आज ४ जुलाई जोगिन्दर शैली का जम्दीन है. अपने ज़माने
के चर्चित अभिनेता और निर्देशक जोगिन्दर ने कुछ बेहद
सफल फ़िल्में बनायीं हैं. इनमें से कुछ ने डायमंड जुबली
भी मना ली.
इन फिल्मों में से एक है रंगा खुश जिसका खुशनुमा गीत हम
आपको आज सुनवा रहे हैं.
गीत के बोल:
कल मिलते हैं.
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Ban ke pawan ud jaaongi main-Ranga Khush 1975
हम आप कितने सुरक्षित हैं और चैन की नींद सोते हैं ये
सीमा पर तैनात हमारे जांबाज़ सैनिक सुनिश्चित करते हैं.
हम आप तय नहीं कर सकते और ना ही हमें ये प्रिविलेज
है. ये एक शाश्वत सत्य है जिसे देश के हर एक नागरिक
को स्वीकारना चाहिए. धर्म, पैसे, उंच-नीच का इससे कोई
लेना देना नहीं है.
जो बचकाने लोग आजकल सोशल मीडिया पर रक्षा जैसे
मामलों पर सवाल खड़े करते हैं उन्हें अपने स्कूल-कॉलेज
के विषयों के बारे में ढंग से नहीं मालूम होगा, मगर बोलेंगे
ज़रूर. देखा देखी. कुछ मूर्खों और वाचालों द्वारा ये ट्रेंड शुरू
किया गया और उसे अंधाधुंध लोगों ने क्षण भर की प्रसिद्धि
के लिए और लाईक्स के लिए आँख मूँद कर अपना लिया.
संवेदनशील मसलों पर कुछ पूछने से पहले अपने आप की
औकात का आकलन बहुत आवश्यक है. अगर आप इस देश
के जिम्मेदार नागरिक हैं, देश के संसाधनों का सम्मान करते
हैं, सरकार द्वारा समय समय पर किये गए आवश्यक निवेदनों
और निर्देशों को समझ कर सहयोग करते हैं, व्यवस्था बनाये
रखते हैं, अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रह कर कुछ सार्थक
करते हैं, अपने अधिकारों की बात कर्तव्यों के बाद सोचते हैं,
दूसरों को अनावश्यक कष्ट नहीं देते हैं तो आपको अपने देश
के रक्षकों में पूर्ण विश्वास है.
बाकी लोगों की बात करना व्यर्थ है जो अपने मूर्खतापूर्ण प्रश्न
के जवाब में उम्मीद लगाये बैठे रहते हैं. सरकार आएगी और
उन्हें बतलायेगी कि उनकी छत पर चिड़िया ने बीट क्यूँ की.
कुछ काम नहीं है अगर तो सोशल मीडिया पर हगने से बेहतर
है घर में झाड़ू पोंछा ही लगा लो. मोबाइल ना हुआ बन्दर के
हाथ में उस्तरे जैसा हो गया. जिसे देखो वो अपना ऑनियन
जैसा ओपिनियान देने बैठा हुआ है.
कई युवाओं को देखा है फ्लर्ट और रोमांस के लिए सोशल
मीडिया पर अवतरित होते हैं और जबरन दूसरे मसलों में
कूद पड़ते हैं बिना विषय की जानकारी के. ये केवल अपनी
उपस्थिति दर्ज कराने के लिए होता है. जागरुकता का अर्थ
सिर्फ इतना नहीं है कि अपनी भां भां की, गुड मॉर्निंग और
गुड नाईट बोला और हो लिए फुर्र. जागरूकता केवल भाषण
देने का नाम भी नहीं है. आपके सार्थक विचारों और कार्यों
से कोई बदलाव आ रहा है तो वो है जागरूकता.
एक गीत सुनते हैं फिल्म आक्रमण से जो देश में रह रहे
नागरिकों को संबोधित है. आनंद बक्षी रचित ये गीत गाया
है किशोर कुमार ने और धुन तैयार की है लक्ष्मी प्यारे ने.
गीत के बोल:
इसे सुन लें बोल तो हम
आपको दे ही देंगे.
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Dekho veer jawanon-Aakraman 1975
सृजनशीलता अमूमन उत्कृष्टता के साथ ही जोड़ी जाती
है. सृजन उत्कृष्ट और निकृष्ट सभी प्रकार की चीज़ों का
हो सकता है. वैसे ही कल्पनाशीलता का हाल है. कल्पना
किसी भी चीज़ की की जा सकती है.
