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Jul 8, 2020

जीना क्या अजी प्यार बिना-धन दौलत १९८०

आज ८ जुलाई अभिनेत्री नीतू सिंह का जन्मदिन है. इस
अवसर पर सुनते हैं फिल्म धन दौलत से एक गीत. इस
फिल्म में उनके साथ ऋषि कपूर ने काम किया था.

जीवन विडंबनाओं का नाम है जिसमें अजीब मोड और
पेचीदा स्तिथियाँ सामने आती रहती है. इस साल हमें
बॉलीवुड से काफी दुखद ख़बरें मिलीं. जीवन मरण का ये
चक्र दुनिया में सभी जगह निरंतर जारी है मगर जिस
हिस्से को कवरेज ज़्यादा मिलता है वहाँ से हमें ज़्यादा
ख़बरें सुनाई और दिखलाई देती हैं.

आज फिल्म की अभिनेत्री का जन्मदिन है और फिल्म
धन दौलत के निर्देशक हरीश शाह ७ जुलाई को अलविदा
कह गए थे. निर्माता हरीश शाह की बतौर निर्देशक पहली
फिल्म थी-धन दौलत. नामचीन लोगों के जन्मदिन हमें
याद रह जाते हैं मगर कम सुने नामों की सुध लेने वाले
मीडिया में गिने चुने लोग ही हैं.

गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी तर्ज़
बनाई है आर डी बर्मन ने. इसे गाया है किशोर कुमार और
आशा भोंसले ने.




गीत के बोल:

जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना
जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना
धन दौलत बिना चले मगर
ज़िन्दगी ना चले यार बिना
मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके तो बजे पायल भी
मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके और बजे पायल भी

जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना
धन दौलत बिना चले मगर
ज़िन्दगी ना चले यार बिना
मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके तो बजे पायल भी
जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना

सपने पूरे हुए आज दिन फिरते नहीं देरी
सुन ओ मेरे हसीं आज एक तू ही नहीं
साडी दुनिया है मेरी
सपने पूरे हुए आज दिन फिरते नहीं देरी
सुन ओ मेरे हसीं आज एक तू ही नहीं
सारी दुनिया है मेरी
हाँ मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके तो बजे पायल भी
मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके तो बजे पायल भी

जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना
धन दौलत बिना चले मगर
ज़िन्दगी ना चले यार बिना

सोने चांदी का वो दिल क्या
जो न दिल के काम आये
यहाँ तो तेरी कसम प्यार वालों में सनम
अपना पहला नाम आये
सोने चांदी का वो दिल क्या
जो न दिल के काम आये
यहाँ तो तेरी कसम प्यार वालों में सनम
अपना पहला नाम आये
मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके तो बजे पायल भी

जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना
धन दौलत बिना चले मगर
ज़िन्दगी ना चले यार बिना
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
………………………………………….
Jeena kay aji pyar bina-Dhan daulat 1980

Artists: Rishi Kapoor, Neetu Singh

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Jul 4, 2020

बन के पवन उड़ जाऊंगी मैं-रंगा खुश १९७५

आज ४ जुलाई जोगिन्दर शैली का जम्दीन है. अपने ज़माने
के चर्चित अभिनेता और निर्देशक जोगिन्दर ने कुछ बेहद
सफल फ़िल्में बनायीं हैं. इनमें से कुछ ने डायमंड जुबली
भी मना ली.

इन फिल्मों में से एक है रंगा खुश जिसका खुशनुमा गीत हम
आपको आज सुनवा रहे हैं.



गीत के बोल:

कल मिलते हैं.
.....................................................................
Ban ke pawan ud jaaongi main-Ranga Khush 1975

Artists: Joginder, Nazneen, Aruna Irani

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Jun 30, 2020

हम तुझ पर ही शैदा-आज का दौर १९८५

जैकी श्रॉफ़ का कोई गीत देखे कई दिन हो गए हैं. आज
सुनते और देखते हैं फिल्म आज का दौर से एक गाना
जिसे उनके अलावा पद्मिनी कोल्हापुरे पर फिल्माया गया
है.

गाने के बोल इन्दीवर के हैं और संगीत बप्पी लहरी का.
इसे आशा भोंसले और किशोर कुमार ने गाया है.

फैशन तो फैशन है. एक दुबले पतले आदमी को आप एक
बड़ी सी शर्ट पहना दो और नायिका को तंग कपडे, वाह रे
निर्देशक.. बाद में गीत में इसे सुधारा गया है और प्रपोर्शन
का ध्यान रखा गया है.

गीत में एक सुन्दर सा प्राणी, थोड़ी देर को ही सही दिखाई
देता है मानो उससे पूछा जा रहा हो-अब कपडे ठीक हैं?




गीत के बोल:

फिर वही बात
आप सुनते नहीं हैं गीत को
ढंग से.
………………………………………………
Ham tujh par hi shaida hue-Aaj ka daur 1985

Artists: Jackie Shroff, Padmini Kolhapure

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Jun 27, 2020

न जा जाने जां-जोशीले १९८९

आज २७ जून को संगीतकार आर डी बर्मन का जन्मदिन है.
इस अवसर पर सुनते हैं फिल्म जोशीला से एक युगल गीत
जिसे पंचम और आशा भोंसले ने गाया है.

१९८९ की फिल्म जोशीले की शूटिंग लेह और लद्दाख में हुई
थी. ये दोनों जगह पिछले काफी दिनों से चर्चा में हैं. फिल्म
की कहानी सम १९६५ की अंग्रेजी फिल्म ‘फॉर ए फ्यू डॉलर्स
मोर’ से मिलती जुलती है. जोशीले फिल्म की कहानी लिखी
है जावेद अख्तर ने जिन्होंने फिल्म के गाने भी लिखे हैं.

फिल्म का निर्देशन शेखर कपूर ने किया और बीच में किसी
वजह से उन्होंने फिल्म छोड़ दी. उसके बाद फिल्म के निर्माता
सिब्ते हसन रिज़वी ने इसे पूरा किया.

फिल्म में दो हीरो और दो हीरोईन हैं-अनिल कपूर, सनी देवल,
श्रीदेवी और मीनाक्षी शेषाद्रि. पंचम की आवाज़ सनी देवल पर
कितनी जाँच रही है ये तो आप ही डिसाईड करें, हम आपको
गाना सुनवा देते हैं.





गीत के बोल:

ओए
ना जा जाने जां
.
.
.
……………………………………………………….
Na ja jaane jaan-Joshile

Artists: Sunny Deol, Sridevi

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Jun 25, 2020

अजी रहने दो चन्दा बदली में-चौकीदार १९७४

हर जादुई असर का समय होता है. इस सृष्टि में हर चीज़
की मियाद तय है चाहे वो किसी का राजपाट हो या प्रसिद्धि.
समय ने किसी को नहीं बख्शा है इस जगत में.

आज संगीतकार मदन मोहन का जन्मदिन है. इस अवसर
पर आप सोच रहे होंगे कि मैं को लता मंगेशकर का गाना
याद करूँगा. बिलकुल नहीं जी.

मदन मोहन और लता मंगेशकर को तो सबसे ज्यादा याद
किया गया है पिछले ४०-५० सालों में. हर गाने पर आपको
कहानी उपन्यास मिल जायेंगे अतः उन सब बातों को रिपीट
करने से कोई मतलब नहीं.

