गोरी ज़रा हँस दे तू-असली नकली १९६२
आदेश वाले गीत कम मिलेंगे आपको. खुशनुमा एहसास वाले
गीत तो बहुत से हैं. कई दर्शनवादी गीतों का सार भी यही है
कि मनुष्य को रोने झींकने के बजाये खुश रहना चाहिए.
असली नकली से एक गीत सुनते हैं जिसमें सीधे मुद्दे की बात
की गई है. नायक जो कि एक स्कूल बस का ड्राइवर है इस गीत
में एक मुंह फुलाए खड़ी बच्ची को गीत गा के बहला रहा है जो
शायद स्कूल नहीं जाना चाहती. उसके इन प्रयासों से बाकी के
बच्चे भी खुश हो जाते हैं इस गीत में. गीत समाज का एक
आईना जैसा है जिसमें आपको हंसाने वाला तो एक आध ही
मिलेगा, रुलाने वाले सैकड़ों मिलेंगे. रोने का अर्थ केवल आंसू
टपकान नहीं है, मन का रोना दिखाई नहीं देता और ये ज्यादा
तोड़ देता है किसी भी व्यक्ति को.
गीत के बोल:
गोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ छोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ गोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ छोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ जिद्दी छोकरी फूलों की टोकरी
अरी जादू भरी पुड़िया
ओ छोटी सी पिटीया गज़ भर की चुटिया
ना कर गुस्सा मेरी गुड़िया
गोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ छोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
गोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ छोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
जीवन के रास्ते हँसने के वास्ते
ना रोना तू मेरी नीता
हो तुझको घुमाऊंगा दुनिया दिखाऊंगा
ना कर झगड़ा मेरी रीटा
गोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ छोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
गोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ छोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
मेरी कठपुतली बिजली से उजली
बड़ी भोली तेरी दुनिया
चलने में तीर है कितनी शरीर है
बड़ी जिद्दी मेरी मुनिया
गोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ छोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
गोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ छोरी ज़रा हँस दे तू हँस दे तू
हँस दे ज़रा
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Gori zara hans de too-AsliNaqli 1962
Artists; Dev Anand