उम्दा सामान निर्माण के लिए उम्दा विचारों और सहयोग
की आवश्यकता होती है. कई बार आइडिया बढ़िया होता
है मगर उसका इम्प्लेमेंटेशन गडबड हो जाता है. अक्सर
हमने देखा है साहित्यिक कृतियों के नाट्य रूपांतर और
फ़िल्मी संस्करण में लेखन की कल्पना अल्पना बन जाती
है. अल्पना का अर्थ है रंगोली.
सुनते हैं फिल्म खुशबू से एक उम्दा गीत जिसे गाया है
लता मंगेशकर ने. बोल गुलज़ार के हैं और इस गीत का
संगीत पंचम ने तैयार किया है. गीत फास्ट और स्लो
दो वर्ज़न में उपलब्ध है. हम आपको स्लो वाला सुनवा
रहे हैं.
गीत के बोल:
दो नैनों में आँसू भरे हैं
निंदिया कैसे समाये
निंदिया
दो नैनों में आँसू भरे हैं
निंदिया कैसे समाये
डूबी डूबी आँखों में सपनों के साये
रात भर अपने हैं दिन में पराये
कैसे नैनों में निंदिया समाये
दो नैनों में आँसू भरे हैं
निंदिया कैसे समाये
झूठे तेरे वादों पे बरस बिताये
ज़िंदगी तो काटी ये रात कट जाये
कैसे नैनों में निंदिया समाये
दो नैनों में आँसू भरे हैं
निंदिया कैसे समाये
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Do nainon mein aansoo bhare hain-Khushboo 1975
बचपन की यादों के लिए कमोबेश यही भाव मन में
आते हैं लोगों के- कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन. वो
तो मगर आने नहीं हैं वापस. हाय रे बचपन कितना
बेफिक्र और चिंताओं से दूर होता है.
एक खुशनुमा गीत सुनते हैं फिल्म गीत गाता चल से
किशोर कुमार की आवाज़ में जिसके बोल और संगीत
दोनों रवींद्र जैन के हैं.
जन्मदिन वाला गीत है. आज किसी ना किसी बॉलीवुड
के कलाकार का जन्मदिन अवश्य होगा. गूगल पर
ढूंढ के जो आपका पसंदीदा कलाकार हो उसके जन्म
दिवस पर खुश हो लें.
गीत के बोल:
बचपन हर ग़म से बेगाना होता है
बचपन हर ग़म से बेगाना होता है
जनम का शुभ दिन हर दिन से सुहाना होता है
के बचपन हर ग़म से बेगाना होता है
होता है
बचपन हर ग़म से बेगाना होता है
हो ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ ओ ओ
कोई फ़िक़्र न चिंता मस्ती का आलम
जीवन खेल सा लगता है
जीवन खेल सा लगता है
सुख मिलते हैं राहों में फिर के
घर तो जेल सा लगता है
घर तो जेल सा लगता है
हो इसी उमर में ख़ुशियों का ख़ज़ाना होता है
के बचपन हर ग़म
हो बचपन हर ग़म से बेगाना होता है
होता है
बचपन हर ग़म से बैंगाना होता है
हम ढूँढते हैं जीवन भर वो ख़ुशियाँ
बचपन में जो पाते हैं
बचपन में जो पाते हैं
वो हँसते हुए दिन गाती वो रातें
लौट के फिर नहीं आते हैं
लौट के फिर नहीं आते हैं
हो यादों के साये में वक़्त बिताना होता है
के बचपन हर ग़म से
हो बचपन हर ग़म से बेगाना होता है
होता है
बचपन हर ग़म से बेगाना होता है
जनम का शुभ दिन हर दिन से सुहाना होता है
के बचपन हर ग़म से बेगाना होता है
होता है
बचपन हर ग़म से बेगाना होता है
होता है
बचपन हर ग़म से बेगाना होता है
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Bachpan har gham se begana-Geet gaata chal 1975
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत वाला एक गीत सुनते हैं
आखिरी दांव फिल्म से जिसे हसरत जयपुरी ने लिखा है.
गायक कलाकार हैं रफ़ी.
गीत जीतेंद्र पर फिल्माया गया है और गीत में नायिका
सायरा बानो के अलावा आप कुछ भेड़ें भी देख सकते हैं.
गीत हरियाली से भरपूर है और शानदार लोकेशंस पर
फिल्माया गया है. गीत के दूसरे अंतरे में एक बरात जा
रही है जिसमें आपको पोनी पे सवार दूल्हा दिखलाई
देगा. पोनी को दूर से देखो तो गधे जैसी नज़र आती है.
पहाड़ी इलाकों में सवारी के लिए पोनी का इस्तेमाल काफी
होता है.