आपको सुनवाऊंगा आशा भोंसले का गाया एक गाना जिसे
परदे पर खूबसूरत अभिनेत्री मधुमति पर फिल्माया गया है.
एक समय था जब जनता केवल कलाकारों के नाम से गाने
पहचानती थी. फिल्म ना चलने की सूरत में गाने भी भुला
दिए जाते थे.

आम तौर पर आशा भोंसले के गाये वे गाने जो हेलन पर
फिल्माए गए हैं जनता को जल्दी याद आते हैं. इस बात
की वजह हेलन का इस फिल्म उद्योग में हासिल किया गया
मुकाम है. उसके अलावा उनकी स्क्रीन प्रेजेंस आला दर्जे
की थी जो सबसे बड़ा कारण है दर्शकों के दिमाग पर अमिट
छाप छूटने का.

गाने पर वापस लौटते हैं. इसे लिखा है राजेन्द्र कृष्ण ने.
राजेंद्र कृष्ण के साथ मदन मोहन ने कई अविस्मरणीय गीत
बनाये हैं.



गीत के बोल:

अजी रहने दो
कल मिलते हैं
.............................................................
Aji rehne do chanda badli mein-Chowkidaar 1974

Artists: Madhumati,

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Jun 10, 2020

आगे आगे एक हसीना-प्रोफ़ेसर प्यारेलाल १९८१

हम बात कर रहे थे कि परदे के पीछे वाले कलाकार और
योगदानकर्ताओं के नाम प्रसिद्ध नहीं हो पाते. फिल्म बन
जाती है और उसके बाद गधेनुमा नायक नायिकाओं को भी
तथाकथित अपार लोकप्रियता मिल जाती है. जिस निर्देशक
ने उन्हें गधे से खच्चर या घोड़ा बनाया उसे कौन पूछता है.

कुछ निर्देशक और निर्माता फिल्मों से बड़े कद के हो जाते
हैं और जनता का एक हिस्सा उन्हें फिर यूँ पहचानता है-
फलाने की फिल्म है, ढिकाने की फिल्म है. जो कलाकार
निर्देशक की बात मान के चलते हैं उनसे सभी खुश रहते हैं
क्यूंकि निर्देशक के विज़न के अनुसार काम हो जाता है.

१० २० फ़िल्में कर लेने के बाद कई नायकों को निर्देशन की
खुजली होने लगती है और वे टांग अडाने का काम शुरू कर
देते हैं. सुझाव तक तो ठीक है मगर एक विधा से दूसरी विधा
में घुसने का ये प्रयत्न या तो फिल्म का कचरा कर बैठता है
या फिर नायक को निर्देशक बनने की ओर ले जाता है.

सन १९८१ की फिल्म प्रोफ़ेसर प्यारेलाल का निर्देशन बृज
सदाना ने किया था. कहा जाता है इस फिल्म को शूट करते
करते पूरे पांच साल लग गए और ९ घंटे की अजीब-ओ-गरीब
चीज़ों को एक ३ घंटे की फिल्म के ढाँचे में बिठाने के लिए
हृषिकेश मुखर्जी की मदद ली गई. उसके बाद भी फिल्म की
कहानी यूँ लगती है मानो ३-४ फिल्मों के उसल-मिसल हो.

फिल्म की दृश्यावलियाँ सुन्दर हैं और इस बात से कोई भी
इनकार नहीं कर सकता. वो समय था जब धर्मेन्द्र और इस
फिल्म की नायिका जीनत अमान के प्रशंसक बहुतेरे थे.

इस फिल्म के प्रमुख कलाकारों में से एक हैं जीवन, अपने
ज़माने के मशहूर विलन. इस फिल्म में भी वे विलन की ही
भूमिका में हैं. आज उनकी पुण्यतिथि है अतः हम आपको ये
गीत सुनवा रहे हैं.
राजेंद्र कृष्ण गीत लेखक हैं और कल्याणजी आनंदजी संगीतकार.
गीत आशा भोंसले ने गाया है.



गीत के बोल:


हे आगे आगे
अरे आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

अरे शमा अभी तक
हे शमा अभी तक जली नहीं है आ पहुँचे परवाने
ये कैसे परवाने के सब हैं दीवाने
हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने


होते हो यार क्यों बेक़रार
आने ही वाली है देखो बहार
होते हो यार क्यों बेक़रार
आने ही वाली है देखो बहार
मयखाने भी अपने पैमाने भी अपने
मस्ती भरे है ज़माने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

मेरे हुजूर जाना ना दूर
होने लगा है मुझे प्यार का सुरूर
मेरे हुजुर जाना न दूर
होने लगा है मुझे प्यार का सुरूर
किसी से न कहना जी चुप चुप रहना
ये दिल पर लगे क्यों निशाने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

ऐसा जवां रंगीन समां
घडी दो घडी का है मेहमां
ऐसा जवां रंगीन समां
घडी दो घडी का है मेहमां
गम है बिछड़ने का खेल है बिगड़ने का
बदलेंगे अब तो ठिकाने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने
अरे शमा अभी तक जली नहीं है
आ पहुँचे परवाने
ये कैसे परवाने के सब हैं दीवाने
………………………………………..
Aage aage ek haseena-Professor Pyarelal 1981

Artists: Zeenat Aman, Jeevan, Others

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Jun 8, 2020

आ सपनों की रानी-तीन बहूरानियाँ १९६८

आज काफी सारी बॉलीवुड कलाकारों का जन्मदिन हैं उनमें
से प्रमुख हैं डिम्पल कपाडिया और शिल्पा शेट्टी, डिम्पल को
तो सोशल मीडिया पर खूब याद किया गया, शिल्पा शेट्टी को
भी उनके फैन्स ने याद किया मगर इक्का दुक्का जगहों पर
ही हास्य कलाकार राजेन्द्रनाथ का जिक्र है.

१९३१ में पेशावर में जन्मे राजेन्द्रनाथ मल्होत्रा फिल्मों में आने
से पहले नाट्य मंच से जुड़े. उन्हें शशधर मुखर्जी की फिल्म
दिल दे के देखो से संभवतः अपने फ़िल्मी कैरियर के उल्लेखनीय
सफ़र शुरुआत की थी.

उसके पहले वे हम सब चोर हैं फिल्म में एक छोटी सी भूमिका
में नज़र आये थे. कुछ जगह उल्लेख मिलता है कि उन्होंने १९३८
की फिल्म वचन में काम किया था. तथ्य शायद ये बतलाते हैं
कि ४० के दशक के उत्तरार्ध में प्रेमनाथ बम्बई आये उसके बाद
राजेन्द्रनाथ का आगमन हुआ मायानगरी में.

ढेर सारी फिल्मों के अलावा वे हम पांच सीरियल में नज़र आये
थे. मनोज कुमार की फिल्म पूरब और पश्चिम में वे हास्य से
अलग सामान्य सहायक कलाकार की भूमिका में थे जो दर्शकों
के लिए एक आश्चर्य जैसा था उस वक्त.

आपको पहले मेला फिल्म से राजेन्द्रनाथ पर फिल्माया गुआ एक
गाना सुनवा चुके हैं. आज सुनते हैं सन १९६८ की एक फिल्म
तीन बहुरानियाँ से उन पर फिल्माया गया गाना. उनके साथ हैं
शशिकला.

आनंद बक्षी का गीत है और कल्याणजी आनंदजी का संगीत जिसे
किशोर कुमार और आशा भोंसले ने गाया है.



