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Aug 1, 2020

मोहे भूल गए साँवरिया-बैजू बावरा १९५२

आज बॉलीवुड की जिन शख्सियतों का जन्मदिन हैं उनमें से एक
हैं हिंदी सिनेमा इतिहास की सबसे प्रभावशाली अभिनेत्रियों में से
एक मीना कुमारी.

इसके अलावा अभिनेता और निर्देशक भगवान, प्रसिद्ध संवाद लेखक
राही मासूम रज़ा और गीतकार मोती बी ए भी आज ही के दिन पैदा
हुए थे.

विजय भट्ट निर्देशित फिल्म बैजू बावरा सिनेमा इतिहास की कुछ
शानदार फिल्मों में से एक है. फिल्म के कथानक और इसके संगीत
में गज़ब का आकर्षण है.

आज हम सुनेंगे लता मंगेशकर का गाया हुआ इस फिल्म का सबसे
लोकप्रिय गीत. दर्द भरे गीत वैसे भी ज्यादा लोकप्रिय होते हैं और
लंबे समय तक सुने जाते हैं. इसकी अलौकिकता में शुरू की पंक्तियाँ
काफी हद तक जिम्मेदार हैं.

गीत शकील बदायूनीं का है और संगीत नौशाद का.




गीत के बोल:

जो मैं ऐसा जानती
के प्रीत किये दुख होय
हो ओ ओ नगर ढिंढोरा पीटती
के प्रीत न करियो कोय

मोहे भूल गए साँवरिया भूल गए साँवरिया
मोहे भूल गए साँवरिया भूल गए साँवरिया
आवन कह गये अजहुं न आये
आवन कह गये अजहुं न आये
लीन्ही न मोरी खबरिया
मोहे भूल गए साँवरिया भूल गए साँवरिया

दिल को दिए क्यों दुख बिरहा के
तोड़ दिया क्यों महल बना के
दिल को दिए क्यों दुख बिरहा के
तोड़ दिया क्यों महल बना के
आस दिला के ओ बेदर्दी
आस दिला के ओ बेदर्दी
फेर ली काहे नजरिया

मोहे भूल गए साँवरिया भूल गए साँवरिया

नैन कहे रो रो के सजना
देख चुके हम प्यार का सपना
नैन कहे रो रो के सजना
देख चुके हम प्यार का सपना
प्रीत है झूठी प्रीतम झूठा
प्रीत है झूठी प्रीतम झूठा
झूटी है सारी नगरिया

मोहे भूल गए साँवरिया भूल गए साँवरिया
……………………………………………..
Mohe bhool gaye sanwariya-Baiju Bawra 1952

Artist: Meena Kumari

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Jul 14, 2020

मेरे दिल की धड़कन-अनहोनी १९५२

आज संगीतकार रोशन का जन्मदिन है. इस अवसर पर
सुनेंगे श्वेत श्याम युग से एक गीत. राज कपूर और नर्गिस
की जोड़ी वाली फिल्म अनहोनी से एक गाना शैलेन्द्र का
लिखा हुआ.

लता मंगेशकर और तलत महमूद के गीतों में माधुर्य
कोमलता के साथ मौजूद होता है. गुड़ के ढेले की जगह
गुड़ का महीन चूरा होता है. न विश्वास हो तो सुन के
देख लीजिए.

टेलीफोन का सदुपयोग/दुरूपयोग उस ज़माने में भी होता
था जैसा कि हमने इस गीत के माध्यम से समझा. एक
बात ज़रूर नहीं समझ आई कि उसके साथ का तार क्या
इतना लंबा छूटा हुआ होता था कि उसे ले के कोई भी
घर का चक्कर लगा ले यहाँ तक कि टेलीफोन एक्सचेंज
भी पहुँच जाए. नहीं? कोई समझायेगा मुझे ये क्या हो
रहा है.

जिन लोगों को आर डी बर्मन के गानों के मुखड़ों और
अंतरों के मीटर अनूठे लगते हैं वे इस गाने को ज़रूर
सुनें.




गीत के बोल:

मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने
मेरा प्यार भरा मन क्यों डोले
क्यों डोले
मेरा प्यार भरा मन क्यों डोले
क्यों डोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

चली गई रात मदभरी हवाओं के डोले पे हो के सवार
दे गयी चाँद की परी निगाहों को सपनों का पागल ख़ुमार
हमें किसने दिये ये नज़राने
कौन जाने
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

महकी थी रात की रानी खिले थे गगन में चमेली के फूल
पूछा मैंने कान में तुमसे मुहब्बत है कैसी मज़ेदार भूल
मैं तुमसे लगी क्यों शरमाने
कौन जाने
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने
……………………………………………..
Mere dil ki dhadkan kya bole-Anhonee 1952

Artists: Raj Kapoor, Nargis

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Mar 23, 2020

अब तो आ जाओ बलम-१९५२

लता मंगेशकर की टोनल क्वालिटी ५० के दशक में
अलौकिक हुआ करती थी. कोई भी गाना सुन लो उस
समय का शहद की शीशी सरीखा लगता है. ये हमारे
एक मित्र के विचार हैं और मैं उनसे पूरी तरह सहमत
हूँ. रत्ती भर संदेह की गुंजाइश नहीं है.

सुनते हैं सन १९५२ की फिल्म पूनम से एक दर्द भरा
गीत जिसे हसरत जयपुरी ने लिखा है. लता मंगेशकर
ने इसे गाया है शंकर जयकिशन की धुन पर. गोल्डन
पीरियड यूँ ही नहीं कहा जाता था उस समय को जब
गाने पर इतनी मेहनत होती थी और गाने वाले भी एक
से बढ़ कर एक लाजवाब थे.

फ़ुरक़त का मतलब होता है सेपरेशन या बिछुडन.