गीत के बोल:
ऐसा न हो के इन वादियों में
मैं खो जाऊँ
ऐसा न हो के इन वादियों में
मैं खो जाऊँ
और तुम मुझे ढूँढा करो
और मैं कभी मिल न पाऊँ
ऐसा न हो के इन वादियों में
मैं खो जाऊँ
आई अगर मुझको नज़र
झीलों के झिलमिल दर्पण में तुम
आई अगर मुझको नज़र
झीलों के झिलमिल दर्पण में तुम
मिलने गले जाऊँगा मैं
खो जाऊँगा जलवों में गुम
और तुम मुझे आवाज़ दो
लौट कर मैं न आऊँ
ऐसा न हो के इन वादियों में
मैं खो जाऊँ
ये धुंध क्या जैसे धुआँ
मेरी ही आहों से पैदा हुआ
ये धुंध क्या जैसे धुआँ
मेरी ही आहों से पैदा हुआ
आशिक़ हूँ मैं वो दिलजला
लेकिन तुम्ही पे शैदा हुआ
देखा करो चारों तरफ़
और मैं कहीं छुप न जाऊँ
ऐसा न हो के इन वादियों में
मैं खो जाऊँ
और तुम मुझे ढूँढा करो
और मैं कभी मिल न पाऊँ
ऐसा न हो के इन वादियों में
मैं खो जाऊँ मैं खो जाऊँ
मैं खो जाऊँ
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Aise na ho ke-Akhiri daon 1975
खोया पाया हिट्स के अंतर्गत आने वाला एक गीत
सुनते हैं फिल्म मेरे सजना से. ये खोया पाया जीवन
का अभिन्न अंग है. खोया पाया व्यापक अर्थ में
गिव एंड टेक भी है. कभी ये स्वेच्छा से हो सकता
है तो कभी जबरिया.
नवीन निश्चल और राखी पर फिल्माया गया ये गीत
मजरूह की कलम से निकला है और इसकी धुन
तैयार की है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.
नवीन निश्चल ने कई अभिनेत्रियों के साथ काम किया
है मगर फेमस फ़िल्मी जोड़ियों की सूची में उनका नाम
दर्ज नहीं है.
गीत के बोल:
मैंने कुछ खोया है मैंने कुछ पाया है
तेरे प्यार में
मैंने कुछ खोया है मैंने कुछ पाया है
तेरे प्यार में
मेरे कुछ वादे हैं मेरे कुछ अरमां हैं
मेरे कुछ सपने हैं
हाँ मैंने कुछ खोया है मैंने कुछ पाया है
तेरे प्यार में
खफ़ा होने का ये कोई तौर नहीं
तेरे सिवा मेरा कोई और नहीं
खफ़ा होने का ये कोई तौर नहीं
तेरे सिवा मेरा कोई और नहीं
दुनिया की आँखों से बचेंगे हम कहाँ
और करीब और करीब आ जाने जहाँ
मैं तेरे पीछे हूँ कोई मेरे पीछे है
दुश्मन इतने हैं
हाँ मैंने कुछ खोया है मैंने कुछ पाया है
तेरे प्यार में
तेरी भोली अदा पे बेचैन हूँ मैं
अभी तुझे पता नहीं कौन हूँ मैं
तेरी भोली अदा पे बेचैन हूँ मैं
अभी तुझे पता नहीं कौन हूँ मैं
मन मेरा पापी है बचा मुझे सनम
हँसो नहीं जो मैं कहूँ सच है तेरी कसम
अरे क्या जाने तू नहीं पहचाने तू
मुझे गम कितने हैं
हाँ मैंने कुछ खोया है मैंने कुछ पाया है
तेरे प्यार में
मेरे कुछ वादे हैं मेरे कुछ अरमां हैं
मेरे कुछ सपने हैं
मैंने कुछ खोया है मैंने कुछ पाया है
तेरे प्यार में
हाँ मैंने कुछ खोया है मैंने कुछ पाया है
तेरे प्यार में
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Maine kuchh khoya hai-Mere sajna 1975
अमूमन फ़िल्मी नायिकाओं की औसत लम्बाई पांच फीट
तीन इंच के आसपास होती है. कुछ नायिकाएं इससे भी
कम लम्बाई वाली हैं. औसत लम्बाई ज्यादा होने की वजह
कुछ लंबी अभिनेत्रियों है.
बॉलीवुड की स्माल एंड स्लिम अर्थात पटीट हीरोयिंस में
कुछ ऐसी हैं जिन्होंने दर्शकों के दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी.
इनमें से एक कुमकुम के बारे में हमने काफी चर्चा की है
इधर.