गीत के बोल:

आ सपनों की रानी
आ आ आ सपनों की रानी
नाचे गायें हम तुम लहराये हम तुम
मुस्कुराये हम तुम
आजा बम चिक बम चिक बम चिक
बम चिक बम चिक बम बम

आ सपनों के राजा
आ आ आ सपनों के राजा
नाचे गायें हम तुम लहराये हम तुम
मुस्कुराये हम तुम
आजा बम चिक बम चिक बम चिक
बम चिक बम चिक बम बम

आ जा कर के इशारा हाँ
इशारा इशारा इशारा
मैंने तुझको पुकारा ओ हो
पुकारा पुकारा पुकारा
दिर दिर ताना दिर दिर ताना
जलता है तो जले ज़माना
तुम ता ना ना तुम ता ना ना
तिरकिट धा तिरकिट धा

आ आ आ सपनों की रानी
आ आ आ सपनों के राजा
नाचे गायें हम तुम लहराये हम तुम
मुस्कुराये हम तुम
आजा बम चिक बम चिक बम चिक
बम चिक बम चिक बम बम
………………………………………………………
Aa sapnon ki rani-Teen bahuraniyan 1968

Artists: Rajendranath, Shashikala

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Jun 6, 2020

उत्तर आई अखाड़े में-चमेली की शादी १९८६

इंसान को दो हाथ इसलिए दिये गए हैं कि वो उन्हें चला कर,
मेहनत कर के अपना पेट पाल सके. चलाना कैसे है उसके लिए
दिमाग दिया हुआ है. कभी कभी हाथ अपनी रक्षा और कुछ
विशेष हासिल करने के लिए भी चलाने पड़ते हैं.

फिल्म चमेली की शादी में नायक को नायिका आसानी से नहीं
मिलती. तरह तरह के दांव पेच, कुश्ती, ढिशुम ढिशुम, गायन,
नृत्य इत्यादि के बाद उसे मन का मीत प्राप्त होता है. अखाड़े
में नायिका जैसे दृश्य हमने डब्लू डब्लू एफ के महिला संस्करण
में ही देखे और वो भी ९० के बाद, जहाँ तक मेरा अनुमान ठीक
है. पुरुष प्रधान फ़िल्मी कथानकों में ऐसा देखने को मिला नहीं.

बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि वे मनुष्य योनि में पैदा
हो गये तो दो वक्त की रोटी और अन्य सुविधाओं पर उनका
जन्मसिद्ध अधिकार हो गया. वे हाथ पैर मारें या ना मारें उन्हें
भोजन मिलना चाहिए.

आसानी से मिलने वाली चीज़ों में प्रकृति द्वारा प्रदान वस्तुएं
जैसे पेड़ से स्वतः गिरे बेर, पक्षियों के खाए बेर ही मिला करते
हैं. इनमें आपके पास चॉईस नहीं होती. ताजा कोई चीज़ खानी
है तो पेड़ पर चढ़िये या तोड़ने का कोई जुगाड कीजिये तभी
प्राप्त होगा.

सहज कॉमेडी की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निर्देशक ने इसमें
अपनी पिछली फिल्मों की तुलना में कुछ अनूठे प्रयोग किये हैं.
अनूठा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि ऐसे कुछ प्रयोग श्वेत श्याम
युग की कुछ फिल्मों में भी हैं मगर समय की धूल भरी आंधी
में कई चीज़ें दब चुकी हैं बॉलीवुड की. कोशिश जारी है उन पर
से धूल हटाने की मगर पिछले दशकों में इतना कुछ सामने आ
चुका है कि ये प्रयत्न अपर्याप्त या यूँ कहें ऊँट के मुंह में जीरे
के समान लगता है. उसके अलावा स्वयं बॉलीवुड पुराने माल
को सहजने के प्रति गंभीर नहीं है.

सुनते हैं ये गीत मेल-फीमेल कुश्ती वाला जो अनजान का लिखा
हुआ है. कल्याणजी आनंदजी के संगीत निर्देशन में इसे गाया है
आशा भोंसले ने.



गीत के बोल:

अरे आ आ
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी
अरे दम है तो
अरे दम है तो आ कर ले
प्यार में पहलवानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी

हो पंजा लड़ा की ना मारूं रे तुझको
नैना मिला के मैं मारूं
रसिया रे नैना मिला के मैं मारूं
प्यार का ऐसा दांव लगाऊँ
दंगल का भूत उतारूं
सर से दंगल का भूत उतारूं
मिल जायेगी
ओ मिल जाएगी मिटटी में
यहाँ तेरी जवानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी

हो पी के यहाँ भांग आ संग मेरे
तूफां में तू भी उतर जा
रसिया रे तूफां में तू भी उतर जा

ये इश्क शोलों का दरिया है तो क्या
आ डूब के पार कर जा
प्यारे आ डूब के पार कर जा
पार तुझको
ऐ पार तुझको लगा देगी
तेरी प्रेम दीवानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी

हो सजना ओ सजना
मैंने यहाँ सेज फूलों की सजना
तेरे लिए हैं सजाई
हो ओ ओ सारे ज़माने को ठोकर लगा के
तुझसे लगन है लगाई
मैंने तुझसे लगन है लगाई
आ भी जा
अरे आ भी जा बाहों में
छोड़ दे आनाकानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी
अरे दम हैं तो आ
कर ले प्यार में पहलवानी
……………………………………..
Utar aayi akhade mein-Chameli ki shadi 1986

Artists: Anil Kapoor, Amrita Singh

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Jun 5, 2020

तू जहाँ भी चलेगा-चमेली की शादी १९८६

क्या करें प्यार में तोतापरी आम भी अल्फांसो नज़र आता है.
अब इसका कोई हल नहीं है. ये तो फ्रीक्वेंसी मिलान की बात
है. मिले ससुर मेरा तुम्हारा. मेड फॉर ईच अदर.

फिल्म चमेली की शादी की कहानी फ़िल्मी नाटकीयता से भरी
होने के बावजूद इर्द गिर्द की कहानी जैसी ही लगती है. आप
इसके कथानक में जैसे ही खोने लगते हैं, कोई गीत झटका मार
की आपकी तंद्रा भंग कर देता है और आप समझ जाते हैं कि
ये फिल्म ही है जो आप देख रहे हैं.

चमेली के गुणगान वाला एक और गीत है इस फिल्म में जिसे
परदे पर स्वयं चमेली गा रही है और आशा भोंसले परदे के पीछे.
गीत अनजान रचित है और संगीतकार वही हैं जो पिछले गीत
के लिए थे.

ये आम गीतों की तरह नहीं है. फ़िल्मी बरसात में रोमांस के
साथ ढिशुम ढिशुम भी है और नायक नायिका दोनों इसमें अपने
अपने तरीके से गुंडों से निपट रहे हैं. प्यार में वो तासीर है के
अकड़े जोड़ भी खुल जाते हैं. गीत के अंत में नायक यकायक
ज़ोरों से नाचना शुरू कर देता है और नायिका आश्चर्यचकित हो
जाती है ये अच्च्म्भा देख कर.