गीत के बोल:

अब तो आ जाओ बलम
अब तो आ जाओ बलम
फ़ुरक़त के मारे रो दिये
हाल पर दुनिया तो दुनिया
चाँद तारे रो दिये
अब तो आ जाओ बलम

मेरे नाले मेरे शिकवे मेरे आँसू मेरे ग़म
मेरे नाले मेरे शिकवे मेरे आँसू मेरे ग़म
एक दो की बात क्या है आज सारे रो दिये
अब तो आ जाओ बलम

शाम गुज़री रात आई रात गुज़री दिन हुआ
शाम गुज़री रात आई रात गुज़री दिन हुआ
ग़म न पूछो ज़िंदगी के हर सहारे रो दिये
अब तो आ जाओ बलम

मेरी चाहें मेरी आहें मेरी राहें लुट गईं
मेरी चाहें मेरी आहें मेरी राहें लुट गईं
डूबती आँखों के अब प्यासे किनारे रो दिये

अब तो आ जाओ बलम
फ़ुरक़त के मारे रो दिये
हाल पर दुनिया तो दुनिया
चाँद तारे रो दिये
अब तो आ जाओ बलम
……………………………………………………
Ab to aa jao balam-Poonam 1952

Artist: Kamini Kaushal

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Mar 22, 2020

ये हवा ये रात ये चाँदनी-संगदिल १९५२

तलत महमूद के सर्वाधिक लोकप्रिय गीतों में से एक
है संगदिल का ये गाना जिसे परदे पर दिलीप कुमार
गा रहे हैं. फिल्म की नायिका मधुबाला हैं मगर नायक
ये गीत दूसरी अभिनेत्री के लिए क्यूँ गा रहा है ये
समझने के लिए आपको फिल्म देखना पड़ेगी.

राजेंद्र कृष्ण के बोल हैं और सज्जाद हुसैन का संगीत.
गीतकार राजेंद्र कृष्ण सबसे ज्यादा अपने उन गीतों के
लिए जाने गए जो उन्होंने सी रामचंद्र और मदन मोहन
के लिए लिखे.




गीत के बोल:

ये हवा ये रात ये चाँदनी
तेरी इक अदा पे निसार है
ये हवा ये रात ये चाँदनी
तेरी इक अदा पे निसार है
मुझे क्यूँ ना हो तेरी आरज़ू
तेरी जुस्तजू में बहार है
ये हवा ये रात ये चाँदनी

तुझे क्या खबर है ओ बेखबर
तुझे क्या खबर है ओ बेखबर
तेरी एक नज़र में है क्या असर
तुझे क्या खबर है ओ बेखबर
तेरी एक नज़र में है क्या असर
जो गज़ब में आये तो कहर है
जो हो मेहरबां वो क़रार है
मुझे क्यूँ ना हो तेरी आरज़ू
तेरी जुस्तजू में बहार है
ये हवा ये रात ये चाँदनी

तेरी बात बात हैं दिलनशीं
तेरी बात बात हैं दिलनशीं
कोई तुझसे बढ़ के नहीं हसीं
तेरी बात बात हैं दिलनशीं
कोई तुझसे बढ़ के नहीं हसीं
हैं कली कली में जो मस्तियां
तेरी आँख का ये खुमार है
मुझे क्यूँ ना हो तेरी आरज़ू
तेरी जुस्तजू मैं बहार है

ये हवा ये रात ये चाँदनी
तेरी इक अदा पे निसार है
………………………………………………..
Ye hawa ye raat ye chandni-Sangdil 1952

Artists: Dilip Kumar, Shammi

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Feb 1, 2020

दो दिन की ज़िंदगी में-पूनम १९५२

हँसने वाले के साथ दुनिया भी हँसती है मगर रोने वाले
का साथ सभी छोड़ दिया करते हैं. ये एक कड़वा सच है
जिसका कोई जवाब और तोड़ नहीं है. अपने संगी साथी
भी थोड़े दिन तक झेलते हैं उसके बाद वे भी धीरे धीरे
किनारा करने लगते हैं.

आपने कई फिल्मों में नायकों और अन्य लोगो को वाद्य
यंत्र पकड़ के जोर जोर से हिलाते देखा होगा. उन गीतों
में मजाल है उँगलियाँ ज़रा भी हिल जाएँ. कुछ गीतों में
वाकई में साज़ बजाये भी जाते हैं, लेकिन आम तौर पर
बजने का ड्रामा ही ज्यादा मिलता है.

आज आपको सुनवाते हैं फिल्म पूनम से एक गीत
जिसमें सितार पर नायक की उँगलियाँ किसी मंजे हुए
सितार वादक की तरह चल रही हैं, भले ही नोट टू नोट
ना बजाया जा रहा हो मगर ऐसा आभास ज़रूर दिला
रहा है उसका प्रदर्शन मानो उसने बाकायदा कहीं से
सितार बजाने की ट्रेनिंग ली हो. ये हैं अशोक कुमार
जिन्हें आपने फिल्म आशीर्वाद में भी शिद्दत से संगीत
प्रदर्शन करते देखा होगा.

यह गीत फिल्माया गया है कामिनी कौशल पर जिसे
गाया है लता मंगेशकर ने. नायिका नायक को गीत के
माध्यम से प्रेरणा देने की कोशिश कर रही है मगर गीत
खत्म होते तक नायक सो जाता है. अब भला इतना मधुर
गीत सुन कर किसे  नींद नहीं आयेगी ?




