Dec 13, 2015

मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं-अमानत १९७७

ये इंसानी फितरत है कि समय पर गधे को भी बाप बना
लिया करता है. कई मैनेजमेंट गुरु इस कला की प्रशंसा
भी करते हैं. भौतिकवादी दुनिया इसी गुण की मुरीद है.

नेट पर कई समूहों में समय बिताने पर मैंने पाया कि
ये दुनिया भी इस गुण से महरूम नहीं है. संगीत क्षेत्र भी
इससे अछूता नहीं है और संगीत पर चर्चा करने वाले
समूह भी. संगीत चर्चा वाले समूहों में थुक्का-फजीहती
कुछ ज्यादा ही देखने को मिली. बहरहाल मुद्दा ये है इस
चर्चा का-आदमी मतलब निकलने के बाद पहचानना
बंद कर देता है. इस बात पर साहिर ने एक गीत लिखा
है. फिल्म का नाम है अमानत. सन १९७७ की फिल्म
है.

गीत हालांकि प्रेमी प्रेमिका ले लिए लिखा गया है फिल्म
की तथाकथित सिचुएशन के लिए मगर ये दूसरे पहलुओं
पर भी फिट बैठता है. नेतागिरी की लाइन में तो ये सब
आम बात है. पटिये से खटिये पर पहुँचते ही लोगों को
पटिये दिखना बंद हो जाते हैं. नेतागिरी और उद्योग जगत
में तो इससे आगे भी कुछ होता है वो है-काम निकलने
के बाद लात मार के अलग कर देना.

गीत के एक पंक्ति है-‘हर एक गली की ख़ाक तो हम छानते
नहीं’ इसका आम आदमी वर्ज़न कुछ यूँ होगा-हम हर जगह
मुंह नहीं मारा करते.



गीत के बोल:

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं
मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं
यूँ जा रहे हैं जैसे हमें जानते नहीं
यूँ जा रहे हैं जैसे हमें जानते नहीं
मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं


अपनी गरज थी जब तो लिपटना कबूल था
अपनी गरज थी जब तो लिपटना कबूल था
बाहों के दायरे में सिमटना कबूल था
बाहों के दायरे में सिमटना कबूल था
अब हम मना रहे हैं मगर मानते नहीं
अब हम मना रहे हैं मगर मानते नहीं

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं
यूँ जा रहे हैं जैसे हमें जानते नहीं


हमने तुम्हें पसंद किया क्या बुरा किया
हमने तुम्हें पसंद किया क्या बुरा किया
रूतबा ही कुछ बुलंद दिया क्या बुरा किया
रूतबा ही कुछ बुलंद दिया क्या बुरा किया
हर एक गली की ख़ाक तो हम छानते नहीं
हर एक गली की ख़ाक तो हम छानते नहीं

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं
यूँ जा रहे हैं जैसे हमें जानते नहीं

मुंह फेर कर न जाओ हमारे करीब से
मुंह फेर कर न जाओ हमारे करीब से
मिलता है कोई चाहने वाला नसीब से
मिलता है कोई चाहने वाला नसीब से
इस तरह आशिकों पे कमान तानते नहीं
इस तरह आशिकों पे कमान तानते नहीं

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं
यूँ जा रहे हैं जैसे हमें जानते नहीं

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं
............................................................
Matlab nikal gaya to-Amanat 1977

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