आज एक गीत सुनते हैं राखी पर फिल्माया गया जिसमें
राखी काफी युवा नज़र आती हैं. फिल्म का नाम मेरे सजना
है जिसमें उनकी जोड़ी नवीन निश्चल के साथ है. गीत लिखा
है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसे लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
ने संगीतबद्ध किया है.
हँसने की ध्वनि को बोलों में उतारना आसान काम नहीं.
गीत में नायिका बावली जैसे गीत गा रही है और इसका
फिल्मांकन अच्छा है.
गीत के बोल:
ये कौन हँसा
हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ
अरे कौन हँसा
हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ
ये कौन हँसा
हं हं हं हं हं हं हं
अरे कौन हँसा
हूँ हूँ ऊं
ऐसा लगा मुझे जैसे मेरी गली में
कोई धीरे से आ के बड़े प्यार से पुकारे
मेरा नाम
कैसे हा हा हा हा हा हा
ये कौन हँसा
हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ
अरे कौन हँसा हूँ
ऐसा लगा मुझे जैसे मेरी गली में
कोई धीरे से आ के बड़े प्यार से पुकारे
मेरा नाम ऐ
हं हं हं हं हं हं हं
ये कौन हँसा
हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ
अरे कौन हँसा
क्या कहूँ कभी ऐसी हो जाती हूँ मगन
मैं तो चुप रहूँ मगर हँसता है तन बदन
क्या कहूँ कभी ऐसी हो जाती हूँ मगन
मैं तो चुप रहूँ मगर हँसता है तन बदन
ये ना जानूँ कैसे आ आ आ आ आ आ
ये ना जानूँ कैसे बैठे बैठे ही जैसे
अपने ही छुए से गुदगुदी सी उठे है मेरे राम
आ हा हा हा हा हा
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो कोई ना हो लेकिन इतना तो है ज़रूर
मैं ठहर ठहर जाऊँ चल चल के थोड़ी दूर
हो कोई ना हो लेकिन इतना तो है ज़रूर
मैं ठहर ठहर जाऊँ चल चल के थोड़ी दूर
धत कैसी हूँ मैं आ आ आ आ आ आ
धत कैसी हूँ मैं जब भी छाये अँधेरे
लगे पीछे से मेरे कोई मेरा दुपट्टा रहा थाम
उई माँ हा हा हा हा हा हा हा
ये कौन हँसा
हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ
अरे कौन हँसा
मै नहीं नहीं नहीं
फिर कौन हँसा
कौन फिर ये कौन हँसा
मैं नहीं नहीं नहीं
फिर कौन हँसा
कौन ऊँ हूँ मैं नहीं
हं हं हं हं हं हं हं
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Ye kaun hansa-Mere sajna 1975
सन १९५८ में एक फिल्म आई थी-अनाड़ी जिसके राज कपूर नायक हैं. उसके १७ साल बाद एक और इसी नाम से फिल्म अवतरित हुई बॉलीवुड की सरज़मीं पर जिसमें राज कपूर के छोटे भाई शशि कपूर नायक हैं.
गीत में आपको शशि कपूर संग मौसमी चटर्जी नज़र आएँगी. बैकग्राउंड में उत्पल दत्त और कबीर बेदी नज़र आयेंगे. नायक जिस लुटिया पर अर्थात जिस नाव पर बैठा है वो डूबने वाली है. बाकी क्या हुआ फिल्म में देखिये
गीत मजरूह सुल्तानपुरी का है और संगीत लक्ष्मीकांत कुदालकर एवं प्यारेलाल शर्मा की जोड़ी का. गाना गाया है किशोर कुमार ने.
गीत के बोल:
तेरे बग़ैर जाने जाना सोचता हूँ यही मैं दीवाना हाय तेरे बग़ैर जाने जाना सोचता हूँ यही मैं दीवाना के अकेला मैं जियूंगा कैसे तेरे बग़ैर जाने जाना सोचता हूँ यही मैं दीवाना के अकेला मैं जियूंगा कैसे तेरे बग़ैर जाने जाना सोचता हूँ यही मैं दीवाना
ये पलकें जिनमें हैं मेरे सपने ये पलकें जिनमें हैं मेरे सपने ये लब जो लगते हैं मेरे अपने इनको मैं गँवा दूँगा हो तो रहूँगा कैसे कैसे कैसे
तेरे बग़ैर जाने जाना सोचता हूँ यही मैं दीवाना
फिरूँगा हो हो के मैं परीशाँ फिरूँगा हो हो के मैं परीशाँ छुपाये आँखों में लाख तूफ़ाँ ग़म के इन तूफ़ानों को हो मैं पियूँगा कैसे कैसे कैसे
तेरे बग़ैर जाने जाना सोचता हूँ यही मैं दीवाना
गज़ब है जीवन की तेज धारा गज़ब है जीवन की तेज धारा उड़ा दें जो लहरें तन हमारा मैं तनहा किनारे तक हो पहुचूंगा कैसे कैसे कैसे
तेरे बग़ैर जाने जाना सोचता हूँ यही मैं दीवाना के अकेला मैं जियूंगा कैसे तेरे बग़ैर जाने जाना सोचता हूँ यही मैं दीवाना ....................................................................................... Tere baigari jaane jaana-Anadai 1975
कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर सुनते हैं एक फ़िल्मी भजन सन १९७५ की फिल्म से जिसे गाया है किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने.
