ां की तक़दीर थी
ज़िन्दगी अपनी मौजों की ज़ंजीर थी
अपने हिस्से में तूफ़ां की तक़दीर थी
ज़िन्दगी अपनी मौजों की ज़ंजीर थी
डूब जाने का अपने हमें ग़म न था
डूब जाने का अपने हमें ग़म न था
उसका साहिल पे आना गजब हो गया
चाँदनी रात में

चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी छुप गई चाँद शरमा गया
चाँदनी छुप गई चाँद शरमा गया
आपका मुस्कराना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में
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Chandni raat mein chand ke samne-Non film song 1984

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