खोया हुआ दिल मिल गया-डाकू मंसूर १९६१
पहचाने गायक. कुछ गीत ऐसे भी पहचाने जाते हैं. सनशाइन मूवीज़
नामक संस्था ने डाकू मंसूर फिल्म का निर्माण किया सन १९६१ में.
ठीक दस साल पहले एक संस्था ने बड़े साहब नाम की फिल्म का
निर्माण किया था उसका नाम है-सनशाइन पिक्चर्स. बड़े साहब में
निसार बज्मी का संगीत है. निसार बज्मी काफी जाना पहचाना नाम
है और अपने देश से ज्यादा लोग उन्हें पडोसी देश में पहचानते हैं.
फिल्म डाकू मंसूर में कृष्ण कमल नामक संगीतकार का संगीत है.
बोल लिखे हैं दो गीतकारों ने-पंडित गाफिल और चाँद पंडित ने.
प्रस्तुत गीत पंडित गाफिल का लिखा हुआ है. गीत आशा भोंसले ने
गाया है जिन्होंने गुमनाम संगीतकारों के लिए काफी गीत गाये.
फिल्म के संगीतकार काफी प्रतिभाशाली हैं. जो गीत आपने पहले
सुना उसमें शंकर जयकिशन का प्रभाव है तो प्रस्तुत गीत में आपको
ओ पी नैयर के संगीत की याद आएगी.
गीत के बोल:
खोया हुआ दिल मिल गया मिल गया
खोया हुआ दिल मिल गया मिल गया
कश्ती को साहिल मिल गया मिल गया
कश्ती को साहिल मिल गया मिल गया
खोया हुआ दिल मिल गया मिल गया
मौजों में डूबा है जहां
नाचे ज़मीन आसमान
बिछड़े हुए दिल मिले
और है मोहब्बत जवान
बिस्मिल से बिस्मिल मिल गया मिल गया
खोया हुआ दिल मिल गया मिल गया
जोबन पे आई है बहार
आँखों में छाया है खुमार
सुन ले ये दिल की सदा
तेरा ही था इंतज़ार
आँखों का घायल मिल गया मिल गया
खोया हुआ दिल मिल गया मिल गया
आँखों की मस्ती लूट के
दिल की ये बस्ती लूट ले
ऐ मेरे दिलरुबा मेरे
ये खुद बरस्ती लूट में
दिल से तेरा दिल मिल गया मिल गया
खोया हुआ दिल मिल गया मिल गया
कश्ती को साहिल मिल गया मिल गया
खोया हुआ दिल मिल गया मिल गया
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Khoya hua dil mil gaya-Daku Mansoor 1961

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