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Aug 1, 2020

मोहे भूल गए साँवरिया-बैजू बावरा १९५२

आज बॉलीवुड की जिन शख्सियतों का जन्मदिन हैं उनमें से एक
हैं हिंदी सिनेमा इतिहास की सबसे प्रभावशाली अभिनेत्रियों में से
एक मीना कुमारी.

इसके अलावा अभिनेता और निर्देशक भगवान, प्रसिद्ध संवाद लेखक
राही मासूम रज़ा और गीतकार मोती बी ए भी आज ही के दिन पैदा
हुए थे.

विजय भट्ट निर्देशित फिल्म बैजू बावरा सिनेमा इतिहास की कुछ
शानदार फिल्मों में से एक है. फिल्म के कथानक और इसके संगीत
में गज़ब का आकर्षण है.

आज हम सुनेंगे लता मंगेशकर का गाया हुआ इस फिल्म का सबसे
लोकप्रिय गीत. दर्द भरे गीत वैसे भी ज्यादा लोकप्रिय होते हैं और
लंबे समय तक सुने जाते हैं. इसकी अलौकिकता में शुरू की पंक्तियाँ
काफी हद तक जिम्मेदार हैं.

गीत शकील बदायूनीं का है और संगीत नौशाद का.




गीत के बोल:

जो मैं ऐसा जानती
के प्रीत किये दुख होय
हो ओ ओ नगर ढिंढोरा पीटती
के प्रीत न करियो कोय

मोहे भूल गए साँवरिया भूल गए साँवरिया
मोहे भूल गए साँवरिया भूल गए साँवरिया
आवन कह गये अजहुं न आये
आवन कह गये अजहुं न आये
लीन्ही न मोरी खबरिया
मोहे भूल गए साँवरिया भूल गए साँवरिया

दिल को दिए क्यों दुख बिरहा के
तोड़ दिया क्यों महल बना के
दिल को दिए क्यों दुख बिरहा के
तोड़ दिया क्यों महल बना के
आस दिला के ओ बेदर्दी
आस दिला के ओ बेदर्दी
फेर ली काहे नजरिया

मोहे भूल गए साँवरिया भूल गए साँवरिया

नैन कहे रो रो के सजना
देख चुके हम प्यार का सपना
नैन कहे रो रो के सजना
देख चुके हम प्यार का सपना
प्रीत है झूठी प्रीतम झूठा
प्रीत है झूठी प्रीतम झूठा
झूटी है सारी नगरिया

मोहे भूल गए साँवरिया भूल गए साँवरिया
……………………………………………..
Mohe bhool gaye sanwariya-Baiju Bawra 1952

Artist: Meena Kumari

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Apr 16, 2020

दिल-ए-बेताब को सीने से-पालकी १९६७

इस ब्लॉग पर हमने आपको सुमन कल्याणपुर और रफ़ी
के गाये काफी युगल गीत सुनवाये हैं. फेमस और रेयर
दों टाइप के सुन चुके हैं आप लोग.

आज एक लोकप्रिय वाला सुन लेते हैं. फिल्म पालकी का
ये गीत अपने पहले अंतरे के अनूठेपन के लिए जाना जाता
है. हुस्न की फायर और इश्क की फायर ब्रिगेड.

बोल शकील बदायूनीं के हैं और संगीत नौशाद का.




गीत के बोल:

दिल-ए-बेताब को सीने से लगाना होगा
आज पर्दा है तो कल सामने आना होगा
आपको प्यार का दस्तूर निभाना होगा
दिल झुकाया है तो सर को भी झुकाना होगा
दिल-ए-बेताब को सीने से लगाना होगा

अपनी सूरत को तू ए जान-ए-वफ़ा यूँ न छुपा
गर्मी-ए-हुस्न से जल जाये न आँचल तेरा
लग गई आग तो मुझको ही बुझाना होगा
दिल झुकाया है तो सर को भी झुकाना होगा
दिल-ए-बेताब को सीने से लगाना होगा

आज आलम है जो दिल का वो बताये न बने
पास आये न बने दूर भी जाये न बने
मैँ हूँ मदहोश मुझे होश में लाना होगा
आज पर्दा है तो कल सामने आना होगा
आपको प्यार का दस्तूर निभाना होगा

आप तो इतने क़रीब आ गये अल्लाह तौबा
क्या करें आप से टकरा गये तौबा तौबा
इश्क़ इन बातों से रुसवा-ए-ज़माना होगा

दिल-ए-बेताब को सीने से लगाना होगा
…………………………………………………..
Dil-e-betaab ko seene se-Palki 1967

Artists: Waheeda Rehman, Rajendra Kumar

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Apr 10, 2020

ए शहर-ए-लखनऊ-पालकी १९६७

लखनऊ देश के पुराने शहरों में से एक है जिसने इतिहास के
कई बदलाव देखे. नवाबी दौर में इसे खूब लोकप्रियता मिली.
आज ये उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी है. रेल और सड़क
मार्ग से ये तकरीबन उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख नगरों से जुड़ा
हुआ है.

