मान मेरा एहसान अरे नादान-आन १९५२
घुमते, याचना करते, टपोरी हरकतें करते, या लार टपकाते ही
दिखाया जाता है. हर सौ गीतों में २-३ ही ऐसे होते हैं जिनमें
नायिका नायक के पीछे पड़ती हो. हर १००० गीत में एक आध
ही ऐसा मिलेगा जिसमें नायक भाव खा रहा हो और एहसान
जाता रहा हो. ये हम रोमांटिक गीतों के बारे में चर्चा कर रहे
हैं.
एक ऐसा ही गीत है फिल्म आन से जो काफी लोकप्रिय भी है.
इसे रफ़ी ने गाया है. शकील बदायूनीं का लिखा गीत है जिसकी
तर्ज़ बनाई है नौशाद ने और दिलीप कुमार परदे पर इसे गा
रहे हैं.
गीत के बोल:
मान मेरा अहसान अरे नादान
के मैने तुझसे किया है प्यार
मैने तुझसे किया है प्यार
मेरी नज़र की धूप न भरती रूप
तो होता हुस्न तेरा बेकार
मैने तुझसे किया है प्यार
मान मेरा अहसान अरे नादान
के मैने तुझसे किया है प्यार
मैने तुझसे किया है प्यार
उलफ़त न सही नफ़रत ही सही
उलफ़त न सही नफ़रत ही सही
इस को भी मुहब्बत कहते हैं
तू लाख छुपाए भेद मगर हम
दिल में समाए रहते हैं
तेरे भी दिल में आग उठी है जाग
ज़बां से चाहे न कर इक़रार
मैने तुझसे किया है प्यार
मेरी नज़र की धूप न भरती रूप
तो होता हुस्न तेरा बेकार
मैने तुझसे किया है प्यार
अपना न बना लूँ तुझको अगर
अपना न बना लूँ तुझको अगर
इक रोज़ तो मेरा नाम नहीं
पत्थर का जिगर पानी कर दूँ
ये तो कोई मुश्किल काम नहीं
छोड़ दे अब ये खेल तू कर ले मेल
मेरे संग मान ले अपनी हार
मैने तुझसे किया है प्यार
मान मेरा अहसान अरे नादान
के मैने तुझसे किया है प्यार
मैने तुझसे किया है प्यार
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Maan mera ehsaan are nadaan-Aan 1952
Artists: Dilip Kumar, Nadira

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