राजेंद्र कृष्ण ने कई कृष्ण भक्ति गीत लिखे हैं और उनमें से कुछ आप इधर सुन चुके हैं. गीत की धुन तैयार की है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.
गीत के बोल:
कृष्णा कृष्णा कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा
कृष्णा कृष्णा बोलो कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा बोलो कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा मोह-माया के तोड़ के ताले इसी नाम से प्रीत लगा ले मन मन्दिर में ज्योत जगा ले मिट जायेगी तृष्णा कृष्णा कृष्णा बोलो कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा बोलो कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा मोह-माया के तोड़ के ताले इसी नाम से प्रीत लगा ले मन मन्दिर में ज्योत जगा ले मिट जायेगी तृष्णा कृष्णा कृष्णा बोलो कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा
बंसी की धुन में खो जा रे बंसी की धुन में खो जा रे मोहन मुरारी का हो जा रे मोहन मुरारी का हो जा रे तन तेरा बन जाये बंसी गाये कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा बोलो कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा बोलो कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा
जोगन बनूंगी मैं तो सांवरे की जोगन बनूंगी मैं तो सांवरे की ये है लगन मन बाँवरे की ये है लगन मन बाँवरे की कुञ्ज गलियां में शाम सवेरे गाँऊं कृष्णा कृष्णा
मोह-माया के तोड़ के ताले इसी नाम से प्रीत लगा ले मन मन्दिर में ज्योत जगा ले मिट जायेगी तृष्णा कृष्णा कृष्णा बोलो कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा ………………………………………….. Krishna Krishna-Naya din nayi raat 1975
तरह तरह की ध्वनियाँ निकालने और निकलवाने में माहिर
आर डी बर्मन ने स्वयं अपने ही लिए एक चैलेन्ज जैसा हमेशा
प्रस्तुत किया. एक्स्पेरिमेंटेशन के साथ साथ किसी गाने को
लोकप्रिय बना पाना काफी टेढ़ी खीर होता है. फिल्म काला सोना
का सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला गीत यही है. भले
ही फिल्म में और भी अच्छे गीत हों मगर इसकी अपील कुछ
ज्यादा है. ट्रेक ओवेरलेप इसकी एक वजह है उसके अलावा धुन
भी बढ़िया है.
गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने शायद सबसे ज्यादा वैराइटी देखी
गीतों के मामले में. अटपटे और अनूठे मीटरों में बोलों को फिट
करने में उन्हें खासी मशक्कत हुई होगी. ये कसरत उनसे सबसे
ज्यादा आर डी बर्मन ने ही करवाई होगी.
गीत के बोल:
कोई आया आने भी दे
कोई गया जाने भी दे
कोई आया आने भी दे
कोई गया जाने भी दे
ला ला ला तुझको तो है मस्ती में जीना जी ले हे हे
कोई आया आने भी दे
कोई गया जाने भी दे
तू तो है दीवाना बहके जा महके जा ख़ुशी के नशे में
ऐसे ही मज़े में आ हा
तू तो है दीवाना बहके जा महके जा ख़ुशी के नशे में
ऐसे ही मज़े में आ हा
महफ़िल में रंग भरता जा सुबह तलक रंगीले
कोई आया आने भी दे
कोई गया जाने भी दे
ला ला ला तुझको तो है मस्ती में जीना जी ले हे हे
कोई आया आने भी दे
कोई गया जाने भी दे
झूमे जा मस्ताने छेड़े जा तराने कल क्या हो क्या जाने
जाने ये तुम्हारी बला
झूमे जा मस्ताने छेड़े जा तराने कल क्या हो क्या जाने
जाने ये तुम्हारी बला
आगे भी होने दे अंधेरा सपने तो हैं चमकीले हे हे हे
कोई आया आने भी दे
कोई गया जाने भी दे
ला ला ला तुझको तो है मस्ती में जीना जी ले हे हे
कोई आया आने भी दे
कोई गया जाने भी दे
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Koi aaya aane bhi de-Kaala Sona 1975
श्याम की बंसी कितनी मोहक और मधुर रही होगी वो तो द्वापर
युग के भाग्यशाली लोग ही सुन पाए. उसका जो विवरण मिलता
है उससे यही मालूम होता है कि उनसे बड़ा बांसुरी बजाने वाला
सृष्टि ने न देखा और न ही आगे देखने को मिलेगा.
