साथी हाथ बढ़ाना-नया दौर १९५७
है. आजादी के बाद देश के विकास का दौर शुरू हुआ. बीसवी
शताब्दी में मशीनीकरण रफ़्तार से हुआ. मशीनों के आने से
मानव मजदूरों का रोज़गार कम हुआ. यही इस फिल्म के कहानी
का सार है. बी आर चोपड़ा की ज़्यादातर फ़िल्में सामाजिक मुद्दों
पर आधारित होती थीं. फिल्म ने भी कुछ सवाल उठाये भले
ही वो सार्थक समय फिल्म का कुल पांचवा भाग ही रहा हो. हिंदी
फिल्म के कथानक को बिना गाने के कल्पना करना मुश्किल सा
है. इसके अलावा नायक नायिका का प्रेम प्रसंग कम या ज्यादा
मात्रा में कहानी में होना आवश्यक सा लगता है. दर्शकों की इन
आदतों में ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ है इतने सालों में.
गांव में आरा मशीन मालिक के लड़के द्वारा मशीन ले आना,
जिससे मजदूरी कम हुई, उसके बाद गांव में मोटर बस के आने से
तांगा चलाने वालों के सामने रोटी रोज़गार का संकट खड़ा हुआ.
इन सब का हल किस तरीके से ढूँढा गांव वालों ने, उसका हिस्सा
है ये गीत. एक शर्त लगती है कि तांगा अगर बस से पहले गांव
तक पहुँचता है तो बस बंद कर दी जायेगी. रेस का दिन निर्धारित
होता है. उस रेस की तैयारी में नायक एक रास्ता बनाना शुरू
करता है. धीरे धीरे गांव वाले आ जुड़ते हैं.
इसका संगीत भी बेहद लोकप्रिय हुआ. फिल्म के सबसे लोकप्रिय
गीतों में से एक आज सुनते हैं. आशा और रफ़ी का गाया ये गीत
साहिर लुधियानवी का लिखा हुआ है और इस गीत के संगीतकार
हैं ओ पी नैयर. नैयर के कैरियर का ये एक बड़ा हिट एल्बम है.
गीत में राई का पर्वत बनाने की बात दूसरे अंदाज़ में कही गई
है या साहिर ने आम जनता जो करती है उसके ऊपर तंज कसा है?
गीत के बोल:
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना
साथी हाथ बढ़ाना
एक अकेला थक जायेगा
मिल कर बोझ उठाना
साथी हाथ बढ़ाना
साथी हाथ बढ़ाना
एक अकेला थक जायेगा
मिल कर बोझ उठाना
साथी हाथ बढ़ाना
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
हम मेहनतवालों ने जब भी मिलकर कदम बढ़ाया
सागर ने रस्ता छो परबत ने सीस झुकाया
फ़ौलादी हैं सीने अपने फ़ौलादी हैं बाहें
फ़ौलादी हैं सीने अपने फ़ौलादी हैं बाहें
हम चाहें तो पैदा कर दें चट्टानों में राहें
हम चाहें तो पैदा कर दें चट्टानों में राहें
साथी हाथ बढ़ाना
साथी हाथ बढ़ाना
एक अकेला थक जायेगा
मिल कर बोझ उठाना
साथी हाथ बढ़ाना
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
मेहनत अपने लेख की रेखा मेहनत से क्या डरना
कल गैरों की खातिर की आज अपनी खातिर करना
अपना सुख भी एक है साथी अपना दुःख भी एक
अपना सुख भी एक है साथी अपना दुःख भी एक
अपनी मंजिल सच की मंजिल अपना रस्ता नेक
अपनी मंजिल सच की मंजिल अपना रस्ता नेक
साथी हाथ बढ़ाना
साथी हाथ बढ़ाना
एक अकेला थक जायेगा
मिल कर बोझ उठाना
साथी हाथ बढ़ाना
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
एक से एक मिले तो कतरा बन जाता है दरिया
एक से एक मिले तो ज़र्रा बन जाता है सेहरा
एक से एक मिले तो राई बन सकती है परबत
एक से एक मिले तो राई बन सकती है परबत
एक से एक मिले तो इन्सां बस में कर ले किस्मत
एक से एक मिले तो इन्सां बस में कर ले किस्मत
साथी हाथ बढ़ाना
साथी हाथ बढ़ाना
एक अकेला थक जायेगा
मिल कर बोझ उठाना
साथी हाथ बढ़ाना
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
साथी हाथ बढ़ाना साथी रे
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Sathi haath badhana-Naya daur 1957
Artists: Dilip Kumar, Vaijayantimala
