हाय हाय हाय ये निगाहें-पेइंग गेस्ट १९५७
जिसे दारू कहता है आवश्यक तत्व रहा है और रहेगा किसी भी कथानक
का, फ़िल्मी हो या सामाजिक या व्यक्तिगत ही हो. बहानेबाजी के श्रेष्ठ
उदाहरण दारू के सन्दर्भ में ही सुनाई देते हैं.
दारू अपना असर ज़रूर दिखलाती है, आदमी को औकात पर ला देती है.
फिल्मों में कई ऐसे प्रसंग आये हैं जब नायक ने पहली बार पी हो और
बाद में या तो प्रवचन दिए हों या कोई गीत गाया हो. वैसे भी हिंदी
फिल्म का नायक विद्वान होता है, बिना उँगलियाँ हिलाए ही वो गिटार,
सितार, एकोर्डियन, प्यानो सब कुछ बजा सकता है. इसी तरह ही वो
किसी भी विषय पर साधिकार अपना वक्तव्य दे सकता है जिसमें प्रेम,
प्यार, मोहब्बत प्रधान विषय है. विषय शब्द का एक दूसरा अर्थ भी है,
आप जानते हैं.
देव आनंद अभिनय के अलावा एक और चीज़ के मास्टर थे-योग के.
उनके सदाबहार युवा रहने के पीछे का राज़ यही है. अपने समकालीन दो
अन्य बड़े अभिनेताओं की तुलना में वे सोबर नज़र आये भले ही किसी
फिल्म में उन्होंने किसी गुंडे मवाली की भूमिका निभाई हो. याद हो
अगर आपको बनारसी बाबू फिल्म.
मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीत को परदे पर देव आनंद एक पार्टी में
गा रहे हैं. किशोर कुमार ने पार्श्व गायन किया है जो एक समय खुद के
ऊपर फिल्माए या फिर केवल देव आनंद के ऊपर फिल्माए गए गीत ही
गाया करते थे.
गीत के बोल:
शमा जलती है जले
रात ढलती है ढाले
छोड़ के ऐसी महफ़िल
हम नहीं जाने वाले
हाय हाय हाय ये निगाहें
हाय हाय हाय ये निगाहें
कर दे शराबी जिसे चाहें जिसे चाहें
मैं तो मैं तो भूल गया राहें
रात हसीं है जवाँ हैं नज़ारे
झूम चले हम दिल के सहारे
रात हसीं है जवाँ हैं नज़ारे
झूम चले हम दिल के सहारे
आज कोई हमको न पुकारे
रोकती है मेरी राहें
मय की बोतल जैसी बाहें
हाय हाय ये निगाहें
हाय हाय हाय ये निगाहें
कर दे शराबी जिसे चाहें जिसे चाहें
मैं तो मैं तो भूल गया राहें
यूँ जो समा बहका बहका हो
हम भी ज़रा बहकें तो मज़ा हो
यूँ जो समा बहका बहका हो
हम भी ज़रा बहकें तो मज़ा हो
आँख पिये और दिल को नशा हो
ये इशारे ये अदाएँ
मय की बोतल जैसी बाहें
हाय हाय ये निगाहें
हाय हाय हाय ये निगाहें
कर दे शराबी जिसे चाहें जिसे चाहें
मैं तो मैं तो भूल गया राहें
हाय हाय हाय हाय
याद नहीं
याद नहीं मेरा प्यार यहीं है
या मेरी मंजिल और कहीं है
याद नहीं मेरा प्यार यहीं है
या मेरी मंजिल और कहीं है
देखो मुझे कुछ होश नहीं है
तौबा तौबा ये निगाहें
मय की बोतल जैसी बाहें
हाय हाय ये निगाहें
हाय हाय हाय ये निगाहें
कर दे शराबी जिसे चाहें जिसे चाहें
मैं तो मैं तो भूल गया राहें
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Haye haye ye nigahen-Paying guest 1957
Artists; Dev Anand,