गीत के बोल:

दो दिन की ज़िंदगी में दुखड़े हैं बेशुमार
दुखड़े हैं बेशुमार
दो दिन की ज़िंदगी में दुखड़े हैं बेशुमार
दुखड़े हैं बेशुमार
है ज़िंदगी उसी की जो हँस हँस के दे गुज़ार
हँस हँस के दे गुज़ार

उभरेंगे फिर सितारे चमकेगा फिर से चाँद
चमकेगा फिर से चाँद
उभरेंगे फिर सितारे चमकेगा फिर से चाँद
चमकेगा फिर से चाँद
उजड़े हुए चमन में आयेगी फिर बहार
आयेगी फिर बहार
है ज़िंदगी उसी की जो हँस हँस के दे गुज़ार
हँस हँस के दे गुज़ार

है धूप कहीं छाया
है धूप कहीं छाया ये ज़िन्दगी की रीत
ये ज़िन्दगी की रीत
है आज तेरी हार सखी कल है तेरी जीत
है आज तेरी हार सखी कल है तेरी जीत
हर साँस तुझसे बस यही कहती है बार बार
कहती है बार बार
है ज़िंदगी उसी की जो हँस हँस के दे गुज़ार
हँस हँस के दे गुज़ार

मरने के सौ बहाने जीने को सिर्फ़ एक
जीने को सिर्फ़ एक
मरने के सौ बहाने जीने को सिर्फ़ एक
जीने को सिर्फ़ एक
उम्मीद के शुरू में बजते हैं दिल के तार
बजते हैं दिल के तार
है ज़िंदगी उसी की जो हँस हँस के दे गुज़ार
हँस हँस के दे गुज़ार
दो दिन की ज़िंदगी में दुखड़े हैं बेशुमार
दुखड़े हैं बेशुमार
…………………………………………….
Do in ki zindagi mein dukhde-Poonam 1952

Artist: Kamini Kaushal, Ashok Kumar

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Jan 21, 2020

दिन सुहाने ये मौसम बहार का-पूनम १९५२

क्या दिन थे वे भी जब बांसुरी की तान पर बकरियां,
भैंसें और लड़कियां आ जाया करती थीं.

सुनते हैं फिल्म पूनम से एक गीत शैलेन्द्र का लिखा
हुआ जिसे परदे पर कामिनी कौशल गा रही हैं. फिल्म
का नायक कार दुरुस्त करते करते चौंक के गाने वाली
को ढूँढने की कोशिश कर रहा है. 





गीत के बोल:

दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का
दिन सुहाने ये मौसम बहार का
दिल ये चाहे मैं गाऊँ गीत प्यार का
दिल ये चाहे मैं गाऊँ गीत प्यार का
हो गीत प्यार का
दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का

ये धडकन ये मस्ती ये हलचल
ये धडकन ये मस्ती ये हलचल
ये जवानी पे खुशियों का आँचल
ये जवानी पे खुशियों का आँचल
कहना क्या जिंदगी के सिंगार का
कहना क्या जिंदगी के सिंगार का
मौसम बहार का

दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का

जी ये चाहे के अपना हो कोई
जी ये चाहे के अपना हो कोई
नींद में प्यारा सपना हो कोई
नींद में प्यारा सपना हो कोई
और मज़ा हो किसी के इंतज़ार का
और मज़ा हो किसी के इंतज़ार का
मौसम बहार का

दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का

खिल उठी दिल की खामोश कलियाँ
खिल उठी दिल की खामोश कलियाँ
जगमगाई उम्मीदों की गलियां
जगमगाई उम्मीदों की गलियां
ये मचलना दिल-ए-बेक़रार का
ये मचलना दिल-ए-बेक़रार का
मौसम बहार का

दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का
दिल ये चाहे मैं गाऊँ गीत प्यार का
दिल ये चाहे मैं गाऊँ गीत प्यार का
हो गीत प्यार का
दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का
……………………………………………
Din suhane ye mausam bahar ka-Poonam 1952

Artist: Kamini Kaushal

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Nov 19, 2019

लूटा है ज़माने ने-दोराहा १९५२

बहुत दिनों बाद कोई फरमाईश आई है अतः हम आपको
एक गीत उसी फिल्म से सुनवायेंगे जिससे कल एक सुनवाया
था.

अनिल बिश्वास को हिंदी फिल्म संगीत जगत में पितामह
का दर्ज़ा हासिल है. उन्होंने हिंदी गाने के फॉर्मेट और उसकी
जमावट पे जो काम किया उसे काफी संगीतकारों ने अपनाया
और इसका फायदा ५० के दशक में साफ़ नज़र आने लगा.

आज सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया हुआ एक बढ़िया गीत
फिल्म दोराहा से. प्रेम धवन की रचना है. तीनों अंतरे अलग
अलग तरीके से गाये गए हैं. ये करिश्मा आपको अनिल बिश्वास
के संगीत में खूब मिलेगा.




गीत के बोल:

लूटा है ज़माने ने क़िस्मत ने मिटाया है
इक बार हँसाया था
इक बार हँसाया था सौ बार रुलाया है
लूटा है ज़माने ने क़िस्मत ने मिटाया है

दुनिया में वफ़ा कैसी उल्फ़त भी है इक धोखा
दुनिया में वफ़ा कैसी उल्फ़त भी है इक धोखा
ये दुनिया भी देखी है
ये दुनिया भी देखी है जो धोखा भी खाया है

इस ग़म के अँधेरे में अब याद नहीं ये भी
इस ग़म के अँधेरे में अब याद नहीं ये भी
कब दीप जलाया था
कब दीप जलाया था कब दीप बुझाया है

ख़ामोश हूँ इस डर से रुसवाई न हो तेरी
ख़ामोश हूँ इस डर से रुसवाई न हो तेरी
उमडे हुये अश्क़ों को
उमडे हुये अश्क़ों को पलकों में छुपाया है

लूटा है ज़माने ने क़िस्मत ने मिटाया है
…………………………………………………….
Loota hai zamane ne-Doraha 1952

Artist: Nalini Jaywant

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Nov 18, 2019

घड़ियाँ गिनी हैं मैंने तेरे इंतजार की-दोराहा १९५२

घड़ियों का ज़माना बीत चुका. मेरा आशय हाथ-घड़ियों से
है. मोबाइल ने इनकी उपियोगिता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया
है. किसी ज़माने में ये फैशन का सामान भी हुआ करती थीं.
पहनने को तो आज भी पब्लिक पहनती है मगर आबादी
का छोटा हिस्सा.

घंटे-घड़ियाल हिट्स के अंतर्गत हमने आपको अभी तक ५-६
गीत सुनवा दिए हैं. एक और सुन लेते हैं जो बेचारा सुने
जाने को बेताब है.

