अम्बर की एक पाक सुराही-कादंबरी १९७५
कादंबरी से जो सन १९७५ की एक फिल्म है. एच के वर्मा निर्देशित
और मधु क्रिएशंस बैनर के तहत बनी इस फिल्म में विजय अरोड़ा,
अजित सिंह, अर्पणा चौधरी, चंद उस्मानी, जीत सुरेन्द्र और शबाना
अजमी जैसे कलाकारों ने काम किया. गीत शबाना पर फिल्माया
गया है और ये एक बैकग्राउंड स्कोर है.
संगीत तैयार किया है उस्ताद विलायत खान, प्रसिद्ध सरोद वादक ने.
उस्ताद जी ने हिंदी फिल्म आंधियां(१९५२) में भी संगीत दिया था.
शब्द सरल हैं गीत के. एक शब्द का अर्थ आपको बतलाये देते हैं.
कुफ्र शब्द के बहुत से अर्थ हैं. यहाँ शायद ‘अधर्मिता’ सबसे उपयुक्त
मतलब सटीक बैठता है.
गीत के बोल:
अम्बर की एक पाक सुराही,
बादल का एक जाम उठा कर
अम्बर की एक पाक सुराही,
बादल का एक जाम उठा कर
घूँट चांदनी पी है हमने,
बात कुफ़्र की की है हमने
घूँट चांदनी पी है हमने,
बात कुफ़्र की की है हमने
अम्बर की एक पाक सुराही
बादल का एक जाम उठा कर
कैसे इसका कर्ज़ चुकाएं
माँग के अपनी मौत के हाथों
कैसे इसका कर्ज़ चुकाएं
माँग के अपनी मौत के हाथों
उमर की चोली सी है हमने
बात कुफ़्र की की है हमने
अम्बर की एक पाक सुराही
बादल का एक जाम उठा कर
अपना इसमे कुछ भी नहीं है
अपना इसमे कुछ भी नहीं है
कुछ भी नहीं है
दो दिल जलते
दो दिल जलते उसकी अमानत
उसको नहीं तो दी है हमने
बात कुफ़्र की की है हमने
अम्बर की एक पाक सुराही
बादल का एक जाम उठा कर
अम्बर की एक पाक सुराही
बादल का एक जाम उठा कर
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Ambar ki ek paak surahi-Kadambari 1975
Artists-Vijay Arora, Shabana Azmi

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