Sep 13, 2017

दिल ढूँढता है फिर वही(सोलो)-मौसम १९७५

यादों को औंधी करवट दिलाने वाला एक गीत सुनते हैं फिल्म
मौसम से.

बोल गुलज़ार के, संगीत मदन मोहन और आवाज़ भूपेंद्र की है.
इसे रात में सुनने में ज्यादा आनंद आता है.

फिल्म में ये गीत टाईटल्स के साथ पार्श्व में बजता है.



गीत के बोल:

दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिन
दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिन
बैठे रहे तसव्वुर-ए-जानाँ किये हुए
दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिन…

जाड़ों की नर्म धूप और आँगन में लेट कर
आँखों पे खींच कर तेरे आँचल के साए को
औंधे पड़े रहे कभी करवट लिये हुए
दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिन

या गरमियों की रात जो पुरवाईयाँ चलें
ठंडी सफ़ेद चादरों पे जागें देर तक
तारों को देखते रहें छत पर पड़े हुए
दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिन…

बर्फ़ीली सर्दियों में किसी भी पहाड़ पर
वादी में गूँजती हुई खामोशियाँ सुनें
आँखों में भीगे भीगे से लम्हे लिये हुए
दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिन
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Dil dhoondhta hai(solo)-Mausam 1975

Artist: Sanjeev Kumar

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