गीत है दोराहा फिल्म से जिसे प्रेम धवन ने लिखा है और
अनिल बिश्वास ने संगीत से संवारा. इसे लता मंगेशकर ने
गाया है



गीत के बोल:


घड़ियाँ गिनी हैं मैंने तेरे इंतजार की
क्या तुझको भी खबर है दिल-ए-बेकरार की
क्या तुझको भी खबर है दिल-ए-बेकरार की
ओ दिल-ए-बेकरार की
ओ दिल-ए-बेकरार की

वो भीगी भीगी राह
वो दिल से नज़र की बात
जादू सा कर गयी हैं निगाहें वो प्यार की
जादू सा कर गयी हैं निगाहें वो प्यार की
हो निगाहें वो प्यार की
हो निगाहें वो प्यार की

तुमसे तो हर तरफ थे गुल्चां खिले हुए
लाऊँ कहाँ से हाय वो मस्ती बहार की
लाऊँ कहाँ से हाय वो मस्ती बहार की
वो मस्ती बहार की
वो मस्ती बहार की

दुनिया की कुछ खबर है ना अपना ही होश है
दुनिया से ही तो है मेरे सब्र-ओ-करार की
दुनिया से ही तो है मेरे सब्र-ओ-करार की
मेरे सब्र-ओ-करार की
मेरे सब्र-ओ-करार की
………………………………………………….
Ghadiyan gini hain maine-Doraha 1952

Artist: Nalini Jaywant

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Aug 14, 2019

मुहब्बत तर्क की मैंने-दोराहा १९५२

धीमे और सूदिंग किस्म के गीत रचने में अनिल बिश्वास और
कुछ संगीतकार जैसे-सी रामचंद्र, गुलाम मोहम्मद और कुछ
मात्रा में मदन मोहन लाजवाब रहे. इनमें एक नाम और जोड़
लेते हैं वो है सचिन देव बर्मन. फिल्म देवदास के गीत लाजवाब
हैं.

धीमी चाल वाले गीत बना के उन्हें लोकप्रिय बना पाना आसान
काम नहीं होता. गीतकार की मेहनत भी बढ़ जाती है. सुनते हैं
साहिर के बोलों और अनिल बिश्वास के संगीत वाला एक गीत
तलत महमूद की मखमली आवाज़ में.




गीत के बोल:

मोहब्बत तर्क की मैंने गरेबां सी लिया मैंने
गरेबां सी लिया मैंने
ज़माने अब तो खुश हो ज़हर ये भी पी लिया मैंने
ये भी पी लिया मैंने

अभी जिंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ये दिल में
अभी जिंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ये दिल में
के अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने
सहारे जी लिया मैंने
मोहब्बत तर्क की मैंने

तुझे अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है
तुझे अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है
के कुछ घड़ियाँ तेरे ख्वाबों में खो कर जी लिया मैंने
खो कर जी लिया मैंने
मोहब्बत तर्क की मैंने

बस अब तो मेरा दामन छोड़ दे बेकार उम्मीदों
बस अब तो मेरा दामन छोड़ दे बेकार उम्मीदों
बहुत दुःख सह लिये मैंने बहुत दिन जी लिया मैंने
बहुत दिन जी लिया मैंने
मोहब्बत तर्क की मैंने
………………………………………………………..
Mohabbat tark ki maine-Doraha 1952

Artist:

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Jul 1, 2019

ओ मैडम-आशियाना १९५२

सन १९५२ की फिल्म आशियाना में गंभीर गीतों के साथ ही
एक हल्का फुल्का गीत भी है. मेरे ख्याल से कथानक ऐसे होने
चाहिए जिसमें सभी प्रकार के रंग वाले गीत हों. इससे संतुलन
बना रहता है. ये मेरा अपना विचार है. फिल्म हम मनोरंजन
के लिए देखते हैं. लोजिक के हिसाब से मनोरंजन में दुखी होने
का क्या काम.

खैर छोडिये सिनेमा का माध्यम आती क्या खंडाला सिखलाने के
अलावा और भी कई काम करता है जो इस एक पोस्ट में हम
नहीं समेट सकते.

सुनते हैं शमशाद बेगम और किशोर कुमार का गाया हुआ गीत
जिसे लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और जिसकी धुन तैयार की है
मदन मोहन ने.



गीत के बोल:

ओ मैडम
ओ ओ मैडम
ओ ओ ओ मैडम
हे  दो से हो गये एक हम न फ़ाका न ग़म
ओ मैडम

ओ मिस्टर
आ आ आ मिस्टर
दिल का होर्न आज ख़ुशी से बाजे पम-पम
ओ मिस्टर
   
पापा ख़ुश मामा ख़ुश
पापा ख़ुश मामा ख़ुश
देख के अपनी जोड़ी
वो क्या जाने अपनी शादी की मुद्दत है थोड़ी
कल की किसने देखी प्यारे आज मनाते ग़म
ओ मिस्टर
ओ मैडम
ओ ओ मैडम
हाँ दो से हो गये एक हम न फ़ाका न ग़म
ओ मैडम
ओ मिस्टर
ओ ओ ओ मिस्टर
दिल का होर्न आज ख़ुशी से     बाजे पम-पम
ओ मिस्टर

मैरिज की रात है हो ओ ओ ओ कितनी सुहानी
मैरिज की रात है हो ओ ओ ओ कितनी सुहानी
ओ लेकिन मेरी बुलबुल मैरिज है आनी-जानी
आनी जानी जानी आनी यानी यानी जानी जानी
लेकिन मेरी बुलबुल मैरिज है आनी जानी
कौन ये जाने कब पड़ जाये ढाई वाट का बम