१९६७ की फिल्म पालकी की कहानी इसी शहर को समर्पित है
शायद. फिल्म के टाइटल्स में लखनऊ को याद करता हुआ ये
गीत है जिसे शकील बदायूनीं ने लिखा है और जिसका संगीत
नौशाद ने तैयार किया है. इसे रफ़ी ने गाया है और परदे पर
इस पर राजेंद्र कुमार ने होंठ हिलाये हैं.

गीतकार शकील बदायूनीं के नाम में जिस बदायूं का जिक्र है
वो लखनऊ के पास ही का एक क़स्बा है. गीतकार इसमें शहर
के कुछ मोन्युमेंट्स के नाम और जोड़ देते तो ये टूरिज़्म वालों
का सिग्नेचर गाना बन जाता.



गीत के बोल:

ए शहर-ए-लखनऊ तुझे मेरा सलाम है
ए शहर-ए-लखनऊ तुझे मेरा सलाम है
तेरा ही नाम दूसरा जन्नत का नाम है
ए शहर-ए-लखनऊ

मेंरे लिए बहार भी तू गुलबदन भी तू
परवाना और शमा भी तू अंजुमन भी तू
जुल्फों की तरह महकी हुई तेरी शाम है
ए शहर-ए-लखनऊ

कैसा निखार तुझमे है क्या क्या है बांकपन
ग़ज़लें गली गली हैं तो नगमे चमन चमन
शायर के दिल से पूछ तेरा क्या मक़ाम है

ए शहर-ए-लखनऊ तुझे मेरा सलाम है
तेरा ही नाम दूसरा जन्नत का नाम है
ए शहर-ए-लखनऊ

तू वो है लोग शहरे निगारा कहें जिसे
फ़िरदौस-ए-हुस्न-ए-रश्क-ए-बहारा कहें जिसे
तेरे हर एक अदा में वफ़ा का पयाम है

ए शहर-ए-लखनऊ तुझे मेरा सलाम है
तेरा ही नाम दूसरा जन्नत का नाम है
ए शहर-ए-लखनऊ
……………………………………………………..
Ae shahar-e-lakhnau-Palki 1967

Artists: Rajendra Kumar

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Mar 27, 2020

मेरा सलाम ले जा–उड़न खटोला १९५५

आज रात्रि सुनते हैं फिल्म उड़न खटोला से एक गाना
जिसमें नायिका घोडागाड़ी चला रही है. १९५५ की
फिल्म उड़न खटोला एक बड़ी म्यूजिकल हिट फिल्म थी.
गीत निम्मी पर फिल्माया गया है और इसे गाया
है लता मंगेशकर संग महिला कोरस ने. गीत लिखा है
शकील बदायूनीं ने और धुन तैयार की नौशाद ने.





गीत के बोल:

आ हा हा हा हा हा हा
आ हा हा हा हा हा मेरा सलाम ले जा

मेरा सलाम ले जा दिल का पयाम ले जा
उल्फ़त का जाम ले जा उड़न खटोले वाले राही
उड़न खटोले वाले राही
ओये मेरा सलाम ले जा दिल का पयाम ले जा
उल्फ़त का जाम ले जा उड़न खटोले वाले राही
उड़न खटोले वाले राही

ल ल ल ला ल ला ला ला हो
ल ल ल ला ल ला ला ला हो
उड़ता हवाओं में बादल के छाँव में
कौन से गाँव में जायेगा तू
हा आ आ आ आ आ आ आ आ
उड़ता हवाओं में बादल के छाँव में
कौन से गाँव में जायेगा तू
नीचे ज़मीन है, दुनिया हसीन है
दिल को यकीन है आयेगा तू
हा आ आ आ आ आ आ
नीचे ज़मीन है, दुनिया हसीन है
दिल को यकीन है आयेगा तू

होये मेरा सलाम ले जा, दिल का पयाम ले जा,
उल्फ़त का जाम ले जा उड़न खटोले वाले राही
उड़न खटोले वाले राही

ल ल ल ला ल ला ला ला  हो
ल ल ल ला ल ला ला ला  हो
ऊँची उड़ान है पलकों पे जान है
आगे तूफ़ान है जाने कहीं
हा आ आ आ आ आ आ आ आ
ऊँची उड़ान है पंखों पे जान है
आगे तूफ़ान है जाने कहीं
ऊँची उड़ान है पंखों पे जान है
आगे तूफ़ान है जाने कहीं
मंज़िल भी दूर है, हिम्मत भी चूर है
आना ज़रूर है आ जा यहीं
हा आ आ आ आ आ आ आ आ
मंज़िल भी दूर है, हिम्मत भी चूर है
आना ज़रूर है आ जा यहीं

होये मेरा सलाम ले जा, दिल का पयाम ले जा,
उल्फ़त का जाम ले जा उड़न खटोले वाले राही
उड़न खटोले वाले राही
उड़न खटोले वाले ओ राही आ जा
ओ राही आ जा
ओ राही आ जा
ओ राही आ जा
………………………………………………
Merra salaam le ja-Udna Khatola 1955

Artist: Nimmi

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Jan 15, 2020

ए जी ठण्डी सड़क है-जादू १९५१

‘ए जी’ हिट्स के तहत एक और गीत सुनते हैं फिल्म जादू
से. ‘ए जी’ शब्द महिलाओं के मुख से निकलते समय ज़्यादा
मधुर से लगते हैं, जाने क्यूँ. वैसे मैंने ‘ए जी’ शब्द पुरुषों को
प्रयोग करते नहीं सुना है.