गीत के बोल:

तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
हो तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी
ओ जी सकेगी न तुझ बिन अकेली
जी सकेगी न तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली
तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी

सजना सजना सजना
जिधर देखती हूँ उधर तू ही तू है
हर एक शय में आता नज़र तू ही तू है
जिधर देखती हूँ उधर तू ही तू है
हर एक शय में आता नज़र तू ही तू है
दिल की आहों में तू दिल ही राहों में तू
मेरी बाहों में तू है निगाहों में तू
मेरी रातों में नींदो में ख्वाबों में तू
जी सकेगी ना
जी सकेगी ना तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली

तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी

सजना सजना सजना
ये माना ज़माना बड़ा बेरहम है
तुझे मुझसे छीने यहाँ किसमें दम है
ये माना ज़माना बड़ा बेरहम है
तुझे मुझसे छीने यहाँ किसमें दम है
हो करम या सितम हंस के झेलेंगे हम
प्यार होगा न कम टूटेगी न कसम
हर जनम में तू ही होगा मेरा सनम
जी सकेगी ना
जी सकेगी ना तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली

तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी
जी सकेगी न तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली
तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी
…………………………………………….
Too jahan bhi chalega chaloongi-Chameli ki shadi 1986

Artists: Anil Kapoor, Amrita Singh

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Jun 3, 2020

बादल जो बरसे तो-गर्दिश १९९३

कंट्रास्ट और आयरनी जिंदगी के अटूट हिस्से हैं. इनसे बच
के कोई कहीं जा पाया है भला. खुशहाली और तंगहाली के
बीच झूलती जिंदगी कब हाईवे की स्मूद सड़क पर चल पड़े
और कब उबड खाबड़ पहाड़ पर कौन जान सकता है.

आज तूफ़ान के आने का बिगुल बजा और बारिश के होने
की संभावना बनी तो एक गीत सहसा याद आ गया गर्दिश
फिल्म से. फिल्म जैकी श्रॉफ और मुकेश ऋषि के शानदार
अभिनय के लिए जानी जाती है. बाकी के कलाकार फिल्म
में जो हैं जैसे अमरीश पुरी, सुरेश ओबेरॉय उनकी एक्टिंग
की सदैव प्रशंसा होती आई है अतः हम इधर रिपीट नहीं
करेंगे.

मुकेश ऋषि और दक्षिण की नायिका ऐश्वर्या की ये पहली
फिल्म है. फिल्म गर्दिश सन १९८० की मलयाली भाषा की
फिल्म कीरीडम का रिमेक है. निर्देशक है सिबी मलायिल.
मोहनलाल इस फिल्म के हीरो हैं. एक और मोहन हैं इस
फिल्म में-मोहन राज. मोहन राज ने जो रोल किया था इस
फ़िल्म में वो हिंदी वर्ज़न में मुकेश ऋषि को मिला. नायिका
ऐश्वर्या जूली(१९७५) फेम लक्ष्मी की बेटी हैं.

फिल्म को मच्छर मारने वाली अगरबत्ती और लिक्विड को
बनाने वाली कंपनी-गुडनाईट ने प्रायोजित किया था और इस
फिल्म के पोस्टर वगैरह में गुडनाईट छपा हुआ मिलता था.

फिल्म के बारे में हम लोग काफी कुछ जानते हैं मगर इस
फिल्म की कहानी के लेखक ए के लोहितादास के बारे में
कम. मलयालम सिनेमा में उनका नाम ख़ासा लोकप्रिय है
और वे गहराई वाली और वास्तविक लगने वाली कहानियों
के लिए मशहूर हैं.

अपना लेखन लघु कथाओं से शुरू कर उन्होंने बाद में थियेटर
का रुख किया जहाँ उन्हें सफलता का स्वाद चखने को मिला.
उसके बाद सन १९८७ की तानियावर्तनम में पहली बार उन्हें
स्क्रीनप्ले लिखने का अवसर प्राप्त हुआ.

गौरतलब है कहानी लेखन के अलावा उन्होंने निर्देशन और
निर्माण भी किया कई फिल्मों का. १९९८ में उन्हें बेस्ट डेब्यू
फिल्म निर्देशक का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला भूतकन्नडी के
लिए. उन्हें अधिकाँश फिल्म क्रिटिक्स अवार्ड ही मिले अपनी
फिल्मों के लिए.

सुनते हैं जावेद अख्तर का लिखा और आशा भोंसले का गाया
गीत जिसकी धुन पंचम ने तैयार की है. फ़िल्म की गीतों का
फिल्मंकान उस समय के हिसाब से अनूठा और आकर्षित करने
वाला था.




गीत के बोल:

बादल जो बरसे तो भीगे तुम भीगे हम
बादल जो बरसे तो भीगे तुम हां भीगे हम
बादल जो बरसे तो भीगे तुम हां भीगे हम
टपटिप टपटिप गूँज रही है बूँदों की सरगम
हो बादल जो बरसे तो भीगे तुम हां भीगे हम ...
बादल जो बरसे तो भीगे तुम हो भीगे हम

फूल कलियाँ भीगे भीगे रस्ते गलियाँ भीगे भीगे
फूल कलियाँ भीगे भीगे रस्ते गलियाँ भीगे भीगे
बारिश ने धो डाले हैं दुनिया के सारे ग़म
हा हा हा हा

बादल जो बरसे तो भीगे तुम हो भीगे हम

ठंडी ठंडी गीली गीली ये हवायें हैं नशीली
ठंडी ठंडी गीली गीली ये हवायें हैं नशीली
आग लगा दे जो पानी में ऐसा है मौसम
हाय
बादल जो अरे बरसे तो भीगे तुम हो भीगे हम
बादल जो हां हां बरसे तो हो हो भीगे तुम हो भीगे हम
टपटिप टपटिप गूँज रही है
…………………………………………………
Badal jo bares to-Gardish 1993

Artists: Jackie Shroff, Dimple Kapadia

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May 26, 2020

बच के तू रहना...खल्लास-कंपनी २००२

सन २००२ की फिल्म कंपनी रामगोपाल वर्मा द्वारा निर्देशित
एक सफल फिल्म है. बॉक्स ऑफिस पर सफलता अर्जित करने
वाली इस फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं दक्षिण भारतीय सिनेमा
की नामचीन हस्ती मोहनलाल, अजय देवगन, मनीषा कोइराला,
विवेक ओबेरॉय, सीमा बिश्वास, ईशा कोप्पिकर और अन्य.

गौरतलब है मोहनलाल की ये पहली हिंदी फिल्म है आज के
समय में मोहनलाल की कई फ़िल्में हिंदी में डब हो कर
देखने के लिए उपलब्ध हैं. मोहनलाल प्रतिभाशाली अभिनेता
हैं और वे तरह तरह के रोल कर चुके हैं दक्षिण के सिनेमा में.

गैंगस्टर और अंडरवर्ल्ड थीम पर सत्या के बाद रामगोपाल वर्मा
की ये दूसरी फिल्म थी. इस फिल्म में अजय देवगन और नए
अभिनेता विवेक ओबेरॉय के अभिनय की काफ़ी प्रशंसा हुई और
उन्हें फिल्मफेयर के पुरस्कार भी मिले.

व्यावसायिक दृष्टि से सफल इस फिल्म की नई पीढ़ी के समीक्षकों
और नई फिल्म के शौकीनों ने काफ़ी तारीफ की. देखने वालों का
कहना है कि कुछ अलग हट के और रियलिस्टिक जैसा देखने को
मिला.

फिल्म की एक और उल्लखनीय बात है और वो है इसका ये
गाना जो आज आपको सुनवा रहे हैं-खल्लास. ईशा कोप्पिकर
को गीत से काफ़ी लोकप्रियता मिली और उन्हें खल्लास गर्ल
के रूप में पहचाना जाने लगा. गीत भी अपने समय में काफ़ी
सुना गया. झलक दिखला जा फेम गणेश हेगड़े ने इस गीत का
फिल्मंकान किया था.