ओ मैडम
ओ ओ मैडम
ओ ओ ओ मैडम
होये दो से हो गये एक हम न फ़ाका न ग़म
ओ मैडम

ओ मिस्टर
ओ ओ ओ मिस्टर
दिल का होर्न आज ख़ुशी से बाजे पम-पम
ओ मिस्टर

मैरिज तो है एक गुब्बारा
हे मैरिज तो है एक गुब्बारा
कभी न फूले सारा
मार मार के फूँकें थक जाये मियाँ बेचारा
मार मार के फूँकें थक जाये मियाँ बेचारा

अरे अच्ची है वो बीवी जिसका जल्दी निकले दम

क्यों मैडम
अबे जा मिस्टर
ओ मैडम
दो से हो गये एक हम न फ़ाका न ग़म
ओ मैडम

ओ मिस्टर
ओ ओ ओ मिस्टर
दिल का होर्न आज ख़ुशी से बाजे पम-पम
ओ मिस्टर
ओ मैडम
ओ मिस्टर
ओ ओ मैडम
......................................................................
O madam-Ashiana 1952

Artists: Ek nayak, ek nayika, Raj Kapoor

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Dec 28, 2018

तुमको फ़ुरसत हो-बेवफ़ा १९५२

पूल में तैरती नायिका से नायक मजेदार प्रश्न कर रहा है.
उसे पीपिंग टॉम नहीं कह सकते क्यूंकि कहानी के अनुसार
वो प्रेमी है उसके अलावा वो तो सामने बैठा देख रहा है.
पीपिंग टॉम छुप के देखा करते हैं.

अब या तो वो पहली बार कोट पैंट पहन कर आया है या
पहली बार उसे किसी ने सेब खाने को दिया है तो वो
इतना गदगद है कि नायिका को बतलाना चाहता है अपनी
उपलब्धियों के बारे में.

स्विमिंग पूल फर्स्ट फ़्लोर पर है और नायक ग्राउंड फ्लोर पर.
नायक की आँखों का एंगल देख कर तो ऐसा ही लग रहा
है.

बेवफ़ा फिल्म का ये बेहतर गीत है और ज्यादा लोकप्रिय भी.
सरशर सैलानी के बोल हैं और ए आर कुरैशी का म्यूज़िक




गीत के बोल:

तुमको फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो
तुमको फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो
चार आँखें न करो
चार आँखें न करो एक नज़र देख तो लो
तुमको फ़ुर्सत हो

बात करने के लिए कौन तुम्हें कहता है
बात करने के लिए कौन तुम्हें कहता है
ना करो हमसे कोई
ना करो हमसे कोई बात मग़र देख तो लो

तुमको फ़ुर्सत हो
तुमको फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो

अपने बीमार-ए-मोहब्बत की तसल्ली के लिए
अपने बीमार-ए-मोहब्बत की तसल्ली के लिए
हाल-ए-दिल पूछ तो लो
हाल-ए-दिल पूछ तो लो ज़ख़्म-ए-जिगर देख तो लो

तुमको फ़ुर्सत हो
तुमको फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो

दिल-ए-बर्बाद को आबाद करो या न करो
दिल-ए-बर्बाद को आबाद करो या न करो
कम से कम तुम मेरा
कम से कम तुम मेरा उजड़ा हुआ घर देख तो लो

तुमको फ़ुर्सत हो
तुमको फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो
तुमको फ़ुर्सत हो
………………………………………………………..
Tum ko fursat ho-Bewafa 1952

Artist: Raj Kapoor, Nargis

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Oct 26, 2018

तू आये न आये तेरी खुशी-बेवफा १९५२

तलत महमूद की मखमली आवाज़ में सरशर सैलानी की
एक रचना सुनेंगे फिल्म बेवफा से. इस फिल्म के गाने एक
ट्रीट की तरह हैं. तलत के गाये काफी गीत मौजूद हैं इसमें.

फिल्म की गीत सुने जाते हैं इसकी वजह धुनें बेहतर होना
है या फिल्म की स्टारकास्ट, ये सोचने वाली बात है.

गीत में नायक एक ही जगह बैठा है और नायिका के ही
मूवमेंट्स दिखलाई देते हैं गीत में. ये भी एक समय था
बॉलीवुड में और एक समय ऐसा भी आया जब नायिका
एक जगह बैठी होती और नायक पूरे शरीर को हिला रहा
होता, उछल कूद कर रहा होता.




गीत के बोल:

तू आये न आये तेरी खुशी
तू आये न आये तेरी खुशी
हम आस लगाये बैठे हैं
दीदार की प्यासी आँखों में
दीदार की प्यासी आँखों में
तूफ़ान छुपाये बैठे हैं
तू आये न आये तेरी खुशी

ए दर्द-ए-मुहब्बत तेरी क़सम
दिल हमने लगा के देख लिया
ए दर-ए-मुहब्बत तेरी क़सम
दिल हमने लगा के देख लिया
अश्कों की ज़ुबानी किस्सा-ए-ग़म
दुनिया को सुना के देख लिया
गैरों से गिला क्या अपने ही
गैरों से गिला क्या अपने ही
जब आँख चुराए बैठे हैं
गैरों से गिला क्या अपने ही
जब आँख चुराए बैठे हैं
तू आये न आये तेरी खुशी

इतना तो बता दे ए ज़ालिम
अब नज़रों से तू दूर है क्यूँ
इतना तो बता दे ए ज़ालिम
अब नज़रों से तू दूर है क्यूँ
मिलना ही तुझे मंज़ूर नहीं
या मेरी तरह मजबूर है तू
तू कह दे अगर तो उठ जायें
हम तेरे बिठाये बैठे हैं
तू कह दे अगर तो उठ जायें
हम तेरे बिठाये बैठे हैं
तू आये न आये तेरी खुशी
……………………………………….
Too aaye na aaye teri-Bewafa 1952

Artist: Raj Kapoor, Nargis

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Oct 22, 2018

दिल मिला दर्द को मेहमान-बेवफ़ा १९५२

गीतकार के सामने भी समस्या खड़ी हो जाती है एक ही
फिल्म में एक जैसे गाने लिखने की नौबत आ जाती है.
तब वो लिखता है- आँख बक्ष्शी है आँख लड़ाने के लिए,
मुंह बख्शा है खाना खाने के लिए, अरे नहीं नहीं, इधर
इसका मतलब होगा-गाना गाने के लिए.