ये गीत शमशाद बेगम का गाया हुआ है. शकील बदायूनीं इसके
रचनाकार हैं और नौशाद संगीतकार. गीत छोटा सा है. एक ही
अन्तरा है इसमें मगर पूरे पैसे वसूल वाला गीत है.




गीत के बोल:

ए जी ठण्डी सड़क है ठण्डी सड़क
ए जी ठण्डी सड़क है ठण्डी सड़क
अकड़ अकड़ के चलो न बाबू
अकड़ अकड़ के
अकड़ अकड़ के चलो न बाबू
ठण्डी सड़क है ठण्डी सड़क

इन राहों पर आ कर देखो
बड़े बड़े लुट जाते हैं
बड़े बड़े लुट जाते हैं
दिल उनसे छुट जाता है
वो दिल से छुट जाते हैं
इन राहों पर आ कर देखो
बड़े बड़े लुट जाते हैं
दिल उनसे छुट जाता है
वो दिल से छुट जाते हैं

हाये नैन मिले
हाय नैन मिले दिल गया धड़क
नैन मिले दिल गया धड़क
दिल धड़क
ठण्डी सड़क है ठण्डी सड़क
ए जी ठण्डी सड़क है ठण्डी सड़क
………………………………………..
Ae ji thandi sadak hai-Jadoo 1951

Artist: Nalini Jaywant

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Jan 11, 2020

अब रात मिलन की बीत चुकी-जादू १९५१

कभी मैं सोचता हूँ कि लंबे लंबे गाने बढ़िया होते हैं
तो कभी सोचता हूँ छोटे छोटे गीत ज्यादा बढ़िया
होते हैं. सबका अपना महत्त्व है. कोई छोटा गीत भी
बढ़िया हो सकता है और कोई बड़ा गीत भी.

प्रभाव कैसा पैदा होता है गीत से वो मायने रखता है.
पीठ ऊँची ऊँट की ऊँचाई से नहीं होती, होती ही है
पीठ ऊंची ऊँट की.

सुनते हैं एक चार पंक्ति वाला गीत फिल्म जादू से
शकील बदायूनीं का लिखा हुआ जिसका संगीत नौशाद
ने तैयार किया है. गीत में बोल कम और संगीत
लबालब भरा है.




गीत के बोल:

अब रात मिलन की बीत चुकी
ये खेल बिगड़ने वाला है
ना भूल के तू इस दुनिया से
दम भर में बिछड़ने वाला है
……………………………………………….
Ab raat milan ki beet-Jadoo 1951

Artist:

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Nov 2, 2019

उड़ते हुए पंछी-संजोग १९४३

देसी फिल्मों में चार्ली चैप्लिन जैसी मूंछें रखने वाले
काफी कलाकार हमने देखे हैं अभी तक. ३० और ४०
के दशक में एक कलाकार काफी चर्चित थे अपनी
भाव भंगिमाओं की वजह से-नूर मोहम्मद चार्ली. नाम
में आगे चार्ली लगा है इससे अनुमान लगाइए कि ये
चार्ली चैप्लिन के बड़े फैन रहे होंगे. गीत देख कर भी
आपको यकीन हो जायेगा इस बात पर.

कारदार निर्देशित इस फिल्म का संगीत नौशाद ने तैयार
किया है. प्रस्तुत गीत लिखा है दीनानाथ मधोक ने और
इसे गाया है नूर मोहम्मद चार्ली संग सुरैया ने. परदे पर
चार्ली के साथ मेहताब हैं.

सन १९३२ की एक फिल्म पाक दमन रक्कासा से शुरू
हुआ उनका कैरियर १९६३ की फिल्म अकेली मत जइयो
तक चला. बीच के समय में वे विभाजन के बाद पडोसी
देश भी रह आये. अंत समय उनका अमरीका में गुज़रा.

हिंदी सिनेमा के पहले स्टार कॉमेडियन नूर मोहम्मद की
आवाज़ भी जनता को पसंद थी और वे अपनी अदाओं और
गायकी दोनों के लिए चर्चित रहे.




गीत के बोल:

उड़ते हुए पंछी
कौन इनको बताये
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
दिल उनका हुआ जाये
उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
क्या तुझसे कहूँ हाय
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
वो हमको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी

मुंह की बातें सारी
झूठों के झूठे दिलासे
मुंह की बातें सारी
झूठों के झूठे दिलासे
कोई मर जाये उनकी बाला से
कोई मर जाये उनकी बाला से

उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
कौन इनको बताये
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
हम उनको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी

हो ओ ओ दिल है हसरतों से भरा रे
ये न लगी जाने ज़रा रे
हूँ
दिल है हसरतों से भरा
अरे अरे हाँ
ये न लगी जाने ज़रा
दिल में आ के देख मेरे
कौन खोटा कौन खरा
दिल में आ के देख मेरे
कौन खोटा कौन खरा

उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
क्या तुझसे कहूँ हाय
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
वो हमको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी.
……………………………………………
Udte hue panchhi-Sanjog 1943

Artists: Noor Mohammad Charlie, Mehtab

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Oct 27, 2019

आई आई सावन रुत आई-मेला १९४८

सावन रुत आने वाला एक श्वेत श्याम युग का गीत
सुनते हैं फिल्म मेला से जिसमें नायिका के साथ
सहायक कलाकारों का मेला लगा हुआ है. गीत के
शुरू में उनसे डर के बकरियां इधर उधर भाग रही हैं.