नितिन रैकवार ने गीत लिखा है और संदीप चौटा ने धुन तैयार
की है. आशा भोंसले, सपना अवस्थी और सुदेश भोंसले ने इसे
गाया है. गीत में आर डी बर्मन की याद ताज़ा करवाने का भरसक
प्रयत्न किया है सुदेश भोंसले ने.




गीत के बोल:

बच के तू रहना रे बच के तू रहना
नहीं दूजा मौक़ा मिलेगा संभलना
हे बच के तू रहना रे बच के तू रहना
नहीं दूजा मौक़ा मिलेगा संभलना
कहीं भी छुपा हो तुझे ढूँढ लेगा
ये है इश्क़ समझा तुझे कर ही देगा
खल्लास ए खल्लास ए हे खल्लास ए ए ए ए एखल्लास

बच के तू रहना रे बच के तू रहना
नहीं दूजा मौक़ा मिलेगा संभलना
कहीं भी छुपा हो तुझे ढूँढ लेगा
ये है इश्क़ समझा तुझे कर ही देगा
खल्लास द र र र खल्लास

नज़रों की क़ैद में तू जो आ गया समझ ले
इक बार फंस गया तो तू फंस गया समझ ले
नज़रों की क़ैद में तू जो आ गया समझ ले
इक बार फंस गया तो तू फंस गया समझ ले

नहीं तेरे जैसा कोई भी निशाना
नहीं तेरे जैसा कोई भी निशाना
हाँ बच के तू रहना रे बच के तू रहना
तू खिंचा चला आयेगा बस यहीं पे
ये है रोग ऐसा अगर हो गया तो खल्लास
हे खल्लास हे ए ए ए खल्लास ए खल्लास

जीना है तेरा मुश्किल तू मर गया समझ ले
मरना भी तेरा मुश्किल तू वो कर गया समझ ले
हे हे हे
जीना है तेरा मुश्किल तू मर गया समझ ले
मरना भी तेरा मुश्किल तू वो कर गया समझ ले
जहाँ में तेरा बस यही है ठिकाना
हे जहाँ में तेरा बस यही है ठिकाना
बच के तू रहना रे बच के तू रहना
ये वो रास्ता है जहाँ मुड़ना मुश्किल
ये वो दास्तां है शुरू हो गई तो खल्लास
हे हे ए खल्लास
दी रा रा रा रा खल्लास
हा हा हा अरे बुजदिल खल्लास

बच के तू रहना रे बच के तू रहना
नहीं दूजा मौक़ा मिलेगा संभलना
हे बच के तू रहना रे बच के तू रहना
नहीं दूजा मौक़ा मिलेगा संभलना
नहीं दूजा मौक़ा मिलेगा संभलना
कहीं भी छुपा हो तुझे ढूँढ लेगा
ये है इश्क़ समझा तुझे कर ही देगा
खल्लास हे ए खल्लास हे हे हे हे खल्लास
खल्लास एकदम खल्लास
…………………………………………
Bach ke too rehna re-Company 2002

Artists: Isha Koppikar, Ajay Devgan, Vivek Oberoi

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May 23, 2020

ओफ्फोह जलता है बुझता है-लकीर २००४

सन २००४ की फिल्म लकीर से एक गीत सुनते हैं जिसे
आशा भोंसले और सोनू निगम ने गाया है. आशा भोंसले
के गाने २००० के बाद सुनाई देना एक सुखद आश्चर्य के
सामान है. वैसे तो हाल ही में उनकी आवाज़ सुनाई दी
है एक गीत में अतः हमें जब तक उनकी आवाज़ सुनने
को मिल जाये धन्यवाद देते रहें उनको और उनकी सत्ता
को कायम रखने वाले को.

महबूब का गीत है और ए आर रहमान का संगीत. गीत
लेखन के मामले में महबूब सरवर का रहमान से पुराना
नाता है. रहमान ने हिंदी फिल्म संगीत में पैर ज़माने के
बाद भी अपने पुराने साथी के साथ काम करना जारी
रखा है.

कातिलाना सा गीत है जिसकी शुरुआत ऐसे होती है जैसे
ढेर सारी मधुमक्खियाँ रफ़्तार से उडी हों किसी जगह पर.
फिर क्वीन बी प्रकट होती है लाल पोशाक में. गीत जंगल
में पहुँच जाता है जहाँ दूसरा नायक प्रकट होता है. नायिका
कथानक अनुसार दूसरे नायक से प्यार करती है. पहले
नायक को नायिका से एक तरफ़ा प्यार है जिससे नायिका
अनभिज्ञ है.

फिल्म के निर्देशक एक कुशल कैमरामैन और गाना-फिल्माऊ
व्यक्ति हैं और उन्होंने इस गीत में नायिका नौहीद सायरसी
को सुन्दर दिखलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

जॉन अब्राहम सबसे पहले जैज़ी बी के गैर फ़िल्मी एल्बम सुरमा
के वीडियो में दिखलाई दिए थे दर्शकों को विज्ञापनों के अलावा.
एलबम का प्रसिद्ध गीत है-सुरमा तेरा कहर मचा रे




गीत के बोल:

तर तरा ता
ओफ्फोह जलता है बुझता है जलता है
ओ ओ कैसे
ओफ्फोह मिटता है लुटता है मिटता है
ओ ओ हमपे
फिर भी मुशक़िल मुशक़िल ये दिल पाना
सुन ले

हे सेहराओं से भी गुज़रूँ
दरियाओं से भी उभरूँ ऊ ऊ ओ
हे सेहराओं से भी गुज़रूँ
दरियाओं से भी उभरूँ
तेरे लिये मैं गहरी वादी भी चूम लूँ

सेहरा में गुल ना खिलेगा
दरिया में दिया ना जलेगा
दीवाने वादियों में दिल ना मिलेगा
ओफ्फोह ओ जल गया

तर तरा ता

एक परछाईं जैसी हूँ मैं
सूरज ढलते ही छुप जाऊँ तो
अँधेरा छा जायेगा आ आ आ आ

शोला जुनूं का आँखों में
रोशन दिल रातों में
फिर अँधेरा भी क्या कर पायेगा

ज़िद करना है रीत तेरी
नाज़ुक प्रीत मेरी
रोक भी ले ख़ुद को
जीने भी दे मुझको

बस जा मेरी साँसों में
जी ले आ मेरी बाँहों में
हाय जल गया जल गया जल गया जल गया

ओफ्फोह जलता है बुझता है जलता है
ओ ओ कैसे

ओफ्फोह जल गया मिट गया लुट गया
ओफ्फोह तुमपे

सेहरा में गुल ना खिलेगा
दरिया में दिया ना जलेगा
दीवाने वादियों में दिल ना मिलेगा

साँसों से ख़ुशबू उठने लगी
बाँहों में जब तू सजने लगी
तो देखे जहाँ
फिर ज़मीं आसमाँ क्या

शरम से आँखें झुकने लगीं
मुझसे कुछ ये कहने लगीं
के ये क्या हो गया
कैसे बदला इरादा आ आ

आख़िर दिल मजबूर हुआ
मेरे इश्क़ में चूर हुआ
मुझपे असर था तेरा
तुझपे है साया अब मेरा

दूर अगर मैं जाऊँ तो
फिर बन जाये तू सूरज वो
जो जलता है बुझता है
जलता है बुझता है
ओफ्फोह

ओफ्फोह जलता है
ओफ्फोह जल गया जल गया
ओफ्फोह ओफ्फोह
ओफ्फोह जल गया
जलता है
मिट गया मिट गया मिट गया मिट गया
मिट गया मिट गया मिट गया
ओफ्फोह जल गया
………………………………………………
Offoh jal gaya-Lakeer 2004

Artists: Nauheed Cyrusi, Sohail Khan, John Abraham

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Apr 20, 2020

कहो आ के बहार-फोर्टी डेज़ १९५९

आप खुश होते हैं तब गीतों के संगीत का आनंद लेते है
और जब आप दुःख के बादलों में घिरे होते हैं तब बोलों
का अर्थ समझते हैं. ये बात जिसने भी कहीं है सटीक है.