सुनते हैं श्याम की बंसी के विवरण वाला एक गीत सन १९७५ की
फिल्म गीत गाता चल से. इसे जसपाल सिंह और आरती मुखर्जी
ने गाया है. गीत के बोल और संगीत रवींद्र जैन के हैं. फ़िल्मी भजन
यूँ तो लोकप्रिय हो ही जाते हैं मगर इसकी बात कुछ खास है. इसके
बोल और धुन दोनों मोहक हैं.
गीत के बोल:
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
सांवरे की बंसी को बजने से काम
सांवरे की बंसी को बजने से काम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
हो जमुना की लहरें बंसीबट की छैयां
किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैया
जमुना की लहरें बंसीबट की छैयां
किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैया
श्याम का दीवाना तो सारा बृजधाम
श्याम का दीवाना तो सारा बृजधाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
सांवरे की बंसी को बजने से काम
सांवरे की बंसी को बजने से काम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
ओ कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाए
जिसके मन भाये वो इसी के गुण गाये
कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाए
जिसके मन भाये वो इसी के गुण गाये
कौन नहीं
कौन नहीं बसी की धुन का गुलाम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी कन्हैया तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
………………………………………………………
Shyam teri bansi pukare-Geet gaata chal 1975
उई हुई शब्द आपने ज़्यादातर राजेन्द्रनाथ को परदे
पर बोलते सुना होगा. इन्हें गीतों में भी हमने काफ़ी
सुन लिया है. हम नये गीतों की बात नहीं कर रहे हैं
जनाब और जनाबियों, ये पुराने गानों की बात चल
रही है. नये गीत तो डिक्शनरी को अपग्रेड करने का
काम कर रहे हैं. कमबख्त हिंदी के भी एब्रिवेशन
आ गये- भू चू ले दे(भूल चूक लेनी देनी)
सन १९७५ की फिल्म मेरे सजना से अगला गीत
सुनते हैं जो कहानी की मांग के अनुसार ही है.
नायिका कई दिन से नहाई नहीं है अतः वो पोखर
में डुबकी लगा लगा के नहा रही है. पीपिंग टॉम
जो कि फिल्म का नायक हैं, खड़ा हैं पेड़ के पीछे.
झरना भी बह रहा है और झरने का पानी काफ़ी
साफ़ और लाभदायी माना जाता है.
नायक नायिका की शादी हो चुकी है और अभी तक
कहानी के अनुसार दोनों का मिलन नहीं हुआ है.
गीत के प्रणय निवेदन के बाद दोनों का मिलाप इस
गीत के तुरंत बाद होता है.
मजरूह सुल्तानपुरी की रचना है और लता मंगेशकर
की आवाज़. लक्ष्मी प्यार की धुन है.
गीत के बोल:
पानी की बूँद ऐसी ऐसी छुई
उई उई
जैसे चुभ गयी सुई
मैं जवान हुई
मैं मैं जवान हुई
ठन्डे ठन्डे पानी में जले मेरा तन
तड़प रहा लह्तों के तले मेरा तन
कोई मुझे दखो रे मैं क्या गई बन
ठन्डे ठन्डे पानी में जले मेरा तन
मेरी जान गई दैया जान गई
हाय हाय जान गई
मैं जवान हुई
मैं मैं जवान हुई
मैं तो यही समझी थी पवन है अनजान
जगा रही धडकन में मिलन के अरमान
उठा रही नस नस में अजब से तूफ़ान
मैं तो यही समझी थी पवन है अनजान
वो पहचान गई लो पहचान गई
हो पहचान गई
मैं जवान हुई
मैं मैं जवान हुई
लहर अरी चंचल न पकड़ मेरा हाथ
मचल नहीं पागल मैं समझ गई बात
यही लागे ऐसे ऐसे में होता कोई साथ
लहर अरी चंचल न पकड़ मेरा हाथ
जा रे मान गई दैया मान गई
हाय हाय मान गई
मैं जवान हुई
पानी की बूँद ऐसी ऐसी छुई
उई उई
जैसे चुभ गयी सुई
मैं जवान हुई
मैं मैं जवान हुई
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Paani ki boond aisi chhui-Mere Sajna 1975
नायिका अरुण ईरानी का आर डी बर्मन के संगीत से काफी
जुड़ाव मिलेगा आपको. मेरा मतलब कई ऐसे उल्लेखनीय गाने
हैं जो अरुणा ईरानी पर फिल्माए गए हैं और उनका संगीत
पंचम ने तैयार किया है.