गीत लिखा है शकील बदायूनीं ने और इसकी धुन
तैयार की है नौशाद ने. शमशाद बेगम और मुकेश
ने इसे गाया है. नायक इस गीत में थोडा देर में
प्रकट होता है.

हिंदी फिल्मों के गीतों में कसी किसी गीत में बोल
इतने होते हैं जैसे फिल्म की नायिका बिकिनी पहने
हो तो किसी किसी गीत में लिरिक्स इतनी ज्यादा
होती है जैसे सफर के लिए सूटकेस तैयार किया
गया हो और उसमें मम्मी, पापा, चुन्नू, मुन्नू, गप्पू
और पप्पू सभी के कपडे ठूंस दिए गए हों.
   



गीत के बोल:

आई सावन रुत आई, सजन मोरा डोले है मन
लागी तेरी लगन घर आ जा
हो घर आ जा मोहन घर आ जा
आई सावन रुत आई, सजन मोरा डोले है मन
लागी तेरी लगन घर आ जा
हो घर आ जा मोहन घर आ जा

खेतों-खेतों डग-मग डोले हरियाली मतवारी
हो हरियाली मतवारी
खेतों-खेतों डग-मग डोले हरियाली मतवारी
हो हरियाली मतवारी
ऐसे में ओ प्रीतम प्यार आये याद तिहारी
हो आये याद तिहारी
ऐसे में ओ प्रीतम प्यार आये याद तिहारी
हो आये याद तिहारी
घर आ जा सजन घर आ जा
हो घर आ जा मोहन घर आ जा

आई सावन रुत आई, सजन मोरा डोले है मन
लागी तेरी लगन घर आजा

तोरे बिना मोहे कल नाही आये
कल नाही आये
तोरे बिना मोहे कल नाही आये
कल नाही आये
दिल की लगी तड़पाये हो ओ
दिल की लगी तड़पाये
मस्त पवन चले, मन लहराये
मस्त पवन चले, मन लहराये
आई मिलन रुत हाय
आई मिलन रुत हाय
घर आ जा सजन घर आजा
हो घर आ जा मोहन घर आजा

आई सावन रुत आई सजन मोरा डोले है मन
लागी तेरी लगन घर आ जा

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
खेतों से परबत पर आ कर
खेतों से परबत पर आ कर
जीवन जोत जगा ले
जीवन जोत जगा ले
दुनिया है दो दिन का मेला
कुछ रो ले कुछ गा ले
दुनिया है दो दिन का मेला
कुछ रो ले कुछ गा ले

घर आ जा सजन घर आजा
ओ घर आ जा मोहन घर आ जा
आई सावन रुत आई सजन मोरा डोले है मन
लागी तेरी लगन घर आ जा
................................................................
Aayi sawan rut aayi-Mela 1948

Artists: Nargis, Dilip Kumar, Female extras, few goats

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Oct 10, 2019

धरती को आकाश पुकारे ३-मेला १९४८

रोमांटिक ट्रेजेडी फिल्म मेला जो सन १९४८ की फिल्म है
इसके गीत काफी लोकप्रिय रहे थे अपने समय में और
आज भी कुछ गीत हमें सुनाई दे जाते हैं. इस फिल्म के
प्रमुख कलाकार हैं-दिलीप कुमार और नर्गिस. दिलीप कुमार
और नर्गिस ने कुछ ही फिल्मों में साथ काम किया है. एक
और फिल्म है अंदाज़ जिसमें राज कपूर भी साथ हैं.

प्रस्तुत गीत एकल वर्ज़न है जिसे शमशाद बेगम ने गाया
है. शकील बदायूनीं का लिखा गीत हैं और धुन नौशाद की.
ये फिल्म के अंत में प्रकट होता है.




गीत के बोल:

धरती को आकाश पुकारे
आ जा आ जा प्रेम द्वारे आना ही होगा
इस दुनिया को छोड़ के प्यारे
झूठे बंधन तोड़ के सारे जाना ही होगा

…………………………………………………….
Dharti ko aakash pukare 2-Mela 1948

Artists: Dilip Kumar, Nargis

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Sep 24, 2019

मेरा दिल तोड़ने वाले-मेला १९४८

फिल्म संगीत में कई तरह के ड्वेट गीत उपलब्ध हैं-सुखद
दुखद और हास्य रस वाले. कुछ एक प्रेरणादायी युगल गीत
भी हैं. भजन और कव्वालियां भी हैं जिनमें महिला और पुरुष
स्वर साथ साथ होते हैं..

सुनते हैं फिल्म मेला से धीमी गति वाला एक युगल गीत
शमशाद बेगम और मुकेश की आवाजों में. शकील बदायूनीं की
रचना है और नौशाद का संगीत.



