Friday, October 21, 2011

ओढनी ओढ़ के नाचूं-तेरे नाम २००३

गीतों विभिन्न श्रेणियां के पाए जाते हैं। ये श्रेणियां श्रोता और विश्लेषक वर्ग ही
बनाया करते हैं। जैसे-दर्द भरे गीत, मस्ती भरे गीत या विदाई गीत। अल्ताफ रज़ा
के संगीत क्षेत्र में कदम रखने के बाद एक और श्रेणी चर्चित हुयी-परदेसी गीत। ये
परदेसी और परदेस वाले गीत पहले भी बनते रहे इसलिए इसकी ईजाद का श्री हम
अल्ताफ रज़ा को नहीं दे सकते मगर इस श्रेणी को लोकप्रिय बनाने का श्री उन्हें
दिया जा सकता है।

९० के दशक में सलमान खान के पदार्पण के बाद एक और श्रेणी फिल्मों में देखने को
मिली वो है- चुनरिया/ओढनी गीत। सलमान की लगभग हर दूसरी फिम में ऐसा कोई
गीत होता जिसमे ओढनी/चुनरिया/दुपट्टा का जिक्र होता। एक और शब्द जो शायद
को बहुत पसंद है वो है- सांवरिया। ये बात और है भंसाली कृत "सांवरिया " फिल्म के
आने के बाद मुझे सलमान की किसी भी फिल्म के गीत में सांवरिया शब्द सुनाई नहीं
दिया। गीतकार गीत लिखते समय किन किन कारकों से प्रभावित होता है ये उसका
एक उदाहरण है।

पेश है उनकी ही एक फिल्म से कर्णप्रिय गीत-ओढनी ओढ़ के नाचूं। गीत लिखा है
समीर ने जिसकी धुन बनाई है हिमेश रेशमिया ने। इसे गाया है अलका याग्निक ने
और साथ दिया है उदित नारायण ने। फिल्म तेरे नाम' सन २००३ की एक चर्चित
फिल्म है। गीत खुशनुमा गीत है और देखने में आनंददायी भी। नायिका भूमिका चावला
मुस्कुराने में ज़रा भी कंजूसी नहीं करती हैं। गीत में बहुत से सहायक कलाकारों और
ऊंटों ने भी अभिनय किया है। बेचारे ऊंटों को उचित पारिश्रमिक नहीं मिला होगा ।
दृष्यावली से ऐसा लगता है फिल्म की शूटिंग जयपुर और राजस्थान के अन्य भागों
में हुयी है।




गीत के बोल:

ओढनी ओढ के नाचूं, ओढनी
ओढनी ओढ के नाचूं, ओढनी

ओढनी ओढ के नाचूं, ओढनी
ओढनी ओढ के नाचूं, ओढनी

नाचूं ओढनी ओढ़ के यार
के दिल परदेसी हो गया
हमें तुमसे हो गया प्यार
के दिल परदेसी हो गया

ओढनी ओढ़ के नाचूं, ओढनी
ओढनी ओढ़ के नाचूं, ओढनी

तेरे इश्क का छाया खुमार
के दिल परदेसी हो गया
हमें तुमसे हो गया प्यार
के दिल परदेसी हो गया
हर कसम तोड़ के नाचूं, हर कसम
हर कसम तोड़ के नाचूं, हर कसम

ओढनी ओढ़ के नाचूं, ओढनी

चूड़ी, पायलियाँ बोले
आजा डोली लेके आजा साजना
हाथों में मेहँदी हो, मांग मेरी सिन्दूरी हो
तेरे नाम का किया सिंगार, ये सिंगार
मेरे रूप की आई बहार
के दिल परदेसी हो गया
ओ नाचूं ओढनी ओढ़ के यार
के दिल परदेसी हो गया

मैं तो तेरे नाम लिखूंगा
प्यासी ये कहानी एहसास की
मिलना हो, तो ऐसा हो, सदियों तक ना दूरी हो
मैंने बरसों किया इंतज़ार ओ दिलदार
बेक़रारी में भी आया करार
के दिल परदेसी हो गया
ओ हमें तुमसे हो गया प्यार
के दिल परदेसी हो गया
हर कसम तोड़ के नाचूं, हर कसम
ओढनी ओढ़ के नाचूं, ओढनी
हर कसम तोड़ के नाचूं, हर कसम
ओढनी ओढ़ के नाचूं, ओढनी
.....................................
Odhni odh ke nachoon-Tere Naam 2003

2 comments:

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन October 22, 2011 4:32 AM  

सुन्दर दृश्यावली। एक बात साफ़ हुई कि हिमेश रेशमिया अगर खुद न गाये तो उसके गीत भी मधुर हो सकते हैं। [इसे मज़ाक ही समझें - पहले ही काफ़ी फ़तवे निकले हुए हैं]

Geetsangeet October 25, 2011 6:40 PM  

हा हा हा । वैसे ये गीत उनके मधुर पहलू को उजागर करने के लिए ही प्रस्तुत किया गया है।

हिमेश रेशमिया खुद ना गायें इस बात पर मैं और आप एक राय हैं मगर आज की पीढ़ी के अधिकांश नौजवान जो ज़ुकाम या नजले से पीड़ित होते हैं उनको हिमेश के गाये गाने बेहद पसंद आते हैं।

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