पहली पंक्ति में गीतकार ने अपनी भड़ास निकल दी है
जो शायद संगीतकार के समझ ना आई और ना ही
परदे पर गाने वाले के. गायक को इतनी छूट कहाँ
फिल्म उद्योग में के वो कुछ सोच सके.

ये हमारा अपना विचार है, ३-५ पांच पन्ने के निबंध
वाले चाहें तो अपनी दलीलें पेश कर सकते हैं इधर.
देर लगती है बुझाने के लिए तो फायर ब्रिगेड बुलवा
लो.

सरशर सैलानी के बोल, अल्लारखा का संगीत है और
तलत महमूद की आवाज़.



गीत के बोल:

दिल मिला दर्द को मेहमान बनाने के लिये
आँख बख़्शी है कहीं आँख लड़ाने के लिये
हो लड़ाने के लिये
आँख बख़्शी है कहीं आँख लड़ाने के लिये

काम हाथों का है मिलने की दुआएं करना
काम हाथों का है मिलने की दुआएं करना
सर मिला आपके कदमों पे झुकाने के लिये
सर मिला आपके कदमों पे झुकाने के लिये
हो झुकाने के लिये
सर मिला आपके कदमों पे झुकाने के लिये

हुस्न की आँख में आँसू नहीं देखे जाते
हुस्न की आँख में आँसू नहीं देखे जाते
इश्क़ तैयार है हर नाज़ उठाने के लिये
इश्क़ तैयार है हर नाज़ उठाने के लिये
हो उठाने के लिये
इश्क़ तैयार है हर नाज़ उठाने के लिये

हाय आते ही ये जाने का तक़ाज़ा कैसा
हाय आते ही ये जाने का तक़ाज़ा कैसा
देर लगती है लगी दिल की बुझाने के लिये
देर लगती है लगी दिल की बुझाने के लिये
हो बुझाने के लिये
देर लगती है लगी दिल की बुझाने के लिये
आँख बख़्शी है कहीं आँख लड़ाने के लिये
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Dil mila dard ko mehmaan-Bewafa 1952

Artist: Raj Kapoor

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Oct 16, 2018

ये कैसी अदाएं-राग रंग १९५२

सन बावन की फिल्म रागरंग से अगला गाना सुनते हैं.
प्रस्तुत गीत के गीतकार कैफ इरफ़ानी हैं. गाने के शुरू
में jazz की कोई राग है और उसके बाद देसी राग.

कवियों और गीतकारों की पंक्तियाँ डिकोड करना कोई
बच्चों का खेल नहीं. अब पिछले गीत को ही लीजिए जो
कह रहा है-दिल की लगी और दिल लगाना अलग अलग
आइटम हैं जैसे आग लगी और आग लगाना दो अलग
बातें हैं.

और भी सरल शब्दों में पुंगी बजना और पुंगी बजाना
अलग अलग पहलू हैं. ये हिंदी में पढ़ने में अटपटा लग
रहा है. मानिए, कसम से, जब इसी बात को आप किसी
जगह अंग्रेजी में लीपा हुआ पायेंगे तो आपको पढ़ने में
आनंद आएगा.

पहले तो हवा में तारीफ करो, टायर से हवा निकलवाओ
फ़िर शिकवे-शिकायत करो. ऐसा करो ही क्यों. जब प्यार
की ओखली में सर दे ही दिया है तो मूसल से क्यूँ घबराना



गीत के बोल:

ये कैसी अदाएं हैं उनकी अदाएं
के दिल को भी तोड़ें नज़र भी न आएं
ये कैसी अदाएं हैं उनकी अदाएं
के दिल को भी तोड़ें नज़र भी न आएं
ये कैसी अदाएं

ये दिल जो लगाया बड़ी चोट खाई
ये दिल जो लगाया बड़ी चोट खाई
जफ़ा तुमने की और मुझे शर्म आई
मुझे ले न डूबे ये मेरी खतायें
ये कैसी अदाएं हैं उनकी अदाएं
के दिल को भी तोड़ें नज़र भी न आएं
ये कैसी अदाएं

वही आसमाँ है वही चाँद तारे
वही आसमाँ है वही चाँद तारे
मगर तुम नहीं वो न वादे तुम्हारे
ये किस जुर्म की मिल रही हैं सज़ायें

ये कैसी अदाएं हैं उनकी अदाएं
के दिल को भी तोड़ें नज़र भी न आएं
ये कैसी अदाएं
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Ye kaisi adayen-Raag rang 1952

Artists:

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Sep 17, 2018

यही बहार है-राग रंग १९५२

सरशर सैलानी के लिखा हुआ एक गाना सुनते हैं फिल्म
राग रंग से. फिल्म की नायिका गीता बाली हैं. गीत का
वीडियो उपलब्ध नहीं है.

हर्षोल्लास वाला गीत है और फिल्म में कई रंग वाले
गाने हैं. मनियापुर के छैला नाम से भी एक गाना है.
ये मनियापुर कहाँ है कोई बतलायेगा.

फिल्म में संगीत सेवा रोशन ने प्रदान करी है.



 गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला ला ला
यही बहार है यही बहार है
यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की
यही घडी है जवानी के गुनगुनाने की
हाँ मुस्कुराने की

ये प्यारे प्यारे नज़ारे ये ठंडी ठंडी हवा
ये हल्का हल्का नशा
ये काली काली घटाओं की मस्त मस्त अदा
ये कोयलों की सदा
मचल के आ गई रुत मस्तियाँ लुटाने की
हाँ झूम जाने की

यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की

कली कली से ये भंवरे ने मुस्कुरा के कहा 
नज़र मिला के कहा 
नज़र से काम न निकला तो गुदगुदा के कहा 
गले लगा के कहा 
किया है प्यार तो किया है प्यार तो 
किया है प्यार तो परवाह न कर ज़माने की 
हाँ हँसी उडाने की

यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जो टूटता है रुबां
जो टूटा है रुबां उसको टूट जाने दे
मेरे शबाब को जी भर के गीत गाने दे
हाँ गीत गाने दे
मेरे शबाब को जी भर के गीत गाने दे
हाँ गीत गाने दे
तड़प उठी हुई तड़प उठी हुई
तड़प उठी हैं तमन्नायें झूम जाने की
हाँ लगी बुझाने की

यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की
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Yahi bahar hai-Raag rang 1952

Artist: Geeta Bali

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Apr 30, 2018

आग लगी तन मन में-आन १९५२

आग दो तरह से लगती है- तन बदन में और तन मन में.
कौनसी धुंआ ज्यादा दुआं निकालती है ये तो नहीं मालूम
मगर इतना तो है तन-मन शब्दों को प्रयोग कोमल भावों
के लिए ज्यादा किया जाता है.

हिंदी सिनेमा में हीरो के साथ साइड-किक और हीरोइन के
साथ साइड-किकनी ज़रूर होते हैं. इनके बिना कथानक में
रोचकता नहीं आती है. सहेली या सहेला आपको ऐतिहासिक
कथानकों में ज्यादा मिलेंगे.

सुनते हैं फिल्म आन से शमशाद बेगम का गाया हुआ गीत
गीत संगीत क्रमशः शकील बदायूनीं और नौशाद का है.
सुन्दर दृश्यावली है गीत की. जम्बो साइज़ का कमाल का
फूल भी दिखेगा आपको गीत में.



गीत के बोल:

आग लगी तन मन में दिल को पड़ा थामना
राम जाने कब होगा सैयांजी का सामना
आग लगी तन मन में दिल को पड़ा थामना
राम जाने कब होगा सैयांजी का सामना हो

सूनी है आज पिया मोरी अटरिया
पिया मोरी अटरिया ज़रा दीजो खबरिया
दिल तड़पे जैसे बिना जल के मछरिया
ज़रा लीजो खबरिया
सूनी है आज पिया मोरी अटरिया
पिया मोरी अटरिया
दिल तड़पे जैसे बिना जल की मछरिया
ज़रा लीजो खबरिया
आन पड़े मुश्किल तो आये कोई काम ना
राम जाने कब होगा सैयांजी का सामना हूँ

साजन की याद मुझे पल पल सताए
मुझे पल पल सताए देखो नैना भर आये
तन का सिंगार मेरे मन को ना भाये
देखो नैना भर आये
साजन की याद मुझे पल पल सताए
मुझे पल पल सताए
तन का सिंगार मेरे मन को ना भाये
देखो नैना भर आये
प्यार मेरा हो जाए कहीं बदनाम ना
राम जाने कब होगा सैयांजी का सामना हाय

लागी ना छूटे करूं कोई बहाना
करूं कोई बहाना आया नाज़ुक ज़माना
दिल मेरा बना पिया तेरा निशाना
आया नाज़ुक ज़माना
लागी ना छूटे करूं कोई बहाना
करूं कोई बहाना
दिल मेरा बना पिया तेरा निशाना
आया नाज़ुक ज़माना
होये बुरा उल्फत का देखो अंजाम ना
राम जाने कब होगा सैयांजी का सामना
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Aag lagi tan badan mein-Aan 1952

Artists: Sheela Naik, Nadira

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Apr 5, 2018

उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल-नौबहार १९५२

डोले हिंडोले हिट्स के अंतर्गत आज सुनते हैं सन १९५२ की
फिल्म नौबहार से एक गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ.
अशोक कुमार और नलिनी जयवंत अभिनीत इस फिल्म में
कुछ मधुर गीत हैं. प्रस्तुत गीत भी अपने ज़माने का चर्चित
गीत है.

शैलेन्द्र के बोल हैं और रौशन का संगीत. गीत में आप पांच
कलाकारों को देख पाएंगे जिनमें से दो के नाम नाम आपको
बतलाये देते हैं-अशोक कुमार और नलिनी जयवंत.




गीत के बोल:

उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल
जाऊं तो मुश्किल न जाउं तो मुशकिल
जाऊं तो मुश्किल न जाउं तो मुशकिल
उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल

बचपन जवानी जो मिलने लगे हैं
बचपन जवानी जो मिलने लगे हैं
मौसम बिना फूल खिलने लगे
फूल खिलने लगे हैं
छेड़ी किसी ने मेरे मन की बीना
छेड़ी किसी ने मेरे मन की बीना
गाऊं तो मुशकिल न गाऊं तो मुशकिल
जाऊं तो मुश्किल न जाउं तो मुशकिल
उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल

जब से वो नैनों में आये
मेरे सपने नये रंग लाये
नये रंग लाये
जब से वो नैनों में आये
मेरे सपने नये रंग लाये
नये रंग लाये
नाज़ों के पाले है मेरे सपने
नाज़ों के पाले है मेरे सपने
देखूं तो मुशकिल दिखाऊं तो मुशकिल
जाऊं तो मुश्किल न जाउं तो मुशकिल
उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल

उलझी है काँटों में हाय चुनरिया
उलझी है हाय राम मेरी चुनरिया
छोड़ूं तो मुशकिल छुड़ाऊं तो मुशकिल
जाऊं तो मुश्किल न जाउं तो मुशकिल
उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल
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Unke bulawe pe dole mera dil-Naubahar 1952

Artists: Ashok Kumar, Nalini Jaywant

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Mar 9, 2018

कभी न बिगड़े किसी की मोटर-मोती महल १९५०

अगर शब्दकोष में समाहित असंख्य शब्दों का प्रयोग फिल्मों के नामों
में हो चुका है तो फिल्मों के गीत भी विभिन्न विषयों और पहलुओं से
अछूते नहीं बचे हैं.

