चंदा खेले आँख-मिचौली-जोगन १९५०
बढ़ कर एक गीत हैं. आज उन्हीं में से सुनते हैं एक खुशनुमा
गीत. पंडित इन्द्र की रचना है और बुलो सी रानी का संगीत.
बुलो सी रानी भी एक प्रतिभावान संगीतकार थे जिन्हें ज्यादा
प्रसिद्धि और कामयाबी नहीं मिली, मदर उनके कुछ गीत आज
भी संगीत रसिक प्रेम से सुना करते हैं. गीत के दोनों अंतरों
की धुन अलग है. ये कारनामे आपको कुछ ही संगीतकारों के
संगीत में मिलेंगे. अनिल बिश्वास एक दिग्गज थे जिनके कई
गीतों में आपको अंतरों का संगीत और संगीत के टुकड़े अलग
अलग मिलेंगे. और भी हैं ऐसे उदाहरण जिनपर बात करेंगे
फिर कभी.
गीत के बोल:
चंदा खेले आँख-मिचौली
बदली से नदी किनारे
बदली से नदी किनारे
दुलहन खेले फागुन होली
दुलहन खेले फागुन होली
पिया करो न हम से ठठोली
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
चंदा खेले आँख-मिचौली
चंदा खेले आँख-मिचौली
रंग रूप से भर कर झोले भर कर झोले
सजनी यूँ सजन से बोले
सजनी यूँ सजन से बोले
देख पिया देख पिया देख पिया देख पिया
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
चंदा खेले आँख-मिचौली
चंदा खेले आँख-मिचौली
बदली से नदी किनारे
बदली से नदी किनारे
नाच उठी तारों की टोली
नाच उठी तारों की टोली
रूठ के चल दी बदली भोली
रूठ के चल दी बदली भोली
देख पिया देख पिया देख पिया देख पिया
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
चंदा खेले आँख-मिचौली
चंदा खेले आँख-मिचौली
बदली से नदी किनारे
बदली से नदी किनारे
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
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Chanda khele aankh micholi-Jogan 1950
Artist: Nargis