गीत के बोल:

मेरा दिल तोड़ने वाले मेरे दिल की दुआ लेना
मिटा कर मेरी दुनिया को नयी दुनिया बसा लेना

मोहब्बत की कसम तुमको लगी दिल की बुझा लेना
हमारी याद जब आये तो दो आंसू बहा लेना

नहीं आता वफाओं से हमें दामन बचा लेना
नहीं आता वफाओं से हमें दामन बचा लेना
हमें दामन बचा लेना
तुम्हीं पर जान दे देंगे किसी दिन आजमा लेना
मेरा दिल तोड़ने वाले मेरे दिल की दुआ लेना

मोहब्बत नाम है गम का खुशी से गम उठा लेना
मोहब्बत नाम है गम का खुशी से गम उठा लेना
खुशी से गम उठा लेना
अगर दिल को ना चैन आये तो कुछ रो रो के गा लेना
मिटा कर मेरी दुनिया को नयी दुनिया बसा लेना
हमारी याद जब आये तो दो आंसू बहा लेना
……………………………………………………
Mera dil todne wale-Mela 1948

Artists: Dilip Kumar, Nargis

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Sep 22, 2019

धरती को आकाश पुकारे १-मेला १९४८

सन १९४८ की रोमांटिक ट्रेजेडी फिल्म मेला से एक गीत
सुनते हैं जो फिल्म में कई बार गूंजा है. इसके भाव दुःख
वाले हैं. फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं-दिलीप कुमार और
नर्गिस.

प्रस्तुत गीत युगल वर्ज़न है जिसे मुकेश और शमशाद बेगम
ने गाया है. शकील बदायूनीं के बोल हैं और नौशाद ने इसकी
धुन तैयार की है.




गीत के बोल:

धरती को आकाश पुकारे
आ जा आ जा प्रेम द्वारे आना ही होगा
इस दुनिया को छोड़ के प्यारे
झूठे बंधन तोड़ के सारे जाना ही होगा

धरती को आकाश पुकारे
आ जा आ जा प्रेम द्वारे आना ही होगा
इस दुनिया को छोड़ के प्यारे
झूठे बंधन तोड़ के सारे जाना ही होगा
…………………………………………………….
Dharti ko aakash pukare-Mela 1948

Artists: Dilip Kumar, Nargis

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Sep 16, 2019

दिया ना बुझे री आज-सन ऑफ इंडिया १९६२

फिल्म सन ऑफ इंडिया में दुःख वाले गीत ज़्यादा है
या मुझे ही ऐसा लगता है. फ़िल्में हम मनोरंजन के
लिए देखते हैं. कुछ फ़िल्में दुखी कर देती हैं. शब्दकोष
में मैंने मनोरंजन का पर्यायवाची शब्द दुःख या तकलीफ
नहीं देखा. क्या बॉलीवुड के दिग्गज इसे एलेबोरेट
करेंगे.

गम वाले गाने ज्यादा सुन लो तो दिल गोंद सा चिपकने
लगता है गाने के गम से. मिसाल इससे बेहतर भी दी
जा सकती है मगर मुफ्त में तो ऐसे मिसालें ही मिलेंगी
ना. इस बात को भी कोई अपने वीडियो में गाने के
ऊपर तैरा देगा और हजारों की वाह वाह प्राप्त कर लेगा.

इस गाने के गीतकार/संगीतकार/गायिका क्रमशः हैं-
शकील/नौशाद/लता. आनंद लीजिए जब तक वीडियो
जिंदा है. फिल्म के बेहतर गीतों में से एक.


गीत के बोल:

दिया न बुझे री आज हमारा
दिया न बुझे री आज हमारा
चले री पवन सनन सनन
थर थर कांपे जियरा
दिया न बुझे री आज हमारा

आज का जगमग रूप निखारे
आज का जगमग रूप निखारे
प्रीत में खोये नैन हमारे
ढूंढे पी का द्वारा
दिया न बुझे

एक तो बदरा घन घन गरजे
एक तो बदरा घन घन गरजे
दूजे बिजुरिया चम चम चमके
जलथल है जग सारा

दिया न बुझे री आज हमारा
चले री पवन सनन सनन
थर थर कांपे जियरा
दिया न बुझे री

रूप की ज्योति डगमग डोले
रूप की ज्योति डगमग डोले
हमरा करजवा खाये झकोले
राम न हो अँधियारा

दिया न बुझे री आज हमारा
दिया न बुझे री आज हमारा
नि सा ग म प म प ग म प
ग म प म ग म ग रे सा सा
नि सा ग म ध ध ग म ध नि सा
सा नि सा सा ध नि नि प ग ग
म ध नि सा म ध नि सा म ध नि सा
ना बुझे री आज हमारा
दिया न बुझे
………………………………………..
Diya na bujhe ri-Son of India 1962

Artist: Kumkum

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Sep 10, 2019

कल रात ज़िन्दगी से-पालकी १९६७

सुनते हैं रफ़ी का गाया एक पॉपुलर गीत फिल्म पालकी
से. शकील बदायूनीं की रचना है और नौशाद का संगीत.

कठिन शब्दों वाला ये गीत समझने और इसका आनंद
लेने के लिए आपको भाषा की अच्छी जानकारी होना
ज़रूरी है अन्यथा इसकी धुन सुन सुन के ही आनंद लेते
रहें.