एक गीत है मुकेश आशा का गाया युगल गीत १९५९ का
जिसमें पहली पंक्ति को कुछ यूँ समझते थे हम-कहो आ
के बाहर, करे मेरा सिंगार. वो शब्द बहार है जिसके कारण
गफ़लत कई गानों में हो चुकी है.

सरसरी तौर पर गान सुनने में अर्थ का अनर्थ होने की
सम्भावना प्रबल होती है. मगर, जिन गानों के बोल ही
समझ ना आयें उनका क्या? साय सुकू साय सुकू साय
साय !

कैफी आज़मी की रचना है और बाबुल का संगीत. गीत
में एक शोख नज़र से सौ भेद समझने की बात कही
गयी है. सदियों से कवि, गीतकार और प्रेमी रिसर्च कर
के थक-मर गए मगर स्त्री मन का भेद कोई ना जान
पाया. अंगड़ाई मच्छर भगाने के लिए है या अलसाने की
अदा.

गाने की हो ओ ओ ओ से आपको नैयर के संगीत वाला
‘रोका कई बार मैंने’ गीत याद आना चाहिए.




गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ
कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
चुनूँ फूल हज़ार ओ करूँ तुझपे निसार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला

आँखों में खुशी नाचे होंठों पे हंसी गाये
कह दो गम-ए-दुनिया से छुपे से गुज़र जाये
सुनो दिल की पुकार कहे दिल बार बार
मुझे प्यार मिला ओ दिलदार मिला
हा आ आ आ आ

चुनूँ फूल हज़ार ओ करूँ तुझपे निसार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला

ये मस्त फ़ज़ा दिल को दीवाना बनाती है
ये मस्त फ़ज़ा दिल को दीवाना बनाती है
एक शोख नज़र तेरी सौ भेद बताती है
तुम्हीं मेरा क़रार तुम्हीं मेरा निखार
मुझे प्यार मिला ओ दिलदार मिला
हा आ आ आ आ

कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हाय

बेदर्द ज़माने को हम प्यार सिखा देंगे
दिल खो ही चुके पहले अब जां भी गंवा देंगे
ये है ऐसा खुमार नहीं जिसका उतार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
…………………………………………………
Kaho aa ke bahaar-40 Days 1959

Artists: Premnath, Nishi

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Apr 18, 2020

गये दिनों का सुराग़ लेकर-मीराज-ए-गज़ल १९८३

आशा भोंसले और गुलाम अली के गज़लों के एल्बम से अगली
रचना सुनते हैं जिसे नासिर काज़मी ने लिखा और गुलाम अली
ने संगीतबद्ध किया. ८० के दशक में ये एल्बम रिलीज़ हुआ था
और रिलीज़ के बाद काफी लोकप्रिय भी.

रचना काफी बड़ी है और उसमें से चंद शेर ही इसमें गाने के लिए
लिए गए हैं. ऐसी कुछ ग़ज़लें हम आपको सुनवा चुके हैं जो मूल
रूप से बड़ी हैं मगर गाने के लिए पूरे शेर प्रयोग में नहीं लाये गये.

इसे आप हबीब वली मोहम्मद की आवाज़ में अगर सुनने का शौक
फ़रमाते हैं तो इधर है-हबीब वली वर्ज़न



   


गज़ल के बोल:

गये दिनों का सुराग़ लेकर किधर से आया किधर गया वो
गये दिनों का सुराग़ लेकर किधर से आया किधर गया वो
अजीब मानुस अजनबी था मुझे तो हैरान कर गया वो
गये दिनों का सुराग़ लेकर

बस एक मोती सी छब दिखा कर
बस एक मोती सी छब दिखा कर बस एक मीठी सी धुन सुना कर
सितारा-ए-शाम बन के आया ब-रंग-ए-ख़्वाब-ए-सहर गया वो
अजीब मानुस अजनबी था मुझे तो हैरान कर गया वो
गये दिनों का सुराग़ लेकर

न अब वो यादों का चढ़ता दरिया
न अब वो यादों का चढ़ता दरिया न फ़ुर्सतों की है उदास बरखा
यूँ ही ज़रा सी कसक है दिल में
यूँ ही ज़रा सी कसक है दिल में जो ज़ख़्म गहरा था भर गया वो
अजीब मानुस अजनबी था मुझे तो हैरान कर गया वो
गये दिनों का सुराग़ लेकर

वो हिज्र की रात का सितारा
वो हिज्र की रात का सितारा वो हम-नफ़स हम-सुख़न हमारा
सदा रहे उसका नाम प्यारा
सदा रहे उसका नाम प्यारा सुना है कल रात मर गया वो
अजीब मानुस अजनबी था मुझे तो हैरान कर गया वो
गये दिनों का सुराग़ लेकर

वो रात का बेनवा मुसाफ़िर
वो रात का बेनवा मुसाफ़िर वो तेरा शाइर वो तेरा 'नासिर'
तेरी गली तक तो हमने देखा था फिर न जाने किधर गया वो
अजीब मानुस अजनबी था मुझे तो हैरान कर गया वो
गये दिनों का सुराग़ लेकर

गये दिनों का सुराग़ लेकर किधर से आया किधर गया वो
गये दिनों का सुराग़ लेकर
……………………………………………………………………..
Gaye dinon ka surag le kar-Meeraj-e-ghazal 1983

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Apr 17, 2020

अम्बुआ के पेड़ सुहाने-सबक १९५०

गर्मी आ रही है तो अब हर पेड़ सुहाना ही लगेगा. आम
के पेड़ इस समय ज्यादा सुहाने इसलिए लगते हैं क्यूंकि
इसमें फल लगने वाले होते हैं. कच्चे आम खाओ या पके,
चटनी बनाओ या रस बनाओ. फलों का राजा है आम.

सुनते हैं फिल्म संगीत के सुनहरे दौर से एक गाना जिसे
लिखा है दीनानाथ मधोक ने और इसकी धुन तैयार की
है ए आर क़ुरैशी ने. इसे सुरिंदर कौर, आशा भोंसले और
प्रेमलता ने गाया है. साथ में कोरस की आवाजें फ्री हैं.

इस लोड किये हुए गाने पर जो फोटू चल रहा है वो है
१९७३ फिल्म की सबक का जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा नज़र
आ रहे हैं. सन १९५० की फिल्म के हीरो करण दीवान हैं.