एक गाना है खेल खेल में फिल्म का जो खूब बजा करता था
७० के दशक के उत्तरार्ध में. आशा भोंसले की आवाज़ वाला ये
गीत युगल गीत है जिसमें संगीतकार की भी आवाज़ है.
ये ट्रेंड सेटर गीतों में से एक है. आजकल की पीढ़ी के कई
संगीतकार इस तरह के गीत बना रहे हैं. हाँ, शोरगुल काफी
बढ़ गया है आज के गीतों में.
गीतकार हैं गुलशन बावरा.
गीत के बोल:
सपना मेरा टूट गया
तू ना रहा कुछ ना रहा
सपना मेरा टूट गया
अरे तू ना रहा कुछ ना रहा
रोती हुईं यादें मिलीं
बस और मुझे कुछ ना मिला
आपको आपको मालूम है
आपकी तरह मेरा भी इक सुंदर साजन था
उसकी आँखों में नशा बाज़ू में ताक़त
और दिल में हिम्मत थी
बिजली की तरह नाचता हुआ वो मेरे पास आता था
गाता था नाचता था
मैं मैं मैं पागल हो जाती थी
देखो देखो वो आ गया सिर्फ़ मेरे लिये मेरे लिये
आ जा मेरी बाहों में आ प्यार भरी राहों में आ
सुन ले मचलते हुए दिल की सदा रे दिल की सदा
हो हो
दिल कह रहा है तेरा साथ है ये तेरा मेरा
अब ज़िन्दगी में कभी हो ना जुदा रे
हो ना जुदा
ला ला ला ला ला
राजा मुझे छोड़ के ना जा
चला गया
सपना मेरा टूट गया
अरे वो ना रहा कुछ ना रहा
रोती हुईं यादें मिलीं
बस और मुझे कुछ ना मिला
हह बार बार हम मिलते थे
पर हाँ एक दिन मेरा हाथ पकड़ कर
मुझे खींचता हुआ वो ले गया
और एक सुंदर गाडी में बिठा कर बोला
हह ये तेरे लिये है रानी
राजा गाडी तो हवा से बातें कर रही है
देखो ना मुझे डर लग रहा है
सुनो ना राजा आहिस्ता प्लीज़ आहिस्ता
गाड़ी रुक गई
अरे मैं तो इसकी बाहों में हूँ
शरमाना छोड दे तू घबराना छोड़ दे तू
आज तो बुझा दे मेरे दिल की लगी रे दिल की लगी
ओ ओ
हम तो हैं जीवन साथी मैं हूँ दिया तू है बाती
प्यार में यूँ जलने का है नाम ज़िन्दगी रे
नाम ज़िन्दगी
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हा हा हा हा हा
पगले सपने भी कहीं सच होते हैं
सपना ही था टूट गया
सपना मेरा टूट गया
वो ना रहा कुछ ना रहा
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Sapna mera toot gaya-Khel khel mein 1975
१९७५ की फिल्म राजा का निर्देशन के शंकर ने किया था.
फिल्म में ऋषि कपूर, सुलक्षणा पंडित, प्रेम चोपड़ा, जगदीप,
असरानी और अरुणा ईरानी जैसे कलाकर मौजूद हैं.
फिल्म चले या न चले, कुछ गीत ऐसे निकल के बाहर
आते हैं पब्लिक को लुभाने जैसे रेगिस्तान में आक के फूल.
फिल्म में कुछ कर्णप्रिय गीत हैं.