इस गीत की पहली पंक्ति कुछ ऐसी है जिसे सुन कर
जिंदगी से विपरीत की चीज़ों की याद हो आती है.
अक्सर ऐसे शब्द अकस्मात वाली घटना से जोड़ के
प्रयोग किये जाते हैं.




गीत के बोल:

कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई
कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई
कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई

एक हुस्न सामने था क़यामत के रूप में
एक ख़्वाब जलवागर था हक़ीक़त के रूप में
चेहरा वही गुलाब की रंगत लिए हुए
नज़रें वही पयाम-ए-मुहब्बत लिए हुए
ज़ुल्फ़ें वो ही के जैसे धुँधलका हो शाम का
आँखें वो ही जिन आँखों पे धोखा हो जाम का
कुछ देर को तसल्ली-ए-जज़्बात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई

कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई

देखा उसे तो दामन-ए-रुख़्सार नम भी था
वल्लाह उसके दिल को कुछ एहसास-ए-ग़म भी था
थे उसकी हसरतों के ख़ज़ाने लुटे हुए
लब पर तड़प रहे थे फ़साने घुटे हुए
काँटे चुभे हुए थे सिसकती उमंग में
डूबी हुई थी फिर भी वफ़ाओ के रंग में
दम भर को ख़त्म गर्दिश-ए-हालात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई

कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई

ए मेरी रूहे इश्क़ मेरी जाने शायरी
दिल मानता नहीं के तू मुझसे बिछड़ गई
मायूसियाँ हैं फिर भी मेरे दिल को आस है
महसूस हो रहा है के तू मेरे पास है
समझाऊँ किस तरह से दिले बेक़रार को
वापस कहां से लाऊँ मैं गुज़री बहार को
मजबूर दिल के साथ बड़ी घात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई

कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई
…………………………………………………
Kal raat zindagi se mulaqat ho gayi-Palki 1967

Artist: Rajendra Kumar

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Jul 14, 2019

चल दिये दे के ग़म-सन ऑफ इंडिया १९६२

खूबसूरत वादियों में नदी के किनारे एक टीले पर खड़े हो
कर दर्द भरा गीत कैसे गाना चाहिए? जानने के लिए देखें
ये गीत फिल्म सन ऑफ इंडिया से. 

परदे पर गीत गा रही हैं कुमकुम. गीत के आखिरी अंतरे
में दो चेहरे और उभरते हैं जिनमें से एक कमलजीत हैं
और दूसरी कम उम्र की सिम्मी ग्रेवाल.

गीत शकील बदायूनीं का है और संगीत नौशाद का.




गीत के बोल:

चल दिये दे के ग़म ये न सोचा के हम
इस जहाँ में अकेले किधर जायेंगे
ऐसी मंज़िल पे छोड़ा है तुमने हमें
अब सहारा न दोगे तो मर जाएँगे

बिजलियों का न डर था न आँधी का ग़म
खो गये थे मुहब्बत की दुनिया में हम
क्या ख़बर थी के लुट जायेगा आशियाँ
क्या ख़बर थी के तिनके बिखर जायेंगे
चल दिये दे के ग़म ये न सोचा के हम
इस जहाँ में अकेले किधर जायेंगे

याद कर के तुम्हें रोयेंगे उम्र भर
चैन आयेगा दिल को न शाम-ओ-सहर
ज़िन्दगी में रहेगी तुम्हारी कमी
दिन गुज़रने को यूँ भी गुज़र जायेंगे
चल दिये दे के ग़म ये न सोचा के हम
इस जहाँ में अकेले किधर जायेंगे
ऐसी मंज़िल पे छोड़ा है तुमने हमें
अब सहारा न दोगे तो मर जायेंगे
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Chal diye de ke gham-Son of India 1962

Artist: Kumkum, Simmi, Kamaljeet

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Mar 8, 2019

दिल तोड़ने वाले तुझे-सन ऑफ इंडिया १९६२

लता रफ़ी के युगल गीतों में से एक लोकप्रिय गीत.
इसकी शान में जनता पहले ही बड़े बड़े लेख, कहानी
उपन्यास लिख चुकी है, बस फिल्म बनना बाकी है.

कई प्रतिभाशाली जीव इस गाने को गा के यूट्यूब पर
लोड कर चुके हैं जिसे सुन सुन के उनसे बड़े प्रतिभाशाली
जीव वाह वाह और लाईक मार दिया करते हैं.

विवरण इस प्रकार से है:

गीत: शकील बदायूनीं
संगीत: नौशाद
आवाज़: लता, रफ़ी




गीत के बोल:

दिल तोड़ने वाले तुझे दिल ढूंढ रहा है
तुझे दिल ढूंढ रहा है
आवाज़ दे तू कौन सी नगरी में छुपा है
दिल तोड़ने वाले

तू हम को जो मिल जाये तो हाल अपना सुनाये
खुद रोयें कभी और कभी तुझको रुलायें
कभी तुझको रुलायें
वो दाग दिखायें जो हमें तूने दिया है

ए दिल के सहारे तुझे दिल ढूंढ रहा है
तुझे दिल ढूंढ रहा है
सीने में तेरी याद का तूफान उठा है
ए दिल के सहरे