गीत के बोल:

अम्बुआ के पेड़ सुहाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने
अम्बुआ के पेड़ सुहाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने

अम्बुआ के पेड़ झूमें मस्त हवाओं में
अम्बुआ के पेड़ झूमें मस्त हवाओं में
तोहे पुकारे री आ जा हो आ जा
ठंडी ठंडी छाँव में
तोहे पुकारे री आ जा हो आ जा
ठंडी ठंडी छाँव में
कर ले मुहब्बत किसी बहाने
कर ले मुहब्बत किसी बहाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने

अम्बुआ के पेड़ सुहाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने

गया बचपना आई जवानी
लेकर आई सौ अरमाँ
निकल के रहेंगे सब अरमाँ
धीरज धर लो मेरी जाँ
निकल के रहेंगे सब अरमाँ
धीरज धर लो मेरी जाँ
नैना तिहारे री गोरी हो गोरी
लगे मुस्काने
नैना तिहारे री गोरी हो गोरी
लगे मुस्काने
दिल का पपीहा भी लगा गाने
दिल का पपीहा भी लगा गाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने

अम्बुआ के पेड़ सुहाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने
……………………………………………..
Ambua ke ped suhane-Sabak 1950

Artists:

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Apr 13, 2020

सोचा था मैंने तो ए जान मेरी-चांदी सोना १९७७

यकीनन, मोती बहुमूल्य और नायाब रत्न है. सीपियों के
गर्भ में नवजात शिशु की तरह पले मोती की चमक के
आगे सब रत्न फ़ीके हैं. इसमें कुदरती चमक होती है.
मोती को चमकाने के लिये किसी ग्राइंडर पर घिसने की
ज़रूरत नहीं होती.

कवियों और शायरों ने इसे ऊंचा दर्ज़ा दिया है उसकी
एक वजह है जो ऊपर हमने बतलाई और दूसरी ये है
कि गहरे पानी में से इसे निकालना टेढ़ी खीर है.

अब तो तकनीकि और संसाधन बहुतेरे हो गए हैं जिनकी
मदद से नदी और समुद्र की गहराई की थाह ली जा
सकती है मगर कई ऐसे हिस्से बाकी हैं अभी भी इस
पृथ्वी के जहाँ तक मानव की पहुँच नहीं है. ये ना हो
तो ही अच्छा है. ना जाने क्या प्राकृतिक विपदा निकल
आये उसके दुस्साहस के कारण.

किशोर कुमार और आशा भोंसले का गाया हुआ युगल
गीत सुनते हैं फिल्म चांदी सोना से. आशिक़ अफ़सोस
जता रहा है अपनी मुफलिसी का. मुफलिसी पैसों की
ही नहीं, वरन संसाधनों और दिमाग की भी हुआ करती
है. वो इसमें तरह तरह की चीज़ें गिना रहा है जो वो
ला सकता है या कर सकता था. गीत में आशा भोंसले
की केवल एक पंक्ति है.

नायक की भावनाओं को मजरूह सुल्तानपुरी ने अपने गीत
की मदद दी है.  नायिका जो काफी देर से सेमी-कंफ्यूज्ड
से स्टेट में है अन्तरा शुरू होते ही उसकी चेतना लौटती
है और वो ये देख के खुश होती है-अले ये तो मेले फेव्लेट
राजेश खन्ना वाले अंदाज़ में अपना सर हिला रहा है.



गीत के बोल:

सोचा था मैंने तो ए जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी
पर कुछ ना तुझे दे सका
इक मजबूर दिल के सिवा

सोचा था मैंने तो ऐ जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी
पर कुछ ना तुझे दे सका
इक मजबूर दिल के सिवा ओ

तड़पे दिल पलकों के पीछे कितने महल ख़्वाबों के लिये
तड़पे दिल पलकों के पीछे कितने महल ख़्वाबों के लिये
खिलते कभी तो महलों के दर जलते कभी अरमां के दिये
तू हंसती इक गुल की तरह मैं गाता बुलबुल की तरह

सोचा था मैंने तो ऐ जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी ओ

कब चाहा पर्बत बन जाना देता है जो सदियों का पता
कब चाहा पर्बत बन जाना देता है जो सदियों का पता
चाहूं बस इक पल का तराना बन के किसी ग़ुन्चे की सदा
खिल जाता इक पल ही सही धूल का फिर आँचल ही सही

सोचा था मैंने तो ऐ जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी ओ

फिर भी इस जलते सीने में अब तो यही अरमान पले
फिर भी इस जलते सीने में अब तो यही अरमान पले
चाँदी के सोने के ख़ज़ाने रख दूँ तेरे क़दमों के तले
उठता है तूफ़ान उठे लुटती है तो जान लुटे

आ ओ जानेमन ............... नहीं
मैं तेरे साथ हूँ तो फिर....
……………………………………………….
Socha tha maine to ae jaan meri-Chandi Sona 1977

Artusts: Sanjay Khan, Parveen Babi

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Apr 8, 2020

ओ रेखा तुम्हें देखा जबसे-नया बकरा १९७९

कुछ गाने दिमाग में अमिट सी छाप छोड़ जाते हैं.
एक गाना है फिल्म नया बकरा से. इसमें मुखड़े की
पंक्ति के साथ कुछ अनूठी आवाजें हैं.

किसी ज़माने में हमारे मोहल्ले में भी रेखा नाम की
लड़की हुआ करती थी. उस देख कर एक मजनू इस
गाने को मय संगीत के गाया करता.  वो ट्यूं ट्यूं की
आवाजें आज भी दिमाग में वैसी ही फिट हैं.

सुनाते हैं आपको वो गीत जो कव्वाली की शक्ल में है.
इसे रफ़ी और आशा ने गाया है. अनजान के बोल और
के बाबूजी का संगीत है.

प्रस्तुत गाना रेखा और जीतेंद्र पर फिल्माया गया है.
गीत के बोल कुछ कुच्छ विनोद मेहरा और रेखा के
निजी जीवन में आई उथल पुथल की और इशारा
करते हैं. इस गाने में जीतेंद्र और रेखा बतौर मेहमान
कलाकार दिखाई दिये हैं.

हम अपने आलेखों में गॉसिप कंटेंट को कम रखते है
उसकी वजह फोकस संगीत पर रहे तो ज्यादा बेहतरहै.
ऊपर के विषय से सम्बंधित दो लिंक हम आपको देते हैं.
एक में चप्पल का जिक्र है और एक में सैंडल का. कल
को कोई जूते-डंडे का जिक्र भी करेगा.

अज्ञात और ज्ञात में से क्या प्रस्तुत किया जाये ये एक
विचारणीय विषय है मगर लोकप्रियता बढ़ाने के लिए
मसाला ज़रूरी है और व्यूज़ और लाइक्स से काफ़ी बढती
है. दूसरा पहलू एक ये भी है इन सब से सितारे चर्चा में
बने रहते हैं चाहे वजह जो भी हो. बदनाम होंगे तो क्या
नाम ना होगा?

ये हैं लिंक:

चप्पल लिंक

सैंडल लिंक

रेखा का राज़-तबस्सुम

तबस्सुम वाले वीडियोज को हम थोडा औथेन्टिक मानते
हैं क्यूंकि वे फिल्म उद्योग से जुडी रहीं और उनके वीडियो
में अतिरेक नहीं देखा हमने किसी भी विषय पर. वे
दूरदर्शन से जुडी रहीं इस वजह से उन्हें विषय को सार
गर्भित और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने की आदत
है.




गीत के बोल:

ओ रेखा तुझे देखा जबसे देखा जबसे
दिल तेरे नशे में चूर हुआ हाँ चूर हुआ
ओ देख तूने दिल जीत लिया जीत लिया
दिल जीत के फ़िर क्यूँ दूर हुआ क्यूँ दूर हुआ
दिल तेरे नशे में चूर हुआ
दिल जीत के फ़िर क्यूँ दूर हुआ
क्यूँ तेरे नशे में चूर हुआ
क्यूँ दिल से मेरे तू दूर हुआ

बाकी के बोलों के लिए इंतज़ार करें.
…………………………………………….
O Rekha tujhe dekha jabse-Naya Bakra 1979

Artists: Jeetendra, Rekha

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Mar 24, 2020

हम तुम जीत गए-लोक परलोक १९७९

फिल्म लोक परलोक से एक गीत सुनते हैं जो
जीत की खुशी में गाया जा रहा है. जीतेंद्र और
जया प्रदा के अलावा ढेर सहायक कलाकारों की
मेहनत से सजा ये गीत गाया है किशोर कुमार
और आशा भोंसले ने. आनंद बक्षी का लिखा गीत
है और अनुमान लगाये संगीतकार कौन है ?

