Dec 14, 2015

तेरे दर पर सनम-फिर तेरी कहानी याद आई १९९३

कुछ नायक नायिकाओं को देख के अनुमान होता है कि जो
व्यक्ति चाहे फिल्म अभिनेता या अभिनेत्री बन सकता है बस
एक चीज़ बुलंद होना चाहिए-किस्मत. हमारे देश में किस्मत
का एक और पर्यायवाची है-जुगाड या अंग्रेजी में-“सोर्स”. इसे
और खुले शब्दों में समझें तो-जिसका कोई माई-बाप हो उसके
लिए किसी भी जगह राह आसान हो जाती है.

आइये आज एक मधुर गीत सुनें फिल्म-फिर तेरे गीत याद
आये से. फिल्म में थोड़ी थोड़ी देर में एक गीत है. ऐसा लगता
है जैसे एक किलोमीटर लंबा गीत बना के उसके छोटे छोटे
टुकड़े अलग जगह फिट कर दिए गए हों. बरसों पहले ये फिल्म
किसी चैनल पर दिखाई गयी थी ४-५ बार और विज्ञापनों से
भरपूर. इसको देख के किसी ने जुमला छोड़ा था-फिर तेरे
विज्ञापन याद आये. आज तो ये आम बात हो गयी है २ घंटे
की फिल्म ४ घंटे में देखिये. उस समय के लिए तो अजूबा
ही था.

ये तो एक पहलू है. फिल्म के गीत तबियत से बजे हैं. कई
जगह पर तो मैंने ऐसे सुने हैं-कैसेट फिट कर दिया फिर
सुबह से शाम तक इसी फिल्म के गाने सुनो. वो ज़माना
कैसेट प्लेयर का था. गीत क़तील शिफ़ाई का है और संगीत
अन्नू मलिक का.



गीत के बोल:

तेरे दर पर सनम चले आये
तू ना आया तो हम चले आये

बिन तेरे कोई आस भी ना रही
इतने तरसे के प्यास भी ना रही
लड़खड़ाए कदम, चले आये
तेरे दर पर सनम चले आये

इससे पहले की हम पे हँसती रात
बन के नागिन जो हमको डसती रात
ले के अपना भरम, चले आये
तेरे दर पर सनम चले आये

दिल को धड़का लगा था, पल पल का
शोर सुन ले ना कोई पायल का
फिर भी तेरी कसम, चले आये
तेरे दर पर सनम चले आये
तू ना आया तो हम चले आये
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Tere der par sanam chale aaye-Phir teri kahani yaad aayi 1993

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