दिल में तो ये हसरत है तेरे पास मैं आऊ
नज़रों से गिरा हो तो नज़र कैसे मिलाऊँ
नज़र कैसे मिलाऊँ
बदनाम हूँ नाकाम हूँ क्या मुझमे रहा है
आइए दिल के सहारे तुझे दिल ढूंढ रहा है
ए दिल के सहारे तुझे दिल ढूंढ रहा है
तुझे दिल ढूंढ रहा है

दिखला के कनारा मुझे मल्लाह ने लूटा
कश्ती भी गई हाथ से पतवार भी छूटा
पतवार भी छूटा
अब और ना जाने मेरी तक़दीर में क्या है

दिल तोड़ने वाले तुझे दिल ढूंढ रहा है
दिल ढूंढ रहा है

बेचैन उधर तू है तो मजबूर इधर हम
बैंठे है छुपाये हुये अश्क़ो में तेरा गम
अश्क़ो में तेरा गम
हर चोट उभर आई है हर ज़ख्म हरा है

दिल तोड़ने वाले तुझे दिल ढूंढ रहा है
तुझे दिल ढूंढ रहा है.
……………………………………….
Dil todne waale-Son of India 1962

Artists: Kumkum, Kamaljeet

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Jan 6, 2019

फिर आह दिल से निकली-मेला १९४८

मेला फिल्म से एक लोकप्रिय गीत सुनते हैं जिसे
ज़ोहराबाई अम्बालेवाली ने गाया है.

जिगर से लहू टपकना काफी सीवियर कंडीशन होती है.
उसे प्रतीकात्मक रूप से गीत में उपयोग करने का अर्थ
है कि तकलीफ़ बेइंतिहा है.

गीत के बोल सरल हैं इसलिए असर भी ज्यादा करते
हैं.




गीत के बोल:

फिर आह दिल से निकली टपका लहू जिगर से
शायद वो जा रहे हैं छुप कर मेरी नज़र से
…………………………………………………….
Phir aah dil se nikli-Mela 1948

Artist: Nargis, Dilip Kumar

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Dec 2, 2018

इंसान था पहले बंदर-सन ऑफ इण्डिया १९६२

१९६२ की फिल्म सन ऑफ इण्डिया एक प्रगतिशील कहानी
है जिसमें एक गीत के ज़रिये डार्विन की थ्योरी की पुष्टि
की गई है.

फिल्म इंडस्ट्री में भी जब कई बंदर छाप काला दन्त मंजन
सरीखे कलाकारों को देखता हूँ तो यकीन हो जाता है डार्विन
की थ्योरी पर.





गीत के बोल:

कहते थे उस्ताद हमारे
नाम था जिनका मछंदर
इंसान था पहले बंदर
इंसान था पहले बंदर
इंसान था पहले बंदर
इंसान था पहले बंदर

लम्बी दुम वाले थे सारे
अपनी पावो के अंदर
इंसान था पहले बंदर
इंसान था पहले बंदर

ना कोई जॉनी था ना कोई अब्दुल
न कोई था गोपाल
सबकी सूरत एक जैसी थी
एक थी सबकी चाल
एक थी सबकी चाल
नंगे फिरते थे जंगल में
बन के मस्त कलंदर
इंसान था पहले बंदर
इंसान था पहले बंदर

कहते थे उस्ताद हमारे
नाम था जिनका मछंदर
इंसान था पहले बंदर
इंसान था पहले बंदर

काम किया ये पहला हमने
बन गये जब इंसान
मिटटी के दो चार घरों में
बाँट दिये भगवन
बाँट दिये भगवन
किसी ने बोला ऊंचा गिरजा
किसी ने मस्जिद मंदर
इंसान था पहले बंदर
इंसान था पहले बंदर

लम्बी दुम वाले थे सारे
अपनी पावो के अंदर
इंसान था पहले बंदर
इंसान था पहले बंदर

कहते थे उस्ताद हमारे
नाम था जिनका मछंदर
इंसान था पहले बंदर
इंसान था पहले बंदर
……………………………………………….
Insaan tha pehle Bandar-Son of India 1962

Artist: Sajid Khan

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Nov 15, 2018

चेहरे से अपने आज तो-पालकी १९६७

सुनते हैं हाई-फ्रीक्वेंसी गीत फिल्म पालकी से जिसे लिखा
है शकील बदायूनीं ने और गाया है रफ़ी ने. नौशाद ने
इसकी धुन तैयार की है.

लिखने वाले लिख जाते हैं, गाने वाले गा जाते हैं और
सरदर्द हो जाता है सुनने वालों का. अब ऐसे गानों का
एप्लीकेशन कहाँ किया जाये. हर व्यक्ति तो कोमल ह्रदय
कवि होता नहीं जो इस तरीके से अपनी भावनाओं का
इज़हार करे.

लड़के लड़कियों की बात करें तो गर्ल फ्रेंड की वोकेबुलरी
भी तो इतनी फरटाईल हो के उसे ये सब समझ आये.
किसी कम पढ़ी लिखी को ये सब सुना दिया तो वो तो
बेहोश हो कर धड़ाम से गिरेगी ज़मीन पर.