गीत के बोल:
मेरे रूठे बलम से कह दो
मेरे रूठे बलम से कह दो ए मदमस्त बहारों
मारो जान से मारो हो लेकिन ताना मत मारो
रे मारो रे मारो रे
मेरे रूठे बलम से कह दो ए मदमस्त बहारों
मारो जान से मारो हो लेकिन ताना मत मारो
माफ़ नहीं कर सकते तो दे दो कोई सज़ा
हाय रे इतनी बात में रूठ गये ऐसा गुस्सा भी क्या
माफ़ नहीं कर सकते तो दे दो कोई सज़ा
हाय रे इतनी बात में रूठ गये ऐसा गुस्सा भी क्या
कुछ भी कर लो कुछ भी कह लो मेरा नाम पुकारो
मारो जान से मारो हो लेकिन ताना मत मारो
मेरे रूठे बलम से कह दो ए मदमस्त बहारों
मारो जान से मारो हो लेकिन ताना मत मारो
प्यार मोहब्बत करने की रुत है छोटी बड़ी
हाय रे लड़ने को तो उमर पड़ी है लड़ लेना कभी
प्यार मोहब्बत करने की रुत है छोटी बड़ी
हाय रे लड़ने को तो उमर पड़ी है लड़ लेना कभी
दिल ना तोडो साथ ना छोड़ो बिगड़ी बात संवारो
मारो जान से मारो हो लेकिन ताना मत मारो
रे मारो रे ताना मत मारो
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Mere roothe balam se-Raja 1975
सन १९७५ की फिल्म आक्रमण से एक युगल गीत सुनते हैं जिसे
किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने गाया है. राजेश खन्ना फिल्म
के प्रमुख कलाकार हैं.
राजेश खन्ना पर फिल्माए गए अधिकांश गीत जनता पसंद करती
है. फिल्म जगत के चिनिन्दा कलाकार ऐसे रहे हैं या वर्तमान में
हैं जिनके गीत की वीडियो सबसे ज्यादा देखे जाते हैं.
आज जो गीत हम आपको सुनवा रहे हैं उसे राकेश रोशन और रेखा
पर फिल्माया गया है. आनंद बक्षी और लक्ष्मी प्यारे की टीम ने इस
गीत को तैयार किया है.
गीत के बोल:
ये मौसम आया है कितने सालों में
आ जा खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
आ जा के खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
ये मौसम आया है कितने सालों में
आ जा खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
आ जा के खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
आंखों का मिलना खूब रहा है
आंखों का मिलना खूब रहा है
ये दिल दीवाना डूब रहा है
मतवाले नैनों के
इन शरबती नर्गिसी प्यालों में
आ जा खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
आ जा के खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
ये मौसम आया है कितने सालों में
आ जा खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
आ जा के खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
कहना नहीं था कहना पड़ा है
कहना नहीं था कहना पड़ा है
प्यार का जादू सबसे बड़ा है
मेरा दिल ना आ जाये
इस प्यार की मदभरी चालों में
आ जा खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
आ जा के खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
ये मौसम आया है कितने सालों में
आ जा खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
आ जा के खो जायें ख्वाबों ख्यालों में
ख्वाबों ख्यालों में ख्वाबों ख्यालों में
ख्वाबों ख्यालों में
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Ye mausam aaya hai-Aakraman 1975
सन १९७५ की सुपर डुपर हिट धार्मिक फिल्म है संतोषी माँ से
एक और गीत सुनते हैं जिसे मन्ना डे ने गाया है.
प्रेरणादायी और हिम्मत बंधाने वाला गीत है ये. गीत बैकग्राउंड
में बज रहा है.
गीत के बोल:
मत रो मत रो मत रो
मत रो मत रो आज राधिके
तू सुन ले बात हमारी
तू सुन ले बात हमारी
जो दुःख से घबरा जाए
वो नहीं हिंद की नारी
वो नहीं हिंद की नारी
मत रो मत रो मत रो
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Mat ro aaj radhike-Jai Santoshi Maa 1975
नवरात्रि के पावन अवसर पर एक और फ़िल्मी भजन सुनते हैं.
इसे महेंद्र कपूर ने गाया है. बोल कवि प्रदीप के हैं और इसका
संगीत तैयार किया है सी अर्जुन ने.
ये भी एक लोकप्रिय भजन है जिसे आपने एक ना एक बार
अवश्य ही सुना होगा.
गीत के बोल:
यहाँ वहाँ जहां तहां
मत पूछो कहाँ कहाँ
है संतोषी माँ
अपनी संतोषी माँ
अपनी संतोषी माँ
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Yahan wahan jahan tahan-Jai Santoshi Maa 1975
नवरात्रि की द्वितीया के अवसर पर सुनें एक फ़िल्मी भजन
जय संतोषी माँ फिल्म से.
इसे उषा मंगेशकर ने गाया है. गीत है कवि प्रदीप का और
इसकी धुन तैयार की है सी अर्जुन ने.
गीत के बोल:
करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं
स्वीकार करो माँ
मजधार में मैं अटकी बेडा पार करो माँ
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Karti hoon tumhara vrat-Jai Santohi Maa 1975