लोक परलोक फिल्म का सबसे पहला गीत हमने
आपको दस साल पहले सुनवाया था जब लिरिक्स
वाले कुकुरमुत्ते इन्टरनेट पर नहीं उगे थे. उस गीत
की लिरिक्स सैकड़ों जगह चिपक गईं अगले ३-४
साल में ही. गौरतलब है वो गीत हमने सुनवाया
था नर्क चतुर्दशी के दिन. उस गीत का सम्बन्ध
उस तिथि के कर्ता धर्ता से भी है.

अंग्रेजी के नियमों से बंधे क्रालिंग के तरीके से
हिंदी की साइटों के साथ न्याय नहीं हो पाता. इस
मामले में मैं अपने पाठकों से सुझाव चाहूँगा कि
इस ब्लॉग पर क्या कुछ और गतिविधि जोड़ी जाये
जैसे यूट्यूब पर जानकारी वाले वीडियोज़.




गीत के बोल:

हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये
खुले मैदान में हम बाज़ी मार गये
घुँघरू बज उठे नाच उठे झूम के हम
झ न न न न झ न न न न

हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये
खुले मैदान में हम बाज़ी मार गये
घुँघरू बज उठे नाच उठे झूम के हम
झ न न न न झ न न न न
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये

दौलत नहीं काम आई चाहत ने जीती लड़ाई
दौलत नहीं काम आई चाहत ने जीती लड़ाई
धडकनों से दूर रहे हम बड़े मजबूर रहे
धडकनों से दूर रहे हो ओ हो ओ ओ ओ
अपना सर ना झुकाया हमने सहे लाखों सितम
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये

तू इस खुशी के बहाने मत छेड़ मुझको दीवाने
तू इस खुशी के बहाने मत छेड़ मुझको दीवाने
प्यार में तकरार ना कर आ हा आज तू इंकार ना कर हो हो
प्यार में तकरार ना कर आज तू इंकार ना कर
आँचल छोड़ मेरा देखते हैं लोग बलम
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये

चलती है तू ले के ठुमके आय
हाय हाय ठुमके आय ओये ओये ठुमके
छाये गज़ब तेरे झुमके ओये होए झुमके
कैसा बेईमान है तू फ़िर भी मेरी जान है तू
फ़िर भी मेरी जान है तू
तेरे दम से मेरी जिंदगी है तेरी कसम
झ न न न न
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये
हम तुम जीत गए दुश्मन हार गये
………………………………………………………………..
Ham tum jeet gaye-Lok Parlok 1979

Artists: Jeetendra, Jaya Prada

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Mar 19, 2020

तूने मोहे ताका-सोने पे सुहागा १९८८

कहावतें और मुहावरों पर फिल्मों के नाम रखने का
सिलसिला फिल्म उद्योग में पुराना है. वर्तमान समय
में ऐसे नाम हमें कम दिखलाई देते हैं. सन १९८८ की
एक फिल्म है सोने पे सुहागा.

ताकी शब्द का पुर्लिंग होगा ताका. ताकना वैसे तो
क्रिया है मगर ताकी ताकी गाने को सुन के ऐसा लगता
है मानो किसी का नाम हो.

इन्दीवर की रचना को स्वर दिया है आशा भोंसले और
नितिन मुकेश ने बप्पी लहरी की धुन पर. लोक गीत
में प्रयुक्त होने वाले यदि यंत्रों की आवाजों से गीत शुरू
होता है और अर्ध फ़िल्मी अर्ध लोक गीत में परिवर्तित
हो जाता है. 




गीत के बोल:

ओ हो
तूने मोहे ताका मैंने तोहे ताका
तूने मोहे झांका मैंने तोहे झांका
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा
दिल तोसे लागा सोने पे सुहागा
प्यार दिल में जागा सोने पे सुहागा
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा
होये प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा

रूप की तू अनुरागी भौंरा
कली कली को गीत सुनाए
जब न चाहूँ मुझे सताये
जब मैं चाहूँ पास न आये
तन बिजली का मन तितली का
किस किस से कोई तुझे बचाये
मटक मटक कर सबसे बोले
सबसे हँसे मोरा जिया जलाये
रूठ के मन से फल नहीं लागा
दिल तोसे लागा सोने पे सुहागा
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा

दिल तोसे लागा सोने पे सुहागा
प्यार दिल में जागा सोने पे सुहागा
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा
होये प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा

जैसे मिले बादल से बादल
जैसे मिले पानी में पानी
जैसे मिले ज्योति से ज्योति
ऐसी मिली दोनों की जवानी
दोनों को दोनों की ज़रूरत
तू मेरा जीवन मैं तेरा जीवन
तुझे चाहिये प्यासी धरती
मुझे चाहिये झूमता सावन
तेरे संग बांधा प्रीत का धागा
दिल तोसे लागा सोने पे सुहागा
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा

तूने मोहे ताका मैंने तोहे ताका
तूने मोहे झांका मैंने तोहे झांका
दिल तोसे लागा सोने पे सुहागा
प्यार दिल में जागा सोने पे सुहागा
प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा
होये प्यार हमारा फटाफट खटाखट
फटाफट झटपट होई गवा
………………………………………………….
Toone mohe taaka-Sone pe suhaga 1988

Artists: Jeetendra, Sridevi

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Mar 14, 2020

दिल जनाब के कदमों में-द किलर्स १९६९

दिल भी क्या चीज़ है, उसे कहीं भी किसी भी
चीज़ पर निसार कर दो. कहाँ तो हिंदी फिल्म
का नायक कहता है-अपने पांव ज़मीन पर ना
रखियेगा मैले हो जायेंगे और कहाँ दिल क़दमों
में रखने की बात.

सुनते हैं आशा भोंसले का गाया हुआ एक गीत
एस एच बिहारी का लिखा हुआ जिसकी तर्ज़
ओ पी नैयर ने बनाई है.



गीत के बोल:

बा बा बा बा बा बा बा
बा बा बा बा बा बा बा

दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
पहले तो दिलरुबा
कहियो तो ये ज़रा
आपको कितना प्यार है

हो दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
पहले तो दिलरुबा
कहिये तो ये ज़रा
आपको कितना प्यार है
हो दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे

ढूंढती हैं कब से ये मेरी निगाहें
मंज़िले वफ़ा की ज़िन्दगी की राहें
प्यार न हो तो मेरी आँखों में दिलबर
चुभता है प्यारी रातों का मंज़र
ये जीना बेकार है

हो दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
पहले तो दिलरुबा
कहिये तो ये ज़रा
आपको कितना प्यार है
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे

ताजमहल से ये ले लो तुम गवाही
प्यार ने जहाँ में की है बादशाही
आज भी उल्फ़त का है दिल ये दीवाना
फिर भी न जाने क्यों ये ज़ालिम ज़माना
क्यूँ बेजार है

दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
पहले तो दिलरुबा
कहिये तो ये ज़रा
आपको कितना प्यार है
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
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Dil janaab ke kadmon mein-The Killers 1969

Artist: Sheikh Mukhtar, Ajit, Helen

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