मोटर कार बिगड़ने के ऊपर भी एक गीत मौजूद है. कार की सर्विसिंग
पर एक गीत आपन सुन चुके हैं जिसमें कार सुधारने का जिक्र नहीं है.
वो गीत किशोर कुमार और मधुबाला पर फिल्माया गया है. गौरतलब
है इस गीत में ‘चलती का नाम गाडी’ शब्द भी आये हैं और उस फिल्म
की अभिनेत्री का नाम भी. ये गीत १९५२ की फिल्म का है.

प्रेम धवन की रचना है और हंसराज बहल का संगीत. सुरैया ने इसे
गाया है थोड़े अलग से अंदाज़ में.
   



गीत के बोल:

कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में
कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में
खड़े रहो बस बेबस होकर रस्ते में
कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में

कपड़े हों मैले मुँह काला काला
हो वो सुरैया या मधुबाला आ हा
हो वो सुरैया या मधुबाला
बड़े बड़े भी बन जाया करते हैं जोकर रस्ते में
बड़े बड़े भी बन जाया करते हैं जोकर रस्ते में

कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में

बार बार हैंडल बदलवाया
धक्के दे दे सर चकराया
धक्के दे दे सर चकराया
निकल गया है अपना तो कचूमर रस्ते में
निकल गया है अपना तो कचूमर रस्ते में

कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में

तेल पिलाया डाला पानी
पर ज़ालिम ने एक न मानी
पर ज़ालिम ने एक न मानी
याद आती है हमको नानी अब रो रो कर रस्ते में
याद आती है हमको नानी अब रो रो कर रस्ते में

कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में

सच कहती है दुनिया सारी
चलती का ही नाम है गाड़ी
चलती का ही नाम है गाड़ी
मोटर भी छकड़ा है जब हो जाये पंक्चर रस्ते में
मोटर भी छकड़ा है जब हो जाये पंक्चर रस्ते में

कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में
खड़े रहो बस बेबस होकर रस्ते में
कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में
…………………………………………………………………………..
Kabhi na bigde kisi ki motor-Moti mahal 1952

Artist: Suraiya

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Feb 2, 2018

आ रे भवरे आ-आनंद मठ १९५२

गीता दत्त का गाया और गीता बाली पर फिल्माया गया एक
मधुर गीत सुनते हैं सन १९५२ की फिल्म आनंदमठ से. यह
गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और इसका संगीत तैयार किया है
हेमंत कुमार ने.

आज़ादी के आन्दोलन की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म के २-३
गीत बेहद लोकप्रिय हैं.





गीत के बोल:

ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ
आ रे भँवरे आ ओ ओ ओ ओ
आ रे भँवरे आ
महकी मेरे मन की बगिया
फूल फूल पे जा रस पी जा
रस पी जा उड़ जा रसिया
आ रे भँवरे आ ओ ओ ओ ओ

ओ ओ ओ ये दिन चार जवानी
ना डर आ कर ले मनमानी
ना डर आ कर ले मनमानी
आज शुरू कल खतम कहानी
गीत प्रीत के गा दिल बहला
क्या जाने कल क्या होगा
आ रे भँवरे आ ओ ओ ओ ओ

कल ना मैं ना तू होगा
ना होगी ये फुलवारी
इन सूनी राहों पे उडती होगी
धुल हमारी
ओ दर्द निशानी जिसकी
दर्द निशानी
ओ दर्द निशानी जिसकी
दर्द निशानी
ओ जिसकी दर्द निशानी
ऐसी दो दिन की जिंदगानी
ऐसी दो दिन की जिंदगानी
रहे ना राजा रहे ना रानी
एक आज का दिन अपना है
क्या जाने कल क्या होगा
आ रे भँवरे आ ओ ओ ओ ओ
……………………………………………………
Aa re bhanwre aa-Anand Math 1952

Artist: Geeta Bali

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Feb 1, 2018

शाम सुहानी नदी के किनारे-निशान डंका १९५२

आपको आज एक और युगल गीत सुनवाते हैं तलत महमूद और
गीता दत्त का गया हुआ. इस गीत का संगीत तैयार किया है
बसंत प्रकाश ने. बसंत प्रकाश संगीतकार खेमचंद प्रकाश के
भाई थे.

श्रेणी बनाने के शौक़ीन लोग इसे ‘नदी का किनारा’ हिट्स श्रेणी
में रखते हैं. पुराना गीत है अतः इसके शौक़ीन भी पुराने ही
होंगे.

इसका सबसे पहला वर्ज़न जो मैंने सुना था वो था-हवा में उड़ता
जाए वर्ज़न. ये ऐसे गीत होते थे जो रेडियो सीलोन से रेकोर्ड किये
गए होते थे. इनमें गाना कुछ यूँ रेकोर्ड होता था मानो गाने वाले
दरियागंज से कश्मीरी गेट चले जाते हों और फिर वापस आ जाते
हों. ये आना-जाना लगा ही रहता है गीत में. इन्हें हम अंग्रेजी
में कहते हैं-HMUJ version.





गीत के बोल:

शाम सुहानी नदी के किनारे
मचलने लगे आज अरमान हमारे
नदी के किनारे
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ

रुपहली सुनहरी ये दरिया की मौजें
हो ओ ओ आये चढती हुई जैसे राजा की फौजें
भागें छुप जाएँ हम डर के मारे
भागें छुप जाएँ हम डर के मारे
नदी के किनारे

शाम सुहानी नदी के किनारे
मचलने लगे आज अरमान हमारे
नदी के किनारे
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ

आओ आओ मोहब्बत की दुनिया बसायें
मन को भाति नहीं आपकी ये अदायें
निराले हैं दुनिया से नखरे तुम्हारे
नदी के किनारे
निराले हैं दुनिया से नखरे तुम्हारे
नदी के किनारे
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ

शाम सुहानी नदी के किनारे
मचलने लगे आज अरमान हमारे
नदी के किनारे
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
.....................................................
Shaam suhani nadi ke kinare-Nishan Danka 1952

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