गीत के बोल:

सदका उतारिये के ना लागे कहीं नज़र
सेहरे में आज फूल सा मुखड़ा है जलवागर

चेहरे से अपने आज तो परदा उठाईये
चेहरे से अपने आज तो परदा उठाईये
लिल्लाह मुझको चाँद सी सूरत दिखाईये
जन्नत है ये मकाम दर-ए-यार है ये घर
जन्नत है ये मकाम दर-ए-यार है ये घर
दिल कह रहा है आज यहीं सर झुकाईये
चेहरे से अपने आज तो परदा उठाईये

उठिए खुदा के वास्ते
उठिए खुदा के वास्ते लग जाइए गले
रस्मो रिवाज़ शर्मो हाय सब हटाईये
चेहरे से अपने आज तो परदा उठाईये
लिल्लाह मुझको चाँद सी सूरत दिखाईये

ये क्या के हम ही बढ़ते रहें आपकी तरफ़
थोड़ी सी दूर आप भी तशरीफ़ लाइए
थोड़ी सी दूर आप भी तशरीफ़ लाइए
चेहरे से अपने आज तो परदा उठाईये
…………………………………………………..
Chehre se apne aaj to-Palki 1967

Artists: Rajendra Kumar, Waheeda Rehman

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Oct 19, 2018

मर गये हम जीते जी-शबाब १९५४

ये सब काम के शब्दों में ना ना क्यूँ लगा रहता है भला
खाना, पीना, सोना, रोना, धोना, गाना, सुनना, पाना, खोना,
जीना, मरना. कभी विचार किया है आपने?

आप विचार करें तब तक हम आपको एक बढ़िया गीत
सुनवाते हैं फिल्म शबाब से. इसे लता मंगेशकर ने गाया है.
बोल शकील बदायूनीं के हैं और संगीत नौशाद का.



गीत के बोल:

मर गये हम जीते जी मालिक तेरे संसार में
चल दिया हमको खिवैया छोड़ के मँझधार में
मालिक तेरे संसार में
मर गये हम जीते जी

उनका आना उनका जाना बस खेल था तक़दीर का
ख़्वाब थे वो ज़िन्दगी के दिन जो गुज़रे प्यार में
मालिक तेरे संसार में
मर गये हम जीते जी

ले गये वो साथ अपने साज भी आवाज़ भी
ले गये वो साथ अपने साज भी आवाज़ भी
ओ रह गया नग़मा अधूरा दिल के टूटे तार में
मालिक तेरे संसार में
मर गये हम जीते जी
……………………………………………..
Mar gaye ham jeete ji-Shabab 1954

Artist: Nutan

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Oct 17, 2018

जोगन बन जाऊँगी-शबाब १९५४

जोगन जोगी हिट्स से अगला गीत सुनते हैं फिल्म शबाब
से. ये वाकई का हिट है. कुछ गाने तो श्रेणी बनाने वाले
जबरन हिट घोषित कर दिया करते हैं. इधर ऐसा नहीं है.

जोगी और जोगन शब्द बड़े लुभावने से लगते हैं गानों में.
फिल्म ताल के गाने रमता जोगी को ही ले लीजिए. उस
गीत के कुछ शब्द-जोगी, मधुशाला, पी आया, जी आया के
अलावा बाकी क्या गाया गया आपको याद आता है?

इस गीत में समर्पण भी है, प्रेमी को चेतावनी भी दी जा
रही है. चेतावनी और धमकी में फर्क होता है भाई लोग.
वैसे फिल्म की नायिका है कलाकार एक गाने में तो वो
घूँघटा में आग लगा रही थी.

अब ये भी पूछ लो कि सितार मेंडोलिन जैसा क्यूँ सुनाई दे
रहा है.  ये स्पेशल वाला है-इम्पोर्टेड आइटम. वैसे भी
सितार देख कौन रहा है गाने में ?





गीत के बोल:

जोगन बन जाऊँगी सैंया तोरे कारन
जोगन बन जाऊँगी सैंया तोरे कारन
सैंया तोरे कारन ओ बलमा तोरे कारन
जोगन बन जाऊँगी सैंया तोरे कारन

जीत लिया तोरे गीत ने मन को
जीत लिया तोरे गीत ने मन को
आग लगी मोरे बालापन को
बालापन को
नैनों में कोई आए न दूजा
नैनों में कोई आए न दूजा
आए न दूजा आ
हो ओ ओ ओ करूँगी निसदिन प्रीतम पूजा
करूँगी निसदिन प्रीतम पूजा
भजन तोरे गाऊँगी बन के पुजारन
सैंया तोरे कारन ओ बलमा तोरे कारन
जोगन बन जाऊँगी सैंया तोरे कारन

मैं रसिया तोरे मन में रहूँगी
मैं रसिया तोरे मन में रहूँगी
प्यार से अपनी झोली भरूँगी
झोली भरूँगी
ओ मनबसिया ओ अलबेले हो
हो ओ ओ ओ छोड़ के ऊँचे महल दुमहले
छोड़ के ऊँचे महल दुमहले
मैं तेरी गली आऊँगी बन के भिखारन
सैंया तोरे कारन ओ बलमा तोरे कारन
जोगन बन जाऊँगी सैंया तोरे कारन
………………………………………………….
Jogan ban jaoongi-Shabab 1954

Artist: Nutan, Bharat Bhushan

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