Jul 22, 2016

जो सिर्फ खुशी का मोल करे-मधु मालती १९७८

सन १९७८ की एक फिल्म है मधु मालती. बासु भट्टाचार्य
निर्देशित इस फिल्म में सचिन सारिका मुख्य भूमिकाओं में
हैं. फिल्म में गीत संगीत दोनों रवींद्र जैन का है. आज सुनें
मुकेश का गीत जो दुर्लभ है और कम सुना गया है.

प्रेरणादायक गीत है ये और इसमें सन्देश है हर एक के लिए.
‘सुख आता है तो अपने संग अपने साथी ले आता है’

रवींद्र जैन ने बतौर गीतकार काफी सुन्दर और अर्थपूर्ण गीत
लिखे हैं. ये उनकी गंभीर सोच को दर्शाता है.



गीत के बोल:

जो सिर्फ खुशी का मोल करे
जो सिर्फ खुशी का मोल करे
वो दोस्त नहीं सौदागर है
जो अपने ही जीने पर मरे
जो अपने ही जीने पर मरे
वो दोस्त नहीं सौदागर है
जो सिर्फ खुशी का मोल करे

सुख आता है तो अपने संग
अपने साथी ले आता है
सुख आता है तो अपने संग
अपने साथी ले आता है
है कौन कहाँ तक का हमदम
दुःख ही तो हमें बतलाता है
सुख में संग और दुःख से डरे
हो सुख में संग और दुःख से डरे
वो दोस्त नहीं सौदागर है

जो सिर्फ खुशी का मोल करे

हम ऐसा साथी ढूंढते हैं
जो हमको गम का मीत कहे
हम ऐसा साथी ढूंढते हैं
जो हमको गम का मीत कहे
गम हो उसको और दर्द हमें
नीर उसका मेरी आँखों से बहे
जो हाथ फकत का भेद धरे
जो हाथ फकत का भेद धरे
वो दोस्त नहीं सौदागर है

जो सिर्फ खुशी का मोल करे
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Jo sirf khushi ka mol kare-Madhu Malti 1978

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